बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 17 जनवरी। बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और आदिवासी पहचान को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित बस्तर पंडुम 2026 के तहत शनिवार को लोहांडीगुड़ा के ग्राम धाराऊर के आम बगिया में एवं जगदलपुर विकासखंड के ग्राम आसना में स्थित बादल अकादमी में विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण कलाकारों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों की सहभागिता रही।
लोहांडीगुड़ा के ग्राम धाराऊर में बस्तर सांसद महेश कश्यप, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल और जगदलपुर विकासखंड के ग्राम आसना में में स्थित बादल अकादमी में विधायक किरण सिंह देव मुख्य रूप से उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने पारंपरिक नृत्य, गीत, वाद्य यंत्र, वेशभूषा, लोक व्यंजन और लोककला की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया तथा प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडूम जैसे आयोजन बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को अक्षुण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे का सशक्त माध्यम है।
विधायक किरण देव ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को बनाने में हमारे पूर्वजों की कई पीढिय़ां लगी हैं। उन्होंने न केवल रीतियों को, बल्कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों को भी संरक्षित किया। श्री देव ने कहा हमारी संस्कृति हमारी पहचान है हमें हमारी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। बस्तर पंडूम ने ग्रामीण कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया है और इससे स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
वहीं विधायक विनायक गोयल ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की लोकसंस्कृति पूरे देश के लिए गौरव का विषय है, जिसे संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन आगामी जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया। आयोजन में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कलाकार एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
बस्तर पंडुम में आदिवासी संस्कृति और परंपरा का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ के बस्तर की सोंधी मिट्टी की महक से रूबरू करा दिया। च्बस्तर पण्डुमज् के नाम से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत आस्था और विश्वास के प्रतीक माई दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना की जिसके बाद पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। लेकिन इस आयोजन का आकर्षण केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि बस्तर के जंगलों का दुर्लभ स्वाद भी यहाँ प्रमुखता से छाया रहा।
खान-पान के शौकीनों के लिए यह आयोजन किसी दावत से कम नहीं था। यहाँ बस्तर के वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ कंद-मूलों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जिसमें कोचई, तरगारिया, डेंस, कलमल, पीता, सोरेंदा, जिमी और नागर कांदा शामिल थे। इन कंदों ने जहाँ लोगों को प्रकृति के उपहारों से परिचित कराया, वहीं पारंपरिक व्यंजनों ने भी खूब वाहवाही बटोरी। जोंधरी लाई के लड्डू की मिठास और जोंधरा, मंडिया व पान बोबो जैसे पारंपरिक पकवानों का स्वाद चखकर लोग अभिभूत हो गए। गुड़ बोबो की मिठास के साथ तीखुर बर्फी और भेंडा चटनी ने भोजन प्रेमियों को एक अविस्मरणीय जायका प्रदान किया। बादल अकादमी के कार्यक्रम में राजाराम तोड़ेम एवं अरविंद नेताम ने बस्तर पंडुम के संबंध में अपनी बात रखी।
इस दौरान छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव,जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि जनपद पंचायत सदस्य, संरपंच एवं समाज प्रमुख के अलावा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, जनपद पंचायत सीईओ अमित भाटिया और लोहांडीगुड़ा के कार्यक्रम में एसडीएम नीतीश वर्मा, जनपद पंचायत सीईओ थानेश्वर पांडेय व स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं काफी संख्या में जनमानस उपस्थित थे।


