बलौदा बाजार

सीमेंट संयंत्र प्रबंधन-पंचायतों के बीच ठनी, सरपंचों ने दी आंदोलन की चेतावनी
08-Jun-2026 6:52 PM
सीमेंट संयंत्र प्रबंधन-पंचायतों के बीच ठनी, सरपंचों ने दी आंदोलन की चेतावनी

मांगों पर जल्द फैसला होगा-सीमेंट प्रबंधन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 8 जून। जिले के ग्राम खपराडीह स्थित श्री सीमेंट संयंत्र प्रबंधन और स्थानीय प्रभावित ग्राम पंचायतों के बीच विवाद गहरा गया है। प्रभावित गांवों के सरपंचों ने पंचायत के यूनिट हेड हुकुमचंद गुप्ता को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर लाखों रुपए का बकाया संपत्ति कर चुकाने और स्थानीय युवाओं को तत्काल रोजगार देने की मांग की हैं। सरपंचों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

इस पूरे विवाद पर सीमेंट प्लांट के एचआर हेड देवेंद्र सिंह ने कहा कि सरपंचों का मांग पत्र प्राप्त हुआ हैं। प्रबंधन इस संवेदनशील मामले का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही इस पर उचित और नियमसंगत निर्णय लिया जाएगा।

सौंप गए ज्ञापन में खपराडीह सरपंच गजेंद्र वर्मा, भरूवाड़ीह सरपंच नरेंद्र कश्यप और सेमराडीह सरपंच प्रतिनिधि जितेंद्र वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष चार जुलाई 2025 को भी रोजगार के मुद्दे पर चंडी ग्राम पंचायत द्वारा उग्र प्रदर्शन किया गया था। उस समय यूनिट हेड ने स्वयं प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर अटेंडेंट ऑपरेटर, खलासी, टेकनीशियन और हेल्पर जैसी तकनीकी व गैर तकनीकी पदों पर 50 रिक्तियां होने की बात स्वीकार की थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है की नई यूनिट हेड के आने से पहले स्थानीय युवाओं का इंटरव्यू भी हो चुका है, लेकिन प्रबंधन जानबूझकर पैकिंग प्लांट और अन्य विभागों में नियुक्तियों को रोके हुए हैं।

83 लाख संपत्ति कर बकाया

सरपंचों ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि नियमों के तहत संयंत्र को ग्राम पंचायत को दो से तीन प्रतिशत तक संपत्ति कर देना अनिवार्य हैं। खपराडीह के सरपंच गजेंद्र वर्मा के अनुसार सीमेंट पर उनके पंचायत का लगभग 38 लख रुपए बकाया हैं। वही भरूवाड़ीह सरपंच गजेंद्र कश्यप ने बताया कि उनके पंचायत का भी करीब 45 लख रुपए का संपत्ति कर संबंध लंबित हैं। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रबंधन टैक्स देने में आनाकानी कर रहा है जो सीधे तौर पर पंचायती राज अधिकारों का हनन हैं।

औद्योगिक नीति की अनदेखी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संयंत्र में नए अधिकारियों के आने के बाद कॉस्ट कंट्रोल लागत नियंत्रण का हवाला देकर स्थानीय अकुशल व कुशल श्रमिकों की लगातार छंटनी की जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों में मानसिक तनाव हैं। यह छत्तीसगढ़ शासन की औद्योगिक नीति 2019 का खुला उल्लंघन हैं, जिसके तहत कुशल वर्ग में 100 फीसदी कुशल में 70 फीसदी और प्रबंधकीय पदों पर 40 फीसदी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।


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