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Posted Date : 15-Jul-2018
  • जर्मनी की खिलाड़ी एंजलीक कर्बर ने विम्बलडन ग्रैंड स्लैम महिला एकल वर्ग के फाइनल में सात बार की चैंपियन सेरेना विलियम्स को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया है।
    23 ग्रैंड स्लैम जीत चुकीं सेरेना विलियम्स को एंजलीक ने 6-3, 6-3 से हराया। यह एंजलीक कर्बर का पहला विम्बलडन टाइटल है। एंजलीक कर्बर ने पहले मैच पॉइंट में सर्विस रिटर्न में जीत हासिल की। वैसे तो कर्बर रक्षात्मक खेल के लिए जानी जाती हैं मगर इस मैच में सेरेना के खिलाफ वह खास रणनीति के साथ उतरी थीं। सेरेना को कोर्ट में तेजी से मूवमेंट करने में दिक्कत आ रही थी और कर्बर ने इसी बात का फायदा उठाया।
    सेरेना ने सेमीफाइनल में बेल्जियम की जूलिया जॉजेस को 6-2, 6-4 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी। वहीं कर्बर ने सेमीफाइनल में लातविया की येलेना ओस्टापेंको को 6-3, 6-3 से हराया था। सितंबर में एक बच्ची को जन्म देने के बाद चौथे टूर्नामेंट में खेल रहीं सेरेना विलियम्स को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। सेरेना और कर्बर साल 2016 में विम्बलडन के फाइनल में भिड़ चुकी हैं। उस समय सेरेना ने जीत हासिल की थी।
    बाएं हाथ से खेलने वालीं एंजलीक कर्बर तीसरी बार किसी ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंची थीं, जिनमें से दो बार उन्हें जीत हासिल की है। इससे पहले वह 2016 में ऑस्ट्रेलियन ओपन और यूएस ओपन जीत चुकी हैं। (बीबीसी)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 15 जुलाई। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मैच में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने वनडे करियर के 10 हजार रन पूरे कर लिए। दस हजार रन के क्लब में शामिल होने वाले धोनी 12वें क्रिकेटर हैं। खास बात ये है कि धोनी ने 50 से ज्यादा के औसत के साथ 10 हजार रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज हैं। धोनी ने ये कीर्तिमान अपने 320वें मैच में बनाया।
    औसत के लिहाज से धोनी ने सचिन तेंदुलकर और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग को भी पछाड़ दिया है। सचिन का औसत 45 है जबकि पोंटिंग ने 42 के औसत से रन बनाए हैं। धोनी के बाद औसत में सबसे ऊपर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज जाक कैलिस हैं जिन्होंने 44 के औसत से 10 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं।
    10 हजार रन बनाने वाले वह भारत के चौथे क्रिकेटर हैं। वहीं श्रीलंका के कुमार संगाकारा के बाद इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह दूसरे विकेटकीपर हैं। इस मुकाम पर सबसे तेजी से पहुंचने वाले वह चौथे भारतीय और दुनिया के 12वें क्रिकेटर हैं। भारत की तरफ से उनसे पहले सचिन तेंदुलकर (18426 रन), सौरव गांगुली (11363) और राहुल द्रविड़ (10889) ने दस हजार से अधिक रन बनाए हैं।
    37 साल के धोनी ने 10 हजार रन पूरे करने के लिए 273 पारियां खेली। रिकी पोंटिंग ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 266, जैक्स कैलिस ने 272, सचिन तेंदुलकर ने 259 और सौरव गांगुली ने 263 पारियां खेली थी। धोनी नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने आते हैं। धोनी के अलावा इस मुकाम पर पहुंचने वाले बाकी सभी बल्लेबाज या तो ओपनर हैं या तो नंबर 3 या नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने आते थे। ऐसे में किसी भी बल्लेबाज के लिए नंबर 6 और 7 पर आकर बल्लेबाजी करना और 10 हजार रन बनाना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।  
    इसके अलावा धोनी ने नंबर सात पर बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा शतक भी जड़े हैं। धोनी ने 7 नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 10 शतक जड़े हैं। वहीं वनडे में बतौर कप्तान उन्होंने सबसे ज्यादा छक्के जड़े हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा स्टंपिंग धोनी ने ही की है।
    वनडे में बतौर विकेटकीपर एक मैच में सबसे ज्यादा रन धोनी के नाम ही दर्ज है। इतना ही नहीं इसके अलावा उनकी कप्तानी में सबसे ज्यादा टी-20 (41) जीत भी हासिल हुई है।  श्रीलंका के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगाकारा के नाम वनडे क्रिकेट में 404 मैचों की 380 पारियों में 14,234 रन हैं। उन्होंने 296 पारी में 10,000 रन पूरे किए थे।
    इसके अलावा इंग्लैंड की बल्लेबाजी के दौरान धोनी ने वनडे में 300 कैच लेने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बने। उन्होंने जॉस बटलर को उमेश यादव के हाथों कैच कराकर ये कीर्तिमान रचा। धोनी से ज्यादा एडम गिलक्रिस्ट(417),  मार्क बाउचर(402) और कुमार संगाकारा(383) ने कैच लिए हैं।
    हाल ही में धोनी ने अपना 500वां अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेला था। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया दूसरा टी-20 मैच उनके करियर का 500वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। धोनी के अलावा तेंदुलकर ने 664 और द्रविड़ ने 509 मैच खेले हैं। (आज तक)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • मलेशिया, 15 जुलाई। मलेशिया की एक मुस्लिम लड़की ने हर किसी को हैरान कर रखा है। वो ऐसे देश में रहती हैं जहां महिलाओं को खेलने की आजादी नहीं है। ऐसे में उन्होंने फुटबॉल के साथ ऐसा करतब किया है। जिसको हर कोई आसानी से नहीं कर पाता है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है। बुर्का पहनकर वो फुटबॉल को जगल, पैरों में घुमाकर और पीठ पर रखकर करतब करती नजर आ रही हैं। उनके फ्रीस्टाइल फुटबॉल मूव्स के सब दीवाने हो चुके हैं। 
    18 वर्षीय ये लड़की मलेशिया के क्लैंग शहर में रहती हैं। जो राजधानी कुआलालम्पुर से 40 किलोमीटर दूर है। उन्होंने कहा- बुर्के से कोई परेशानी नहीं। ये आम बात है। मायने रखता है कि आप कैसे हैंडल कर पाते हो। मलेशिया में 60 प्रतिशत यानी 32 मिलियन लोग मुस्लिम हैं। अधिकतर मुस्लिम महिलाएं हिजाब में रहती हैं। 
    18 वर्षीय लड़की ने कहा- इस्लाम खेलने से नहीं रोकता। उन्होंने 2016 में फुटबॉल खेलना शुरू किया था। उन्होंने यूट्यूब में वीडियोज देखकर फुटबॉल ट्रिक्स सीखीं हैं। उन्होंने कहा- आप शरीर को जब तक फ्री छोड़कर खेल सकते हैं। उनका परिवार काफी सपोर्ट करता है और फुटबॉल खेलने के लिए प्रोत्साहित करता है। फुटबॉल मलेशिया का सबसे लोकप्रिय खेल है। पुरुषों की टीम फीफा रैंकिंग में 171वें नंबर पर आती है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • पुडुचेरी, 15 जुलाई । भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करने का फ्रांस का सपना भले ही 18वीं सदी में पुडुचेरी के साथ खत्म हो गया हो, दोनों के बीच रिश्ते अभी कायम हैं। पुडुचेरी में अभी भी बड़ी संख्या में फ्रेंच मूल के लोग रहते हैं। उसकी संरचना- सड़कों, गलियों और छोटे रेस्तरां- फ्रांस के किसी शहर की याद दिलाते हैं। ये सभी लोग रविवार को खेले जाने वाले क्रोएशिया-फ्रांस फुटबॉल विश्व कप फाइनल में फ्रांस की जीत मनाएंगे।  
    पुडुचेरी में फ्रांस की दूत कैथरीन सुआर्ड ने शनिवार को नैशनल डे पर अपनी स्पीच का अंत, कम ऑन फ्रांस के साथ किया। इससे उनके उत्साह का पता चलता है। उन्होंने जानकारी दी है कि वह दूतावास के हरियाली भरे लॉन्स को मैच के लिए खोला जाएगा। वहां बड़ी सी स्क्रीन लगेगी और फुटबॉल प्रेमी खाने और ड्रिंक्स के साथ खेल का मजा ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि अगर फ्रांस जीतता है तो आखिर में शैंपेन भी खोली जाएगी। 
    उनके साथ ही फ्रांस के अन्य लोग भी बेहद उत्साहित हैं। प्रॉस्पर इमैन्युअल ने बताया कि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि फ्रांस फाइनल में पहुंचेगा। समुद्र के पास पार्टी की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। पुडुचेरी के कई रेस्तरां और कल्चरल हॉट स्पॉट मैच की लाइव स्क्रीनिंग करेंगे। फुटबॉल प्रेमी और मेही नगर पालिका के काउंसलर रहे पलियन प्रमोद का कहना है कि ब्रिटिश राज से उलट फ्रेंच लोगों को बाहर नहीं किया गया था। उनसे हाथ मिलाया गया था। इसलिए फ्रांस के लिए उनका प्यार बरकरार है और फ्रांस की संस्कृति को भी बना कर रखा गया है। 
    पुडुचेरी से फ्रांस का कनेक्शन 17वीं-18वीं शताब्दी से है। कर्नाटक युद्धों में हार के बाद वे पूर्वी तट पर 5 पोर्ट्स तक सीमित रह गए थे लेकिन फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1954 तक इन पोर्ट्स पर नियंत्रण रखा। इन्हीं में से एक माहे है जो कि अब पुडुचेरी की हिस्सा है। वहां अभी भी फ्रांस की छाप देखने को मिलती है। माहे फ्रेंच असोसिएसन के अद्यक्ष अदियारी कनकार्जन का कहना है कि जो बेहतर खेलता है, उसे जीतना चाहिए लेकिन वे लोग फ्रांस का समर्थन कर रहे हैं और उन्हें खुशी होगी अगर फ्रांस क्रोएशिया को हरा देगा। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • लंदन, 15 जुलाई। भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में हुए दूसरे वनडे मैच में मेजबान टीम ने भारत को 86 रनों से हरा दिया। मैच के दौरान एक पल ऐसा आया जब फैंस ने अपना गुस्सा महेंद्र सिंह धोनी पर निकालने की कोशिश की। विराट कोहली ने फैंस के इस बर्ताव की निंदा करते हुए धोनी का सपॉर्ट किया है। विराट कोहली ने मैदान पर फैंस के ऐसे रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। 
    दरअसल, इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 322 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया था, जिसके जवाब में भारतीय टीम सिर्फ 236 रन ही बना पाई। भारत के बाकी बल्लेबाजों की तरह धोनी को भी शॉट लगाने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में धोनी को अपनी आक्रमक छवि से उल्टा खेलते देख लोगों ने उन्हें निशाने पर ले लिया। हद तो तब हो गई, जब धोनी की हर डॉट बॉल पर फैंस तरह-तरह की आवाजें निकालने लगे। 
    धोनी ऐसी स्थिति में शांति से खेलते रहे और कुछ देर बाद शॉट लगाने के चक्कर में आउट होकर चले गए। उन्होंने अपनी पारी में 59 गेंदों पर 37 रन बनाए। उनका औसत 62.71 रहा था। वह प्लंकेट की गेंद पर शॉट मारकर स्टोक्स के हाथों कैच हो गए। 
    धोनी के सपॉर्ट में विराट ने कहा, ऐसा कई बार देखा गया है, जब भी वह अच्छा नहीं खेल पाते लोग ऐसा करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सब उनको सबसे बेहतर फिनिशर कहते हैं, लेकिन जब वह अच्छा नहीं खेल पाते तो लोग उन्हें निशाने पर ले लेते हैं। क्रिकेट में बुरे दिन आते हैं, आज का दिन सिर्फ उनके लिए नहीं पूरी टीम के लिए बुरा रहा। लोग बहुत जल्दी नतीजों पर पहुंचने की कोशिश में रहते हैं जो ठीक नहीं। मुझे धोनी और टीम के बाकी प्लेयर्स की काबिलियत पर पूरा भरोसा है।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • मॉस्को, 15 जुलाई । फीफा वल्र्ड कप 2018 का फाइनल मुकाबला रविवार को रूस की राजधानी मॉस्को के लुज्निकी स्टेडियम में फ्रांस और क्रोएशिया के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 8.30 बजे से शुरू होगा।
    32 टीमों की शिरकत के बाद फीफा वल्र्ड कप के 21वें संस्करण के फाइनल में दो टीमें- फ्रांस और क्रोएशिया तमाम जद्दोजहद को पार कर फाइनल में पहुंची हैं। इन दोनों की नजरों में वल्र्ड चैंपियन बनने का सपना है। दोनों टीमें आज अपने इसी सपने के लिए एक दूसरे से लड़ेंगी।
    फ्रांस तीसरी बार फाइनल में पहुंची है। वह 1998 में पहली बार अपने घर में खेले गए वल्र्ड कप में फाइनल खेली थी और जीतने में सफल रही थी। इसके बाद 2006 में उसने फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन इटली से हार गई थी। फ्रांस के पास फाइनल खेलने का अनुभव है, लेकिन अगर क्रोएशिया की बात की जाए तो वह पहली बार फाइनल खेलेगी।
    क्रोएशिया यहां तक पहुंचेगी यह किसी ने भी नहीं सोचा था, लेकिन उसने जिस तरह का खेल दिखाया है, वो उसे फाइनल में जाने का हकदार बनाता है। हार न मानने की जिद क्रोएशिया की सबसे बड़ी ताकत है जो उसने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में भी दिखाई थी। एक गोल से पीछे होने के बाद अतिरिक्त समय में मैच ले जाकर इंग्लैंड से जीत छीन ली थी।
    वह लगातार तीन मैच अतिरिक्त समय में ले जाकर जीतती आई है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह आखिरी पल तक हार नहीं मानती। फ्रांस के लिए यह सिरदर्द है, लेकिन क्या क्रोएशिया, फ्रांस की बेहद मजबूत चुनौती खासकर उसके डिफेंस को भेद पाने में कामयाब रहेगी, यह मैच में ही पता चलेगा।
    लुका मोड्रिक की यह टीम फ्रांस को पस्त करने का माद्दा जरूर रखती है। क्रोएशिया एक संतुलित टीम है जिसकी ताकत उसकी मिडफील्ड है। लुका मोड्रिक को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर माना जाता है।
    कप्तान के तौर पर उनके ऊपर अपने देश को पहला वल्र्ड कप दिलाने की जिम्मेदारी है। क्रोएशिया ऐसी टीम नहीं है, जो सिर्फ एक खिलाड़ी के दम पर खेले। उसके पास एंटे रेबिक, इवान राकिटिक, सिमे वारसाल्ज्को, इवान पेरीकिस जैसे खिलाड़ी हैं।
    क्रोएशिया की एक और ताकत है उनके गोलकीपर डेनियर सुबासिच। जिन्होंने पूरे वल्र्ड कप में कई शानदार बचाव कर अपनी टीम को यहां तक पहुंचाने में शानदार भूमिका निभाई है। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उन्होंने आसान मौकों पर भी गोल नहीं करने दिए थे।
    क्रोएशिया के डिफेंस और गोलकीपर दोनों के लिए फ्रांस के आक्रामण को रोकना आसान नहीं होगा। एंटोनियो ग्रीजमैन, कीलियन एमबाप्पे, पॉल पोग्बा, एनगोलो कांते को रोकना टेढ़ी खीर है, हल्की सी चूक और ये गेंद को नेट में डाल देते हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा मुश्किल क्रोएशिया के लिए फ्रांस के डिफेंस को तोडऩा है।
    फ्रांस के डिफेंस में राफेल वरान, सैमुएल उम्तीती और गोलकीपर ह्यूगो लोरिस की तिगड़ी है जो अच्छे से अच्छे अटैक को अभी तक रोकने में सफल रही है। यह दीवार कभी न हार मानने वाली क्रोएशिया के सामने ढह जाएगी या नहीं इस बात का पता फाइनल में चलेगा।
    फ्रांस ने जब पहली बार वल्र्ड कप जीता था तब उसके कप्तान दिदिएर डेसचेम्पस थे जो इस समय टीम के कोच हैं। अगर यह रणनीतिकार फ्रांस को दूसरा वल्र्ड कप दिलाने में सफल रहता है तो वह विश्व के ऐसे तीसरे शख्स बन जाएंगे जिसने खिलाड़ी और कोच के तौर पर वल्र्ड कप जीता हो। उनसे पहले ब्राजील के मारियो जागालो और जर्मनी के फ्रांज बेककेनबायुएर ने कोच और खिलाड़ी से तौर पर वल्र्ड कप जीते हैं। फाइनल मैच के रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।
    टीमें-
    क्रोएशिया-गोलकीपर: डेनिजेल सुबासिक, लोवरो कालिनिक और डोमिनिक लिवाकोविक। डिफेंडर: वेद्रन कोलुर्का, डोमागोज विदा, इवान स्ट्रिनीक, डेजान लोवरेन, सिमे वसाल्जको, जोसिप पीवारिक, टिन जेडवेज, डुजे सालेटा कार। मिडफील्डर: लुका मोड्रिक, मटिओ कोवाचिक, इवान रेकिटिक, मिलान बाडेल्ज, मासेर्लो ब्राजोविक और फिलिप ब्राडेरिक। फॉरवर्ड: मारियो मांजुकिक, इवान पेरीसिक, निकोला कालिनीक, एंद्रेज करामारिक, मार्को पीजासा और एंटे रेबिक। 
    फ्रांस-गोलकीपर:लोरिस, स्टीव मन्दंदा, अल्फोन्स एरोओला। डिफेंडर: लुकास हर्नान्डेज, प्रेसनेल किम्पेम्बे, बेंजामिन मेन्डी, बेंजामिन पावर्ड, आदिल रामी, जिब्रिल सिदीबे, सैमुअल उम्तीती, राफेल वरान। मिडफील्डर: एनगोलो कान्ते, ब्लेस मातुइदी, स्टीवन एंजोंजी, पॉल पोग्बा, कोरेंटिन टोलिसो। फॉरवर्ड: ओउस्मान डेम्बेले, नाबिल फकीर, ओलिवियर जीरू, एंटोनी ग्रीजमैन, थॉमस लेमार, कीलियन एम्बाप्पे, फ्लोरियन थौविन।(आज तक)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • मास्को, 14 जुलाई : युवाओं से भरी फ्रांस की टीम अपने स्टार किलियान एमबापे और एंटोइन ग्रिजमान के बूते रविवार को यहां होने वाले 2018 विश्व कप फुटबॉल टूर्नमेंट के फाइनल में क्रोएशिया को पराजित कर दूसरी बार यह ट्रोफी हासिल करना चाहेगी। हालांकि चार हफ्ते पहले टूर्नमेंट के शुरू होने के समय इस फाइनल की कल्पना कुछेक लोगों ने ही की होगी। 
    माटुईडी ने कहा, ''यह हमारे लिए सबक था और इसका मतलब है कि हम जानते हैं कि फाइनल खेलना क्या होता है।'' हालांकि फ्रांस की आधी टीम अब बदल गई है, लेकिन एमबापे अपने आक्रामक प्रदर्शन से स...+
    लियोनल मेस्सी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और नेमार जैसे स्टार फुटबॉलर स्वदेश लौट चुके हैं, इसी तरह अंतरराष्ट्रीय मैचों में पारंपरिक रूप से ताकतवर टीमें जर्मनी, ब्राजील और अर्जेंटीना भी बाहर हो चुकी हैं। फ्रांस की टीम टूर्नमेंट की दूसरी सबसे युवा टीम है, जिसमें तेज तर्रार एमबापे की मौजूदगी उसके लिए प्रेरणादायी रही। वहीं क्रोएशियाई टीम भी लुका मोदरिच से प्रेरित है जो इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन मिडफील्डर में शामिल हैं। 
    हालांकि कुछ खेल समीक्षक इस बात से निराश होंगे कि फाइनल दो ताकतवर टीमों के बीच नहीं हो रहा या इसमें कोई दक्षिण अमेरिकी टीम मौजूद नहीं है। क्योंकि ऐसा स्पेन के 2010 में नीदरलैंड को मात देकर खिताब जीतने के बाद दूसरी बार हो रहा है जब ब्राजील, जर्मनी, इटली या अर्जेंटीना जैसी धुरंधर टीमों ने फाइनल में जगह नहीं बनाई है। लेकिन यह विश्व कप का फाइनल है और फ्रांस के पास 1998 के बाद दूसरा खिताब जीतकर अर्जेंटीना और उरूग्वे के साथ शामिल होने का मौका है। 
    पिछली बार जब फ्रांस ने खिताब जीता था, तब डिडिएर डेस्चैम्प्स टीम के कप्तान थे और अब वह कोच हैं। इससे वह खिलाड़ी और मैनेजर के तौर पर खिताब हासिल करने वाले तीसरे खिलाड़ी बन सकते हैं और मारियो जागालो और फ्रांज बैकेनबॉर की सूची में जुड़ सकते हैं। 
    मिडफील्डर ब्लेसे माटुईडी ने कहा, 'विश्व कप फाइनल, यह सपने के साकार होने जैसा है। हम ट्रोफी के इतने करीब हैं कि हम इसे छूना चाहते हैं। यह हमारी जिंदगी का सबसे अहम मैच है।' वर्ष 2006 के फाइनल में उसे इटली से पेनल्टी में हार का सामना करना पड़ा था और उसकी खिताब की भूख यूरो 2016 फाइनल में मेजबान पुर्तगाल से हारने के बाद और ज्यादा बढ़ गई है। 
    माटुईडी ने कहा, 'यह हमारे लिए सबक था और इसका मतलब है कि हम जानते हैं कि फाइनल खेलना क्या होता है।' हालांकि फ्रांस की आधी टीम अब बदल गई है, लेकिन एमबापे अपने आक्रामक प्रदर्शन से स्टार बने हुए हैं। उन्होंने अंतिम 16 में अर्जेंटीना पर मिली 4-3 की जीत के दौरान मैदान पर तेज तर्रार प्रदर्शन से सभी का दिल जीता। लेकिन इसके अलावा फ्रांस ने डेस्चैम्प्स की टीम के तौर पर बेहतर खेल दिखाया जिसमें उनका जोर डिफेंस पर था। 
    फ्रांस ने अपने ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया और पेरू को हराया जबकि डेनमार्क से गोलरहित ड्रॉ खेला जो टूर्नमेंट का एकमात्र गोलरहित ड्रॉ रहा। इसके बाद टीम अर्जेंटीना, उरूग्वे और बेल्जियम के सामने काफी मजबूत दिखी और अब उस फाइनल में सही प्रबल दावेदार है जो 1998 के सेमीफाइनल का दोहराव होगा। तब लिलियान थुर्राम के दो गोल की बदौलत फ्रांस ने क्रोएशिया को 2-1 से मात दी थी जो स्वतंत्र देश के तौर पर पहला विश्व कप खेल रहा था। 
    क्रोएशिया ने अपने सभी तीनों ग्रुप मैच जीते, उसने अर्जेंटीना को हराने के बाद डेनमार्क और रूस को पेनल्टी में पराजित किया। इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड को सेमीफाइनल में अतिरिक्त समय में मात दी। ज्लाटको डालिच की टीम के लिए यह सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है और अब टीम एक बार फिर खुद को प्रेरित करते हुए अंतिम प्रयास में खुद को साबित करना चाहेगी। 
    डालिच ने स्वीकार किया, 'हमने मुश्किल सफर तय किया है। यह जिंदगी में एकमात्र मौका है। हमारे लिए सबकुछ कठिनाइयों भरा रहा है, लेकिन मुझे भरोसा है कि हम प्रेरणा हासिल कर मजबूत प्रदर्शन करेंगे।' क्रोएशियाई टीम को पूरा भरोसा है कि दुनिया भर से काफी लोग उनका समर्थन करेंगे। इवान राकितिच ने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि लाखों लोग हमारे जीत की कामना करेंगे।' (एएफपी)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • सेंट पीटर्सबर्ग, 14 जुलाई। कुछ दिन पहले तक विश्व विजेता का तमगा हासिल करने की प्रबल दावेदार मानी जा रही दो टीमें, थ्री लायंस यानी इंग्लैंड और रेड डेविल्स यानी बेल्जियम खिताब जीतने का सपना टूटने के बाद शनिवार को एक दूसरे के सामने तीसरे स्थान के लिए जद्दोजहद करेंगी। दोनों के लिए इस मैच में ऊंचे मनोबल के साथ उतरना आसान नहीं होगा। वल्र्ड कप फाइनल में नहीं पहुंचना दोनों टीमों को बेशक चुभ रहा होगा, लेकिन अब समय है जब यह दोनों टीमें इससे बाहर निकल एक नए सुखद अंत को अंजाम दें।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • मोहम्मद कैफ ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है। उन्होंने इसकी घोषणा सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के जरिये की। ट्विटर पर भेजे गए एक भावुक संदेश में उन्होंने लिखा, जब से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया। मेरा सपना था कि मैं एक दिन अपने देश के लिए खेलूं। मैं सौभाग्यशाली रहा कि क्रिकेट के मैदान पर 190 दिनों तक मुझे देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। मुझे इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं इससे ज्यादा दिन देश के लिए नहीं खेल सका। अब क्रिकेट से विदाई का वक्त आ गया है और आज का दिन सबसे उपयुक्त है। मैं क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास की घोषणा करता हूं।
    आज से ठीक 16 साल पहले 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर खेलते हुए मोहम्मद कैफ ने भारत को नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। उस मैच में भारत 325 रन के भारी-भरकम लक्ष्य का पीछा करने उतरा था। वीरेंद्र सहवाग, सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के सस्ते में आउट हो जाने के बाद मोहम्मद कैफ ने युवराज सिंह के साथ मिलकर भारत की लडख़ड़ाई पारी को संभाला था। इस मैच में उन्होंने 75 गेंदों पर अविजित 87 रन बनाए थे।
    मोहम्मद कैफ साल 2003 के विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल मुकाबला खेलने वाली टीम में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा अंडर 19 टीम की कप्तानी करते हुए इस वर्ग का विश्वकप हासिल करने की उपलब्धि भी उनके नाम पर है। भारत के लिए 125 एकदिवसीय मैचों में 32.01 की औसत से कुल 2753 रन बनाने वाले कैफ का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 111 रन का रहा है। एकदिवसीय मुकाबलों में उनके नाम पर दो शतक और 17 अर्धशतक भी शामिल हैं।
    भारत के लिए कैफ ने 13 टेस्ट मैच भी खेले हैं। इस प्रारूप की 22 पारियों में उनके नाम पर 32.84 की औसत से 624 रन दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने एक शतक और तीन अर्ध शतक भी लगाए और ऐसे मुकाबलों में उनका सर्वाधिक निजी स्कोर 148 रन का रहा है। भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षकों में शुमार किए जाने वाले मोहम्मद कैफ ने अपना आखिरी मुकाबला दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर खेला था। घरेलू क्रिकेट में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व करने के साथ मोहम्मद कैफ आंध्र प्रदेश की रणजी टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं।

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई । विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में  स्वर्ण पदक जीतने के साथ इतिहास रचने वाली हिमा दास की अंग्रेजी पर गैरजरूरी टिप्पणी कर भारतीय एथलेटिक्स संघ (एएफआई) सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गया है।
    हिमा के स्वर्ण पदक जीतने के बाद एएफआई ने ट्विटर पर उनका एक वीडियो डाला, जिसमें वह एक अंग्रेजी पत्रकार से बात कर रही हैं। यह वीडियो टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जीतकर उनके फाइनल में जगह बनाने के बाद का है।
    एएफआई ने वीडियो के साथ लिखा, आईएएएफ, टेम्पेरे के सेमीफाइनल में जीत के बाद मीडिया से बात करतीं हिमा दास। वह हालांकि धाराप्रवाह अंग्रेजी नहीं बोलतीं, उन्होंने यहां भी अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। हिमा दास, आप पर हमें बहुत नाज है, ऐसे ही प्रदर्शन करती रहें और हां फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें।
    प्रशंसकों ने एएफआई की टिप्पणी को असंवेदनशील बताते हुई उसकी कड़ी आलोचना की। एक व्यक्ति ने लिखा, वह (हिमा) टेम्पेरे में ट्रैक पर अपनी प्रतिभा दिखाने उतरी थीं नाकि अंग्रेजी में। आपने जो कहा, उसपर आपको शर्म आनी चाहिए।
    एक दूसरे ट्विटर यूजर ने लिखा, आईएएएफ ने अंग्रेजी वाक कौशल के लिए उनको प्रतियोगिता में नहीं लिया, भारत में हमारे पास अंग्रेजी के बहुत सारे अच्छे वक्ता हैं लेकिन उनमें से कम ही हिमा की तरह दौड़ सकते हैं।
    आलोचना के बाद एएफआई ने स्पष्टीकरण दिया। एएफआई ने हिंदी में लिखे पोस्ट में कहा, सभी भारतवासियों से क्षमा, अगर हमारे एक ट्वीट से आप आहत हुए हैं। असल उद्देश्य यह दर्शाना था कि हमारी धाविका किसी भी कठिनाई से नहीं घबराती, मैदान के अंदर या बाहर। छोटे से गांव से आने के बावजूद, विदेश में अंग्रेजी पत्रकार से बेझिझक बात की। एक बार फिर उनसे क्षमा, जो नाराज हैं, जय हिन्द।
    नौगांव जिले के कांदुलिमारी गांव के किसान परिवार में जन्मी 18 वर्षीय हिमा कल फिनलैंड के टेम्पेर में आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देशवासियों की आंख का तारा बन गई हैं।
    वह महिला और पुरूष दोनों वर्गों में ट्रैक स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय भी हैं। वह अब नीरज चोपड़ा के क्लब में शामिल हो गयी हैं जिन्होंने 2016 में पोलैंड में आईएएएफ विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में भाला फेंक (फील्ड स्पर्धा) में स्वर्ण पदक जीता था।(भाषा)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान की किताब रेहम खान की बातें आजकल लगातार धमाका कर रही हैं। उनकी किताब आनलाइन किंडल पर रिलीज कर दी गई है। किताब में अगर महिला प्रेमिकाओं की बात की गई है तो यह आरोप भी लगाया गया है कि पुरुष भी इमरान की पसंद रहे हैं। यहां तक की उन्होंने ट्रांसजेंडर की भी सेवाएं ली हुई थीं। इस किताब की दस नई बातें जो आपको हैरान कर देंगी। हालांकि रेहम की इस किताब पर पाकिस्तान के तमाम लोग मुकदमा ठोक चुके हैं।
    1. इमरान ने क्या कहा था सकलैन के बारे में
    रेहम लिखती हैं कि इमरान जिस तरह सकलैन मुश्ताक के बारे में बातें करते थे। उससे लगता था कि उनका दिल सकलैन पर आया हुआ है। पाकिस्तान स्पिनर सकलैन अपनी क्यूट इस्माइल और अच्छे लुक के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जिस तरह सकलैन के प्रति अपने आकर्षण का इजहार किया। उसने मुझको डिस्टर्ब कर दिया।
    सकलैन पाकिस्तान के जाने माने ऑफ स्पिनर थे। जिनका टेस्ट करियर 1995 में शुरू हुआ था। उन्होंने 49 टेस्ट में 208 विकेट लिये जबकि 169 वन-डे में 289 विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। वर्ष 2004 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
    2. ट्रांसजेंडर की सेवाएं
    रेहम लिखती हैं कि एक महिला पत्रकार मुझसे मिली। जिसने पाकिस्तान फिल्म एक्ट्रैस रेशम का हवाला देते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर डांसर रिमाल आजकल इमरान को अपनी सेवाएं दे रहा है। मैं हैरान रह गई और मेरी हैरानी से वो पत्रकार हतप्रभ थी कि मैं इमरान के बारे में कितना कम जानती हूं।
    3. ज्यादा उम्र की महिलाओं से भी संबंध
    इमरान ने बचपन में ही अपनी उस नौकरानी के साथ शारीरिक रिश्ते बनाए, जो उनकी देखरेख में लगाई गई थी। उन्होंने रेहम से बातचीत के दौरान एक बार यह भी कहा कि उनकी उनसे बड़ी कजन ने तब खुद को उनके साथ छूने के लिए दबाव डाला जबकि वो दस साल के भी नहीं थे।
    4. कोकीन का सेवन कब शुरू किया
    इमरान का सेक्शुअल एडवेंचर उनके क्रिकेट करियर से पहले ही शुरू हो गया था। ड्रग्स का सेवन उन्होंने बाद में शुरू किया। इमरान ने कहा उन्होंने पहली बार कोकीन तब ली, जब जेमिमा बच्चों को उनसे दूर ले गईं। उनकी पार्टी के संस्थापक सदस्य उनकी आदत से वाकिफ थे। रेहम से उन्होंने कहा कि कोकीन उसी तरह है जैसे आधी गिलास वाइन।
    5. इमरान ने जेमिमा को चांटा मारा
    इमरान पूर्व पत्नी जेमिमा के भाई यानि साले जैक के काफी करीब रहे हैं। रेहम लिखती हैं कि एक गर्मागर्म बहस के बाद इमरान ने जेमिमा को चांटा रसीद कर दिया। वो उस समय तलाक देना चाहते थे तब जैक ने उनसे कहा वो उनकी बहन को तलाक नहीं दें। इमरान मान गए। दरअसल इमरान इस परिवार के बहुत अच्छे दोस्त ही नहीं थे बल्कि उनको लगता था कि उनके ससुर उनका जीवन संवार सकते हैं। वो ब्रिटेन के सबसे धनी और राजनीतिक तौर पर काफी संपर्कों वाले शख्स थे, जिन्होंने 90 के दशक में रेफरेंडम पार्टी बनाई।
    रेहम खान बीबीसी में पत्रकार रह चुकी हैं। वो पाकिस्तान की तहरीक ए इंसाफ पार्टी के चेयरमैन इमरान खान की दूसरी बीवी रह चुकी हैं। ये शादी केवल दस महीने चल पाई। उसके बाद उन्होंने इमरान पर किताब लिखी है। जिसके अंश आजकल पाकिस्तान में धमाका मचाए हुए हैं। उनकी किताब का ई-संस्करण अमेजन डॉट कॉम पर उपलब्ध है। (न्यूज 18)

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Posted Date : 13-Jul-2018
  • भारत की हिमा दास ने गुरुवार को फिनलैंड के टेम्पेरे में जारी आईएएएफ वल्र्ड अंडर-20 चैंपियनशिप की महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीत कर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा लिया है। हिमा ने राटिना स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 51.46 सेकेंड का समय निकालते हुए ये बड़ी जीत हासिल की। आइए जानते हैं कौन हैं भारत का नाम रोशन करने वाली ये लड़की।
    हिमा का जन्म 9 जनवरी 2000 में हुआ। अभी उनकी उम्र 18 साल है। वह असम के नागांव जिले के ढिंग गांव की रहने वाली है। उनके पिता धान की खेती करते हैं। वह एक किसान के 6 बच्चों में सबसे छोटी बेटी है और पहले लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं और एक स्ट्राइकर के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थीं।
    लेकिन फिर उन्हें स्थानीय कोच ने सलाह दी कि उन्हें एथलेटिक्स में अपना करियर बनाने चाहिए। जिसके बाद उन्होंने किस्मत आजमाने की सोची और आज वह शीर्ष एथलीटों की कतार में खुद को साबित कर दिखाया। हिमा मौजूदा अंडर 20 सत्र में सर्वश्रेष्ठ समय निकालने के कारण यहां खिताब की प्रबल दावेदार थी।
    गुवाहाटी में उनके कोच निपोन दास का कहना है कि वह हिमा की दौड़ को लेकर चिंतित नहीं थे। क्योंकि मैं जानता था कि उसकी असली दौड़ अंतिम 80 मीटर में शुरू होती है। उसने दो साल बाद स्पाइक्स (खिलाड़ी कीलदार जूते) पहने थे। हिमा पर नजर उनके कोच निपॉन की उस वक्त पड़ी जब वह स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर के डायेरक्टर के साथ बैठे थे। उस वक्त उन्होंने देखा एक लड़की ने काफी सस्ते स्पाइक्स पहने हुए थे लेकिन फिर भी उसने 100 और 200 दौड़ में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।
    निपॉन ने बताया कि वह हवा की तरह दौड़ रही थी। मैंने इतनी कम उम्र में ऐसी प्रतिभा किसी के अंदर नहीं देखी थी। हिमा के हुनर को देखते हुए कोच ने उन्हें अपने गांव से 140 किलोमीटर दूर गुवाहाटी में शिफ्ट होने के लिए कहा। ताकि वह अपने एथलेटिक्स में ज्यादा फोकस कर सके।
    लेकिन हिमा के माता- पिता अपने 6 बच्चों में से सबसे छोटी बेटी को अकेला किसी के पास छोडऩे के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में कोच ने उनके परिवार को राजी कर लिया। जिसके बाद हिमा दास को उनके कोच ने ट्रेनिंग देनी शुरू की और बहुत जल्द ही बेहतरीन स्पीड पकडऩे में सफल हो गईं।
    निपॉन ने हिमा के लिए सरसाजई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास एक किराए पर रहने वाले घर में रहने की व्यवस्था की। जिसके बाद उन्होंने हिमा के लिए अधिकारियों से राज्य अकादमी में शामिल होने के लिए रिक्वेस्ट की जो मुक्केबाजी और फुटबॉल में मशहूर था। वहीं एथलेटिक्स के लिए कोई अलग विंग नहीं था लेकिन हिमा के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें अकादमी का हिस्सा बना लिया गया।
    जैसे ही हिमा ने ये दौड़ जीतकर इतिहास रचा उन्होंने अपने कोच का ही शुक्रिया सबसे पहले किया। निपॉन शुरू से ही हिमा को गाइड करते आए हैं। इंडियन एक्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निपॉन ने कहा- मैं हमेशा हिमा को कहता था कि बड़े सपने के बारे में सोचो। क्योंकि कुछ ही लोगों को भगवान की द्वारा ये बेहतरीन प्रतिभा नसीब होती है। कोच ने बताया मेरा सपना है कि वह एशियन गेम्स की रिले टीम का हिस्सा बनें।  (आज तक)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 12 जुलाई : भारतीय तेज धाविका हिमा दास ने गुरुवार को इतिहास रच दिया। उन्होंने IAAF वर्ल्ड अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप के 400 मीटर फाइनल में गोल्ड मेडल जीता। वह ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय ऐथलीट हैं। 
    18 वर्षीय दास ने 51.46 सेकंड का समय निकालकर टॉप पोजीशन हासिल की। दास ने बुधवार को सेमीफाइनल में भी 52.10 सेकंड का समय निकालकर टॉप किया था। पहले राउंड में भी उन्होंने 52.25 सेकंड का रेकॉर्ड समय निकाला था। 
    असम की रहने वालीं दास ने भारतीयी अंडर-20 के रेकॉर्ड 51.32 सेकंड का समय निकालते हुए अप्रैल में गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में छठे स्थान पर रही थीं। इसके बाद से वह लगातार अपना समय सुधारती रही हैं। हाल ही में उन्होंने अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया था। इस इवेंट में उन्होंने 51.13 सेकंड का समय निकाला था। 
    हिमा दास ने अब स्टार जैवलिन थ्रोअर (भालाफेंक खिलाड़ी) नीरज चोपड़ा के एलीट क्लब में शामिल हो गईं। चोपड़ा ने 2016 के पिछले एडिशन में वर्ल्ड रेकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। दास ट्रैक इवेंट में पदक जीतने वालीं पहली भारतीय ऐथलीट हैं। 
    वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में इससे पहले भारत के लिए सीमा पूनिया (2002 के डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज) और नवजीत कौर ढिल्लों (ब्रॉन्ज 2014 में डिस्कस) में पदक जीता था। (नवभारतटाइम्स)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • ट्रेंट ब्रिज, 12 जुलाई : कुछ ही हफ़्ते पहले ट्रेंट ब्रिज के मैदान पर ही इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ एकदिवसीय क्रिकेट का सबसे बड़ा 481 रनों का लक्ष्य खड़ा किया था.
    लेकिन गुरुवार को इसी मैदान पर इंग्लैंड की टीम विराट कोहली की अगुवाई वाली भारतीय टीम के आगे बेबस नज़र आई. भारत ने इंग्लैंड में वनडे सिरीज़ का पहला मैच आसानी से आठ विकेटों से जीत लिया. 23 साल के कुलदीप यादव का यह वनडे क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है
    भारत की जीत के तीन नायक रहे. पहले, महज़ अपना 21वां वनडे मैच खेल रहे कुलदीप यादव, जिन्होंने 6 विकेट लेकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. दूसरे, सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा जिन्होंने अपना 17वां वनडे शतक जमाते हुए ऐसी पारी खेली कि इस मैदान बल्लेबाज़ी बेहद आसान दिखने लगी. और तीसरे, कप्तान विराट कोहली, जिन्होंने एक विकेट गिरने के बाद संभलकर खेलते हुए रोहित का अच्छा साथ निभाया और 74 रन बनाए.
    भारत इससे इंग्लैंड से हुई टी-20 सिरीज़ 2-1 से अपने नाम कर चुका है.
    भारत ने टॉस जीतकर इंग्लैंड को बल्लेबाज़ी का न्योता दिया. जेसन रॉय और जोनाथन बेयरस्टॉ की सलामी जोड़ी ने तेज़ शुरुआत दी. 10 ओवर में 70 से ज़्यादा रन बन चुके थे और लग रहा था कि मेज़बान टीम 350 के लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है. लेकिन फिर कुलदीप यादव के हाथ में गेंद आई और अपने पहले ही ओवर में उन्होंने जेसन रॉय को चलता कर दिया. इसके बाद तो जैसे विकेटों की झड़ी लग गई. कुलदीप ने एक एक कररके जो रूट और जे बेयरस्टॉ को भी पवेलियन भेज दिया.
    एक समय बिना विकेट खोए 73 के स्कोर पर खेल रही इंग्लैंड टीम 82 के योग पर तीन विकेट गंवा चुकी थी. इयान मॉर्गन को युजवेंद्र चहल ने चलता किया. इसके बाद इंग्लैंड की संकट में आई पारी को संभाला बेन स्टोक्स और जॉस बटलर ने. दोनों ने अपने अर्धशतक पूरे किए और पांचवें विकेट के लिए 93 रनों की साझेदारी की.
    इंग्लैंड सम्मानजनक स्थिति में आ गया था, लेकिन पारी के आख़िरी दौर में एक बार फिर कुलदीप ने कहर बरपाया और तीन विकेट और ले लिए. मोइन अली और अब्दुल राशिद ने कुछ अच्छे हाथ दिखाए, लेकिन 268 रनों पर मेज़बान टीम ऑल आउट हो गई.
    लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने भी ज़बरदस्त शुरुआत की. तेज़ी से रन जोड़ते हुए शिखर धवन 27 गेंदों में 40 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद खेलने आए विराट कोहली ने रोहित शर्मा का टिककर साथ दिया और दोनों ने भारतीय टीम की जीत सुनिश्चित कर दी.
    सिरीज़ का अगला मैच लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर शनिवार 14 जुलाई को खेला जाएगा. (बीबीसी)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • फुटबॉल के दीवानों का इंतजार खत्म होने वाला है। सिर्फ एक मुकाबले के बाद ही फीफा वल्र्ड कप-2018 के चैंपियन टीम का पता चल जाएगा। लुजनिकी स्टेडियम में 15 जुलाई को होने वाले खिताबी मुकाबले के लिए फ्रांस और क्रोएशिया ने क्वॉलिफाइ किया है। जहां क्रोएशियाई टीम पहली बार यहां तक पहुंची है तो दूसरी ओर फ्रांस टीम तीसरी बार खिताबी मुकाबले में जगह बनाने में कामयाब रही है। 
    फ्रांस टीम एक बार की चैंपियन भी है। उसने 1998 में ब्राजील को हराकर खिताब अपने नाम किया था, जबकि इसी विश्व कप में क्रोएशिया पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची थी। जहां उसे फ्रांस से हार का सामना करना पड़ा था। दूसरे सेमीफाइनल में हारने वाली इंग्लैंड की टीम अब तीसरे स्थान के प्लेऑफ में 14 जुलाई को सेंट पीटर्सबर्ग में बेल्जियम से भिड़ेगी। 
    क्रोएशिया ने बुधवार रात इंग्लैंड को कड़े मुकाबले में 2-1 से हराया। मारियो मानजुकिच के अतिरिक्त समय में दागे गोल की बदौलत क्रोएशिया ने शुरुआत में पिछडऩे के बाद जोरदार वापसी करते हुए पहली बार फाइनल में जगह बनाने में सफल रहा। निर्धारित समय के बाद मैच 1-1 से बराबर था, जिसके बाद मानजुकिच ने अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ में 119वें मिनट में गोल दाग दिया। बता दें कि किरेन ट्रिपियर ने 5वें मिनट में ही दमदार फ्री किक पर गोल लगाकर इंग्लैंड को 1-0 से आगे कर दिया था, लेकिन इवान पेरिसिच (68वें मिनट) ने क्रोएशिया को दूसरे हाफ में बराबरी दिला दी थी। 
    विश्व कप सेमीफाइनल में 18 मौकों में यह सिर्फ दूसरी बार है जब मध्यांतर तक बढ़त बनाने वाली टीम को हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 1990 में इटली की टीम अर्जेंटीना के खिलाफ बढ़त बनाने के बावजूद पेनल्टी शूटआउट में हार गई थी। इसके साथ ही इंग्लैंड की टीम का 5 से अधिक दशक बाद दूसरी बार फाइनल में जगह बनाने का सपना भी टूट गया। इंग्लैंड ने पहली और एकमात्र बार 1966 में फाइनल में जगह बनाई थी और वह चैंपियन बनी थी। 
    टूर्नमेंट का पहला सेमीफाइनल फ्रांस और बेल्जियम के बीच हुआ था। जहां फ्रांस ने डिफेंडर सैमुअल उमटिटी के गोल की बदौलत बेल्जियम को 1-0 से हराने में सफल रहा था। फ्रांस ने 1998 में अपनी ही मेजबानी में हुए विश्व कप फाइनल में ब्राजील को हराकर खिताब जीता था, लेकिन 2006 के फाइनल में इटली से हार गई थी। यह तीसरा मौका है, जब वह फाइनल में पहुंची है।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • इंग्लैंड को 2-1 से हराकर क्रोएशिया पहली बार फीफा विश्व कप फाइनल में पहुंचा है। मैच काफी रोमांचक रहा। मैच में सबका दिल जीता क्रोएशिया राष्ट्रपति कोलिंडा ग्रेबर कित्रोविक ने। फाइनल में पहुंचते ही कोलिंडा ने जमकर मस्ती की। उन्होंने खिलाडिय़ों के साथ ड्रेसिंग रूम में जश्न मनाया। विश्व कप 2018 में कोलिंडा ग्रेबर कित्रोविक काफी चर्चा में रही हैं। फीफा वल्र्ड कप देखने के लिए जगारेब से सोची तक उन्होंने प्लेन की इकॉनोमी क्लास से आईं। वो चार्टर प्लेन से भी आ सकती थीं। लेकिन उन्होंने इकॉनोमी टिकट लिया और आम लोगों के बीच सफर किया। 
    ट्रिप के दौरान उन्होंने लोगों के साथ सेल्फी भी क्लिक कराई और सभी से बात की। फाइनल में पहुंचने के बाद कोलिंडा ने जमकर मस्ती की। कोलिंडा क्रोएशिया की पहली महिला प्रेसीडेंट हैं। वो वीवीआईपी होने के बाद भी आम जिंदगी जीती हैं। उनको फीफा वल्र्ड कप में भी कुछ इसी अंदाज में देखा गया। 
    उनका एक वीडियो काफी वायरल हुआ था जिसमें वो खिलाडिय़ों के साथ जमकर डांस कर रही हैं और जीत का शानदार जश्न मना रही हैं। क्वार्टर फाइनल में क्रोएशिया का रूस से मुकाबला था। उन्होंने टीम की जर्सी पहनकर वीवीआईपी बॉक्स की जगह आम दर्शकों में बैठकर मैच देखा और आम समर्थकों का खिलाडिय़ों का हौसला बढ़ाती नजर आईं। जीत के बाद उन्होंने ड्रेसिंग रूम में जमकर मस्ती की थी। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • इस मुकाबले का पहला हाफ इंग्लैंड के नाम रहा। पहले हाफ के पांचवें मिनट में ही इंग्लैंड ने ट्रिपियर के शानदार गोल से 1-0 की बढ़त दिलाई। दरअसल, लुका मॉड्रिक ने फाउल कराया, जिसकी वजह से इंग्लैंड को फ्री किक मिली। मिडफील्डर ट्रिपियर ने बेहतरीन किक जमाकर गेंद को सीधे जाली में भेद दी।
    वहीं, दूसरे हाफ में क्रोएशिया ने अपने खेल में थोड़ी आक्रामकता दिखाई और 68वें मिनट में इवान पेरिसिच ने शानदार गोलकर क्रोएशियाई टीम के स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया। इसके साथ ही दूसरे हाफ का खेल 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ लेकिन नतीजा के लिए यह मुकाबला एक्सट्रा टाइम में चला गया।
    इसके बाद एक्सट्रा टाइम के 19वें मिनट में यानी 109वें मिनट में क्रोएशिया के स्टार खिलाड़ी मारियो मैंडजुकिच (109वें मिनट) ने शानदार गोल दागकर क्रोएशिया को 2-1 से बढ़त दिलाई। इसके बाद क्रोएशियाई टीम ने अपना डिफेंस मजबूत रखा और बाकी बचे समय को वैसे ही पास कराया और यह मुकाबला 2-1 से अपने नाम कर लिया। 
    क्रोएशिया ने साल 1998 में सेमीफाइनल तक पहुंची थी लेकिन एक बार की विश्व विजेता फ्रांस के हाथों उसे 1-2 की शिकस्त का सामना करना पड़ा था। वहीं, इंग्लैंड की टीम इससे पहले आखिरी बार 1990 में फीफा विश्व कप सेमीफाइनल में पहुंची थी लेकिन वहां जर्मनी की टीम के खिलाफ उसे करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। मालूम हो कि एक बार की विश्व चैंपियन इंग्लैंड 1966 में वेस्ट जर्मनी को 4-2 को हराकर खिताबी जीत हासिल की थी। (अमर उजाला)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 12 जुलाई। चालीस लाख की आबादी वाले क्रोएशिया ने बुधवार को फीफा विश्व कप 2018 के दूसरे सेमीफाइनल में खिताब की प्रबल दावेदार इंग्लैंड को 2-1 से हराकर पहली बार फाइनल में प्रवेश किया। अब रविवार को क्रोएशिया का फाइनल में मुकाबला फ्रांस से होगा, जिसने पहले सेमीफाइनल में बेल्जियम को 1-0 से मात दी थी। क्रोएशिया की जीत पर फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
    क्रोएशियाई दर्शकों ने जागरेब के प्रमुख चौराहे पर सेमीफाइनल मैच का आनंद उठाया और जीत का जोरदार जश्न मनाया। इस दौरान फैंस ने आतिशबाजी की और देश का झंडा फहराते हुए जीत का जश्न मनाया। क्रोएशिया के एक फैन ने कहा कि किसी को हमारी जीत की उम्मीद नहीं थी। इंग्लिश मीडिया ने पूरे सप्ताह हमारा मजाक बनाया और कहा कि हमारे पास जीत का मौका नहीं है। मगर हमारे खिलाडिय़ों ने क्वालिटी प्रदर्शन करके उनके मुंह पर ताले लगा दिए।
    क्रोएशिया की राष्ट्रपति कोलिंडा गर्बर कित्रोविच ने ब्रिटीश प्रधानमंत्री थेरेसा मई को क्रोएशिया की फुटबॉल जर्सी भेंट की थी। बहरहाल, क्रोएशिया के एक दर्शक ने कहा कि हम बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं। पिछली बार हमने युद्ध और आजादी के बाद 1998 में सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। हमने दर्शाया कि जीत सकते हैं। यह छोटे देश के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं।
    एक फैन ने कहा कि देशवासियों को अपने गम मिटाने का एक मौका मिला है। क्रोएशिया में नौकरियों की कमी है, पैसों की कमी है। राजनेता अपनी जेब भरने में लगे हैं। मगर आज जनता खुश है। इस जीत ने उन्हें कुछ समय के लिए सारी दिक्कतों से बाहर निकाल दिया है। क्रोएशिया के खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय हीरोज की तरह देखा जा रहा है।
    क्रोएशिया के मारियो मैंडजुकिच ने एक्स्ट्रा टाइम में गोल दागकर टीम को पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचाया। उन्होंने 109वें मिनट में गोल किया। इससे पहले फुलटाइम तक क्रोएशिया और इंग्लैंड का स्कोर 1-1 से बराबर था। इंग्लैंड के ट्रिपियर ने मैच का पहला गोल दागा। फिर 68वें मिनट में क्रोएशियाई स्ट्राइकर इवान पेरिसिच ने गोल दागकर स्कोर बराबर किया। (अमर उजाला)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 11 जुलाई। टेनिस स्टार सानिया मिर्जा आज कल अपनी तस्वीरों को लेकर काफी छाई हुई हैं। दरअसल, सानिया गर्भ से हैं और आज कल वो खेल से दूर खुद का ध्यान रख रही हैं। सानिया की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिसमें वो रेड कलर के आउटफिट में हैं और अपना हाथ बेबी बंप पर रखा है। सानिया के चेहरे पर प्रेग्नेंसी का ग्लो साफ दिख रहा है।
    वैसे प्रेग्नेंसी में भी सानिया खुद को जिस तरह कैरी कर रही हैं, वो फैन्स को काफी पसंद आ रहा है। सानिया टेनिस से दूर हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रख रही हैं। इंटरनेशनल योगा डे पर उन्होंने एक पोस्ट शेयर की थी और ऐसे योगा के बारे में बताया था, जो प्रेग्नेंसी में अच्छे होते हैं। 
    सानिया ने 2010 में पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की थी। इसके बाद से उन्हें इस बात को लेकर कई बार आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। हालांकि सानिया इन आलोचनाओं को नजरअंदाज करते हुए भारत के लिए टेनिस में लगातार शानदार प्रदर्शन करती रही हैं।
    सानिया ने सोशल मीडिया के जरिए ही अपनी प्रेग्नेंसी की खबर फैन्स के साथ शेयर की थी। सानिया के पति शोएब ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि 2019 वल्र्ड कप के बाद वो वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।  (लाइव हिन्दुस्तान)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • फीफा विश्व कप 2018 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में फ्रांस ने बेल्जियम को 1-0 से हरा फाइनल में जगह बना ली है. इसके साथ ही बेल्जियम का पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने का सपना भी टूट गया. फ्रांस तीसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंचा है. वह 1998 में फीफा विश्व कप की मेजबानी करते हुए ख़िताब भी जीत चुका है. फाइनल में फ्रांस का मुकाबला बुधवार को खेले जाने वाले क्रोएशिया और इंग्लैंड के दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा.

    सेंट पीट्सबर्ग में मंगलवार को खेले गए मुकाबले में दोनों टीमों ने तेज गति का खेल दिखाया लेकिन आखिरकार बाजी फ्रांस के हाथ लगी. क्वार्टर फाइनल में ब्राजील को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंची बेल्जियम शुरुआत में काफी आक्रामक होकर खेली. वहीं सतर्कता के साथ खेल रहे फ्रांस ने धीरे-धीरे अपने खेल की गति बढ़ाई और कई बेहतरीन हमले किए. लेकिन पहले हाफ में दोनों टीमों में कोई गोल नहीं कर सकीं.

    दूसरे हाफ की शुरुआत में भी आक्रामक खेल देखने को मिला. दोनों टीमों के खिलाड़ी अपनी तय पोजीशन में खेलने के साथ ही गोल की तलाश में आगे निकल रहे थे. हालांकि बेल्जियम के स्ट्राइकर लुकाकू मैच में वैसा जादूू नहीं बिखेर पाए जिसके लिए वे जाने जाते हैं. बेल्जियम के लिए एडन हेजार्ड ने जरूर अच्छे मूव बनाए लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके.

    दूसरी तरफ फ्रांस के बेहद तेज गति के खिलाड़ी एमबापे ने बेल्जियम की ओर से की गई लगातार मार्किंग के बावज़ूद कई मौकों पर अपनी तेज गति का फायदा उठाया. खेल के 51 वें मिनट में फ्रांस को कॉर्नर मिला और ग्रीजमैन के बेहतरीन किक पर उमतीती ने हैडर से गोल दाग फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी. उमतीती खुद को मार्क कर रहे लंबे कद के खिलाड़ी फेलानी को छकाकर बॉक्स में उनसे आगे निकल आए और गेंद को नेेट में उलझा दिया. मैच में 1-0 से आगे होने के बाद भी फ्रांस ने हमल जारी रखे.

    बेल्जियम को बराबरी का एक मौका तब मिला जब फेलानी ने गोल की तरफ एक हेडर लगाया लेकिन गेंद गोल के करीब से निकल गई. मैच के 81 वे मिनट में विटसेल ने एक जोरदार शॉट लगाकर फिर बेल्जियम के लिए मौका बनाया लेकिन फ्रांस के गोलकीपर लोरिस ने बेहतरीन बचाव किया. खेल के चौथे क्वार्टर में बेल्जियम के खिलाड़ियों के कंधे झुकने लगे थे. इसका फायदा उठा बराबरी तलाश कर रही बेल्जियम के खिलाफ फ्रांस ने कई बेहतरीन मौके बनाए. हालांकि बेल्जियम के गोलकीपर कोर्टोइस ने कई शानदार बचाव कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा.

    कोर्टोइस कई बार फ्रेंच हमलों के सामने दीवार बने, नहीं तो बेल्जियम की हार 1-0 से ज्यादा बड़ी भी हो सकती थी. फ्रांस के गोलकीपर हूयगो लोरिस ने भी बेहतरीन खेल दिखाकर अपनी टीम को गोल नहीं खाने दिया. बेल्जियम की टीम ने इस विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया है. ब्राजील को हराने के बाद उसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. लेकिन फ्रांस के साथ इतिहास था. विश्व कप के इतिहास में फ्रांस और बेल्जियम के बीच यह तीसरी भिड़ंत थी और तीनों ही बार जीत फ्रांस के हाथ लगी है. (सत्याग्रह)

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