बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 11 जून। भीषण गर्मी में जिले का हरेली ईको रिजॉर्ट नेचर और एडवेंचर से भरा टूरिस्ट स्पॉट बनकर उभरा है। जब तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, तब बारनवापारा अभयारण्य के पास स्थित हरेली इको रिजॉर्ट पर्यटकों से भरा हुआ है। यहां लोग ना सिर्फ प्रकृति और सुकून का अनोखा अनुभव लेने पहुंच रहे हैं बल्कि एडवेंचर के लिए भी यहां बैंबू राफ्टिंग जैसी सुविधा है।
जंगल के बीच रोमांच का नया ठिकाना
मोहदा गांव में स्थित हरेली इको रिजॉर्ट बारनवापारा अभयारण्य से करीब 10 किलोमीटर दूर है। यहां पर्यटक बैंबू राफ्टिंग, कयाकिंग और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं।
तेज धूप में भी पहुंच रहे सैकड़ों पर्यटक
दोपहर की तेज धूप के बावजूद यहां बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे. कोई झील में कयाकिंग कर रहा था तो कोई बैंबू राफ्टिंग का मजा ले रहा था। कई परिवार जंगल सफारी के लिए तैयार नजर आए। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम पूनम शर्मा और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने भी यहां बैंबू राफ्टिंग का अनुभव लिया. झील के शांत पानी में बांस से बनी नावों पर सैर कर रहे पर्यटक प्रकृति के बेहद करीब महसूस कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के 144 स्थान चिन्हित
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम पूनम शर्मा ने बताया कि हरेली इको रिजॉर्ट को पूरी तरह इको-फ्रेंडली अवधारणा के साथ विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं और पर्यटन गतिविधियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ा गया है। उनके अनुसार प्रदेशभर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 144 स्थानों को पर्यटन गंतव्य के रूप में चिन्हित किया गया है. इन स्थलों के विकास से न केवल पर्यटकों को नई सुविधाएं मिलेंगी बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम पूनम शर्मा का कहना है कि एक समय केवल वन्यजीवों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाने वाला बारनवापारा क्षेत्र अब एडवेंचर टूरिज्म की नई पहचान भी बना रहा है. प्रकृति और पर्यटन के बीच संतुलन बनाकर विकास किया जाए तो ग्रामीण और वन क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है।
खूबसूरत द्वीप भी मौजूद
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने बताया कि हरेली इको रिजॉर्ट से लगी झील के बीच एक खूबसूरत द्वीप मौजूद है. इस द्वीप को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि पहले जहां पर्यटक यहां केवल पिकनिक मनाने आते थे, वहीं अब बैंबू राफ्टिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियों के कारण यहां रोमांच पसंद पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
डॉ. अनुराधा दुबे का कहना है कि आने वाले समय में यहां और भी नई सुविधाएं शुरू की जाएंगी, जिससे पर्यटक जंगल और प्रकृति के और करीब पहुंच सकेंगे।
बलौदाबाजार का पहला बैंबू राफ्टिंग स्थल
अब तक छत्तीसगढ़ में बैंबू राफ्टिंग की पहचान मुख्य रूप से बस्तर क्षेत्र से जुड़ी रही है. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास धुड़मारास और मांझीपाल क्षेत्रों में पर्यटक लंबे समय से इस गतिविधि का आनंद लेते रहे हैं. लेकिन फरवरी 2025 से शुरू हुई हरेली इको रिजॉर्ट की बैंबू राफ्टिंग ने बलौदाबाजार को भी राज्य के एडवेंचर टूरिज्म मानचित्र पर स्थापित कर दिया है. यह छत्तीसगढ़ का दूसरा और बलौदाबाजार जिले का पहला बैंबू राफ्टिंग स्थल बन गया है.
केरल मॉडल पर विकसित हो रहा 4.5 एकड़ में फैला प्राकृतिक सौंदर्य
रिजॉर्ट को केरल के इको-टूरिज्म मॉडल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना भी है। यहां आसपास के गांवों के युवाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैले इस इको रिजॉर्ट की सबसे बड़ी पहचान इसकी प्राकृतिक झील है। झील में पानी की गहराई 8 से 15 फीट तक है. चारों तरफ हरियाली, पक्षियों की आवाजें और जंगल की ठंडी हवा पर्यटकों को खास अनुभव देती हैं।
घर जैसा स्वादिष्ट और जैविक भोजन
रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और कांकेर सहित प्रदेश के कई जिलों से यहां पर्यटक पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि यहां जंगल, झील और रोमांच का अनोखा संगम देखने को मिलता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी सुरक्षित तरीके से वाटर एक्टिविटी का आनंद ले सकते हैं. हरेली इको रिजॉर्ट सिर्फ एडवेंचर के लिए ही नहीं बल्कि अपने भोजन के लिए भी जाना जा रहा है. यहां जैविक खेती से तैयार सब्जियां, दाल और चावल का उपयोग किया जाता है। पर्यटकों को गांव के घर जैसा ताजा और पारंपरिक भोजन परोसा जाता है।
बारनवापारा में बढ़ा एडवेंचर टूरिज्म
पहले बारनवापारा अभयारण्य केवल जंगल सफारी और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब हरेली इको रिजॉर्ट ने यहां एडवेंचर टूरिज्म का नया अध्याय जोड़ दिया है। बैंबू राफ्टिंग, कयाकिंग, जंगल सफारी और प्राकृतिक भोजन के कारण यह जगह पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है।
प्रकृति, रोमांच और सुकून का अनोखा संगम
45 डिग्री की तपती गर्मी में भी बड़ी संख्या में पर्यटकों का यहां पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि हरेली इको रिजॉर्ट तेजी से छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच और सुकून तीनों का अनुभव एक साथ मिलता है।


