बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े संदेश दिए जा रहे हैं। वहीं बलौदाबाजार जिले के नगर पंचायत पलारी में रहने वाले एक परिवार ने प्रकृति प्रेम की ऐसी मिशाल कायम की है, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गई है। यहां एक परिवार ने विकास और निर्माण के नाम पर पेड़ को काटने के बजाय उसे अपने जीवन और घर का अभिन्न हिस्सा बना लिया है।
पलारी निवासी कारोबारी अमृत साहू का परिवार पिछले तीन पीढिय़ों से अपने घर के भीतर स्थित एक विशाल पीपल के पेड़ को सहेजकर रखे हुए है। लगभग 70 वर्ष से अधिक पुराने इस पीपल के पेड़ को परिवार केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह मानता है। यही कारण है कि जब मकान का निर्माण हुआ तो पेड़ को हटाने के बजाय पूरे घर की संरचना ही पेड़ के अनुरूप तैयार की गई।
घर के इर्द-गिर्द पीपल के पेड़
यह अनोखा दृश्य देखने वालों को आश्चर्यचकित कर देता है। परिवार का तीन मंजिला मकान इस पीपल के पेड़ के इर्द-गिर्द खड़ा है। पेड़ का तना और शाखाएं मकान की तीनों मंजिलों तक फैली हुई हैं। छत के ऊपर तक इसकी डालियां पहुंची हैं और हरे-भरे पत्ते पूरे घर को प्राकृतिक छांव प्रदान करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं इस घर को अपना आशीर्वाद दे रही हो।
पिता के बाद बेटे संभाल रहे हैं परंपरा
अमृत साहू बताते हैं कि यह पेड़ उनके पिता स्वर्गीय गोपाल साहू के समय से मौजूद है। उनके पिता ने इसे सहेजा, फिर उन्होंने इसकी देखभाल की और अब उनके बेटे आशीष साहू की पीढ़ी भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। परिवार के अधिकांश सदस्य इसी पेड़ की छांव में खेलते-कूदते बड़े हुए हैं। घर के बच्चों का बचपन, परिवार के मांगलिक कार्यक्रम, शादी-विवाह और जीवन के अनेक महत्वपूर्ण क्षण इसी पेड़ की छाया में बीते हैं।
वे बताते हैं कि समय के साथ इस पीपल के पेड़ से उनका भावनात्मक रिश्ता बन गया है। परिवार का मानना है कि यह वृक्ष उनके सुख-दुख का साथी रहा है और उनके कारोबार तथा जीवन में शुभता लेकर आया है। आज भी परिवार का व्यवसाय इसी पेड़ की छांव में संचालित हो रहा है। घर के जिन कमरों में पेड़ की जड़ें, तना या शाखाएं फैली हुई हैं, वहां मकान का निर्माण उसी के अनुरूप किया गया है।
नियमित की जाती है पेड़ की पूजा-अर्चना
परिवार ने कभी भी पेड़ को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की। तीसरी मंजिल पर पेड़ की डालियां और पत्ते पूरे छत को प्राकृतिक हरियाली और ठंडक प्रदान करते हैं। वहीं परिवार ने छत पर ही एक छोटा सा मंदिर भी बनाया है, जहां नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। परिवार का कहना है कि उन्हें इस पेड़ से कभी कोई परेशानी महसूस नहीं हुई। इसके विपरीत यह वृक्ष घर में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक वातावरण बनाए रखता है। गर्मी के दिनों में भी घर के भीतर ठंडक बनी रहती है और पक्षियों का कलरव पूरे वातावरण को जीवंत बनाए रखता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पीपल का वृक्ष पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वायु को शुद्ध करने, तापमान नियंत्रित रखने और जैव विविधता को संरक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं भारतीय संस्कृति में पीपल को जीवन, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
आज जब शहरीकरण और विकास की दौड़ में हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, ऐसे समय में अमृत साहू का परिवार यह संदेश दे रहा है कि यदि मन में प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता हो तो विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।


