बलौदा बाजार
भाटापारा, 7 जून। भाटापारा विधायक इंद्र साव ने प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे सुशासन तिहार शिविरों पर सवाल उठाते हुए एक प्रेस बयान जारी किया है। विधायक ने कहा है कि सुशासन तिहार सिर्फ पेपरबाजी तक सीमित है। पानी, बिजली, खाद तक नहीं मिल रहा है।
विधायक ने आरोप लगाया है कि इन शिविरों के माध्यम से आम जनता और किसानों की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है और प्रशासनिक स्तर पर केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विधायक इंद्र साव ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिमगा नगर का उदाहरण देते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। बताया कि सिमगा के शंकर नगर स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित शिविर में कुल 610 आवेदन प्राप्त हुए थे।
इन आवेदनों में से 560 आवेदन विभिन्न मांगों से और 50 आवेदन शिकायतों से संबंधित थे। विधायक का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इनमें से एक भी आवेदन का मौके पर निराकरण नहीं किया गया, जो नागरिकों की अपेक्षाओं के विपरीत है।
विधायक ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में क्लस्टर स्तर पर हो रहे इन शिविरों के आयोजन के लिए ग्राम पंचायतों से सरपंच और सचिव के माध्यम से 10,000 प्रति पंचायत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को मूलभूत मद और 15वें व 16वें वित्त आयोग की राशि भी पूरी तरह से नहीं मिल पाई है, ऐसे में उन पर शिविर के नाम पर राशि देने का दबाव बनाना अनुचित है।
विधायक इंद्र साव ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को यूरिया और डी.ए.पी. खाद मिलने में परेशानी हो रही है। साथ ही सहकारी समितियों में टोकन वितरण व्यवस्था भी त्रुटिपूर्ण है। सहकारी बैंकों में कथित अवैध वसूली और धान खरीदी में आ रही अनियमितताओं को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा इन शिकायतों पर कोई जांच या सुनवाई नहीं की जा रही है।
इंद्र साव ने आरोप लगाया कि विगत दिनों भाटापारा ब्लॉक के ग्राम करहीबाजार में आयोजित शिविर में मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान कुछ किसानों को करीब 6 घंटे तक थाने में बिठाकर रखा गया, ताकि वे प्रशासन से सीधे सवाल न कर सकें।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिविरों के दौरान स्थानीय पत्रकारों को भी जनहित से जुड़े सवाल पूछने से रोका जा रहा है।
विधायक ने कहा-सुशासन का दावा करने वाली सरकार वर्तमान में विज्ञापनों और कागजी दावों तक सीमित है। धरातल पर बिजली, पानी और खाद के लिए किसान व ग्रामीण परेशान हैं। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी कमजोर हुई है।


