बलौदा बाजार

पैरालीगल वॉलंटियर्स का प्रशिक्षण
09-Feb-2026 3:22 PM
पैरालीगल वॉलंटियर्स का प्रशिक्षण

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 9 फरवरी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार द्वारा पैरालीगल वालंटियर्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अब्दुल जाहिद कुरैशी के निर्देशन में जिला न्यायालय परिसर में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन स्टेट प्लान ऑफ एक्शन के तहत च्च््रष्ष्द्गह्यह्य ह्लश छ्वह्वह्यह्लद्बष्द्ग द्घशह्म् ङ्कद्बष्ह्लद्बद्वह्य शद्घ ॥ह्वद्वड्डठ्ठ-ङ्खद्बद्यस्रद्यद्बद्घद्ग ष्टशठ्ठद्घद्यद्बष्ह्ल (॥ङ्खष्ट), 2025ज्ज् योजना के अंतर्गत पैरालीगल वालंटियर्स के लिए ओरिएंटेशन-इंडक्शन-रिफ्रेशर प्रशिक्षण के रूप में किया गया।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जानकारी दी कि प्रत्येक माह पैरालीगल वालंटियर्स को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस माह का प्रशिक्षण विशेष रूप से नालसा की नई योजना च्च््रष्ष्द्गह्यह्य ह्लश छ्वह्वह्यह्लद्बष्द्ग द्घशह्म् ङ्कद्बष्ह्लद्बद्वह्य शद्घ ॥ह्वद्वड्डठ्ठ-ङ्खद्बद्यस्रद्यद्बद्घद्ग ष्टशठ्ठद्घद्यद्बष्ह्ल (॥ङ्खष्ट), 2025 पर केंद्रित रहा। प्रशिक्षण तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक गर्ग, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी सारिका नन्दे, अमिता जायसवाल तथा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का तात्पर्य मनुष्यों और जंगली जानवरों के बीच होने वाली नकारात्मक अंत:क्रिया से है, जिसके परिणामस्वरूप मानव जीवन, फसल, पशुधन और संपत्ति को हानि पहुँचती है। साथ ही इससे वन्यजीवों और उनके आवासों पर भी प्रभाव पड़ता है। भारत में इस प्रकार के संघर्ष प्राय: हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू और जंगली सूअर जैसे जानवरों से जुड़े होते हैं, जो मुख्यत: जंगलों की सीमाओं और गलियारों से संबंधित क्षेत्रों में देखे जाते हैं। नई योजना के अंतर्गत मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित व्यक्तियों को नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इन पीडि़तों को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 12 के दायरे में शामिल किया गया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए पैरालीगल वालंटियर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 ताकि वे संबंधित विभागों, विशेषकर वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर पीडि़त व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ दिलाने में सहायता कर सकें।

इस योजना के तहत प्रत्येक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जिसमें एक वरिष्ठ कर्मचारी, एक पैरालीगल वालंटियर और एक पैनल अधिवक्ता शामिल होंगे। इनका कार्य पीडि़त व्यक्तियों को आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना होगा।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक गांव, ग्राम पंचायत और वन्यजीव संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन तथा घर-घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से पीडि़त व्यक्तियों को उनके अधिकारों, क्षतिपूर्ति प्रावधानों और शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल से वन्यजीवों के हमलों से प्रभावित व्यक्तियों को नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त हो सकेगी।


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