बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 4 जून। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा के नाम पर अभिभावकों पर डाले जा रहे आर्थिक बोझ को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रूप अपनाया है।
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही अशासकीय विद्यालयों द्वारा पालकों को किसी विशेष दुकान से ही किताबें, गणवेश और अन्य शिक्षण सामग्री खरीदने के लिए बाध्य किए जाने की लगातार शिकायत सामने आ रही थी। इन चुनिंदा दुकानों में सामग्री के मनमाने दाम वसूले जाने से अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक भार झेलना पड़ रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक जांच के आदेश जारी किए हैं। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के नेतृत्व में एक जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है जो स्कूल प्रबंधन और संबंधित दुकानों के बीच संभावित साठगांठ की जांच करेगी।
समिति में जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती तथा राज्य कर विभाग रायपुर वृत की सहायक आयुक्त को भी शामिल किया गया हैं।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने कहा कि किसी विशेष दुकान से किताबें, गणवेश या अन्य सामग्री खरीदने का दबाव बनाने की अनुमति नहीं हैं। इस प्रकार की शिकायतों पर कार्रवाई होगी।
बिल व लेन-देन की भी जांच
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार समिति न केवल स्कूलों द्वारा विशेष दुकानों को बढ़ावा देने की शिकायतों की जांच करेगी बल्कि उन दुकानों की वित्तीय लेनदेन बिलिंग व्यवस्था और कर संबंधित अभिलेखों की भी पड़ताल करेगी। राज्य कर विभाग की भागीदारी से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या कर चोरी सामने आती है तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा केवल किताबों और गणवेशों तक सीमित नहीं रहेगा। निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि की भी जांच होगी। कोई विद्यालय नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए बिना फीस बढ़ता पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
प्रभारी व बीईओ से शिकायत करें
अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विशेष हेल्प डेस्क भी स्थापित की गई हैं। यदि कोई विद्यालय किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने का दबाव बनाता है या निर्धारित नियमों के विपरीत शुल्क वसूलता है तो पालक सीधे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के मान्यता कक्ष प्रभारी अथवा संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
शिकायत के साथ रसीद स्कूल द्वारा जारी आदेश या अन्य दस्तावेज जमा कर पावती भी प्राप्त की जा सकेगी। निगरानी के लिए प्रशासन ने प्रत्येक विकासखंड में अलग-अलग जांच दल गठित किए हैं। इन दलों में स्थानीय एसडीएम विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा जीएसटी निरीक्षकों को शामिल किया गया हैं।
नियमित निगरानी करें
सेवानिवृत्त प्रोफेसर एसएन पाध्येय का कहना है कि जिला प्रशासन की इस शक्ति से जिले के निजी स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद हैं। साथ ही शिक्षा के नाम पर होने वाली कथित मनमानी और आर्थिक शोषण का भी अंकुश लगने की संभावना हैं। लेकिन लगातार निगरानी की जरूरत हैं। शिकायतों का केवल इंतजार करना काफी नहीं हैं। तभी इस काम में सफलता मिलेगी।


