विशेष रिपोर्ट

Date : 02-Apr-2020

राज्य में कारखाने शुरू करने सरकारी मंजूरी तो है, लेकिन मजदूर कहीं नहीं...

शशांक तिवारी

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 2 अप्रैल। लॉकडाउन के बीच सरकार ने स्टील-सीमेंट उद्योगों के साथ-साथ और राईस मिलों को शुरू करने की अनुमति दे दी है। धमतरी और कई जिलों में राईस मिल शुरू भी हो गई  हैं, मगर सीमेंट और कई स्टील उद्योग फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हैं।

केन्द्र सरकार ने स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम और कॉपर उद्योगों को शुरू करने की अनुमति दी है और इसके लिए सभी राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही साथ राईस मिलों को भी शुरू करने की अनुमति दी है। इन सभी को अति आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में लाया गया है। बताया गया कि राज्य सरकार ने इन उद्योगों को चालू करवाने के लिए पहल भी की है। मगर कई उद्योग इसके लिए तैयार नहीं है। इसकी वजह यह है कि  कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते श्रमिक लॉकडाउन के बीच आने की स्थिति में नहीं हैं।

स्पंज आयरन उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल नचरानी ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि लॉक डाउन खत्म होने तक उद्योग बंद रहेंगे।

दूसरी तरफ, सीमेंट उद्योगों को भी चालू कराने के लिए सरकार का काफी दबाव है। न सिर्फ प्लांट में उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी गई, बल्कि खदानों को भी चालू करने की भी छूट दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सीमेेंट उद्योगों को भरोसा दिलाया है कि  कच्चे माल की आपूर्ति के अलावा परिवहन में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक सीमेंट प्लांट हैं और देश में सबसे ज्यादा सीमेंट का उत्पादन छत्तीसगढ़ में ही होता है। मगर कोई भी प्लांट फिलहाल उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार नहीं है। वजह यह है कि कोरोना संक्रमण फैला, तो फिर आगे प्लांट चालू करने में दिक्कत आएगी। वर्तमान में प्लांट शुरू करना जोखिम भरा माना जा रहा है। साथ ही वर्तमान में अधिकारी-कर्मचारी और मजदूर अपने घरों में हैं। वे भी मौजूदा हालत में काम पर आने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि 15 फरवरी की स्थिति में खनिज उत्खनन में लगे सभी कुशल, अकुशल, श्रमिक और कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन, अवकाश एवं अन्य जरूरी सुविधाएं खनिज प्रबंधकों द्वारा दिया जाएगा। ताकि किसी प्रकार से मजदूर लोकडाउन ख़त्म होने के बाद भी काम की तलाश में कहीं ना जाएँ.  

दूसरी तरफ, लॉक डाउन के बीच प्रदेश के एक-दो जिलों में राईस मिलरों ने कस्टम मिलिंग का काम शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और राइस मिल एसोसिएशन के संरक्षक रामगोपाल अग्रवाल ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि सरकार की अनुमति के बाद इक्का-दुक्का ही मिले चालू हो पाई है। मिल मजदूर नहीं आ रहे हैं। मजदूर नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो सकता है। इन उद्योगों पर भी जल्द से जल्द मिल चालू करने के लिए दबाव था। प्रदेश में इस बार 83 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ है। मिलिंग जल्द करने के लिए मिलरों पर दबाव है। मगर अभी भी कोरोना के भय से मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं। इस वजह से ज्यादातर मिले बंद हैं। प्रदेश में करीब 18 सौ राइस मिल हैं। सबसे ज्यादा मिल रायपुर और धमतरी जिले में हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में ज्यादातर मिलें चालू हो जाएंगी।

कोरोना हो जाए, तो दिया जाए अवकाश!

राज्य सरकार ने केन्द्र के दिशा निर्देशों के अनुरूप सामाजिक-दूरी को अपनाते हुए न्यूनतम श्रमिकों और मजदूरों के साथ खनिज गतिविधियां सुचारू रूप से चलाने की छूट दी है। यह भी कहा है कि यदि किसी खनिज कर्मचारी और श्रमिक को कोरोना वायरस से प्रभावित हो जाता है, तो उन्हें सवैतनिक अवकाश प्रबंधकों द्वारा प्रदान किया जाएगा।  सरकार ने यह भी निर्देशित किया है कि लॉकडाउन का बहाना लेकर किसी कर्मचारियों और श्रमिकों की सेवा समाप्त, छटनी, सर्विस ब्रेक और वेतन में कटौती जैसा कार्य खनिज प्रबंधकों के जरिए नहीं किया जा सकता है।


Date : 27-Mar-2020

कोरोना प्रकोप, छोटे उद्योग 
बंद पर ब्लॉस्ट फर्नेस चालू!

सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल ने उद्योग सचिव को भेजा नोटिस
शशांक तिवारी
रायपुर, 27 मार्च (छत्तीसगढ़ संवाददाता)।
सरकार ने कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते उद्योगों को बंद करने के आदेश तो दिए हैं, लेकिन ब्लॉस्ट फर्नेस में छूट दे दी गई है। जिसके कारण रायगढ़ के जिंदल सहित कई उद्योगों में यथावत उत्पादन हो रहा है। सरकार के फैसले पर कुछ मजदूर संगठनों ने आपत्ति उठाई है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल ने उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुवा को नोटिस भेजा है और उन्हें आदेश में ब्लॉस्ट फर्नेस की छूट को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है, ऐसा नहीं करने पर न्यायालय में वाद दायर करने की चेतावनी दी है। 

रायगढ़ के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल ने फेसबुक पर लिखा है कि सरकारी आदेश से उद्योग बंद है। रामबाई की चक्की भी बंद है, लेकिन जिंदल की ब्लॉस्ट फर्नेस चालू है। रायगढ़ का जिंदल स्टील प्रदेश का निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा उद्योग है। सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते उद्योगों को बंद करने के आदेश दिए हैं। मगर इस आदेश में ब्लॉस्ट फर्नेस को छूट दी गई है। इस पर कुछ मजदूर संगठनों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल ने भी आपत्ति की है। 

श्री अग्रवाल ने इस सिलसिले में प्रमुख सचिव मनोज पिंगुवा को फेसबुक के जरिए नोटिस भेजा है। उन्होंने नोटिस में उल्लेखित किया है कि कोरोना महामारी से बचने और उसके फैलने को रोकने की नीयत से प्रदेश के कुछ अत्यावश्यक उद्योगों को छोड़कर बाकी सभी उद्योगों को बंद करने का आदेश पारित किया गया है। इसमें ब्लॉस्ट फर्नेस को छूट दी गई है। 

श्री अग्रवाल ने कहा कि ब्लॉस्ट फर्नेस में केवल लोहे का उत्पादन होता है, जो कि अत्यावश्यक यथा खाने-पीने का सामान, दवाईयां और इससे संबंधित वस्तुएं इत्यादि की श्रेणी में नहीं आता है। ब्लॉस्ट फर्नेस और इससे जुड़ी कई अन्य इकाइयों में हजारों मजदूरों की जरूरत होती है। देश के प्रधानमंत्री तक ने लोगों को एक जगह एकत्र होने पर रोक लगा दी है। पूरे देश में कम्पलीट शटडाउन कर दिया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि आपने और सरकार ने बीना सोचे समझे, आम जनता और मजदूरों की चिंता किए बिना बगैर किसी निहित स्वार्थ से प्रेरित होकर आदेश पारित किया है। चूंकि घर से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है। इसलिए यह पत्र रजिस्टर्ड पोस्ट से पे्रषित करने में असमर्थ हूं। यह नोटिस सोशल मीडिया के मार्फत प्रेषित की जा रही है। 

श्री अग्रवाल ने यह भी कहा कि उपरोक्त आदेश में ब्लॉस्ट फर्नेस में दी गई छूट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर सूचित करें अन्यथा आपके खिलाफ सक्षम न्यायालय में वाद दायर किया जा सकेगा। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी आपकी होगी और वाद में खर्च की भरपाई भी की जाएगी। 


Date : 24-Mar-2020

दीगर राज्यों से ट्रकों-किराए की गाडिय़ों में लौटते मजदूर

पिथौरा में आए 100 से अधिक को सेल्फ आइसोलेशन के निर्देश

रजिंदर खनूजा

पिथौरा, 24 मार्च (छत्तीसगढ़ संवाददाता)। कोरोना वायरस की दहशत से नगर पूरी तरह सुनसान एवं शांत है। वहीं क्षेत्र से अन्य प्रांतों में काम के लिए गए मजदूरों की दबे पांव वापसी ने क्षेत्रवासियों की दहशत और बढ़ा दी है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में अब तक पहुंच चुके 100 से अधिक मजदूरों के बाद आज भी नागपुर से पिथौरा 8  मजदूरों का एक दल पहुंचा। नगर की स्थिति पर लगातार नजर बनाए कुछ पत्रकारों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। वहीं छत्तीसगढ़ संवाददाता को किराए की ऑटो में नागपुर से सरायपाली जाते मजदूर दिखे। ऐसे ही अन्य कई वाहनों में भी मजदूर दीगर राज्यों से आते दिखे।

दिन ब दिन कोरोना पॉजिटिव की बढ़ती संख्या ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लॉक डाउन की स्थिति में लोग दिन भर देश भर में कोरोना वायरस प्रभावित लोगों की तेजी से बढ़ती संख्या देख कर बेचैन होने लगे हंै। अधिकांश लोग अपने घरों में कैद है वहीं पुलिस पेट्रोलिंग वाहन भी घूम-घूम कर बगैर काम घूम रहे लोगों को घर भेज रही है, एवं सार्वजनिक स्थल एवं दुकानों में ग्राहकों की सीमित संख्या रखने की हिदायत देती दिख रही है।

लक्षण नहीं, होम आईसोलेट किया गया

दूसरी ओर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अचानक सर्दी खांसी बुखार के मरीजों की बाढ़ सी आ गयी है। बीएमओ डॉ. तारा अग्रवाल ने बताया कि ओपीडी में भीड़ ना होने पाए इसके लिए कमरे से बाहर ही ओपीडी संचालित की जा रही है। मरीजों को उनकी पारी आते तक दूर दूर खड़े रहने की हिदायत दी गई है।

आज 8 मजदूर नागपुर से आये

आज सुबह से ही फोरलेन बाईपास के पास एक ट्रक से 8  मजदूरों का एक दल उतरा। ये मजदूर अपने ग्राम की ओर बढ़ते उसके पहले ही एक पत्रकार ने घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना के बाद स्थानीय एस डी ओ पी पुपलेश पात्रे ने बाइपास अपनी मोबाइल वेन भेज पर सभी मजदूरों से पूछताछ कर जांच हेतू स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र भेज गया।

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. तारा अग्रवाल ने बताया कि इन सभी मजदूरों को लक्षण नहीं मिलने पर उन्हें उन्हीं के घर में सेल्फ आइसोलेट होने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. अग्रवाल के अनुसार अब तक पिथौरा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश,जम्मू कश्मीर एवं महाराष्ट्र से कोई 100 से अधिक मजदूर आ चुके हैं जिन्हें सेल्फ आइसोलेट करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी के रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं। इसके अलावा ग्राम सरपंच,सचिव,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित ग्राम प्रमुखों को सेल्फ आइसोलेट किये गए लोगों की तबियत पता लगाते रहने निर्देशित किया गया है। सर्दी खांसी एवं बुखार की स्थिति में इसकी जानकारी तत्कार अस्पताल प्रशासन को देने की बात कही गईहै।

सख्ती लगातार जारी रहेगी-एसडीओपी

स्थानीय पुलिस के एसडीओपी पुपलेश पात्रे ने बताया है कि धारा 144 एवं शासन जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन सख्ती से करवाया जाएगा। लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि खुद बचो बाकी लोगों को भी बचाओ।

ऑटो रिक्शा में नागपुर से सरायपाली

देश भर में यात्री वाहन एवं रेल बस बन्द होने के कारण अन्य प्रांतों में मजदूरी करने गए मजदूर बुरी तरह फंस गए है। इन मजदूरों को ईंट भट्ठा मालिकों ने तत्काल अपने घरों को जाने निर्देश देते हुए उनसे  भट्ठा खाली करवा दिया गया। खासकर उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र में तेजी से फैले कोरोना वायरस से भयभीत बेघर हो चुके मजदूर अब अपनी पूरी मेहनत के पैसों के अलावा भट्ठा मालिक से कर्ज लेकर 300 से 6 00 किलोमीटर दूर अपने घर पहुंचने के लिए ऑटो रिक्शा भाड़े में कर वापस आ रहे हैं। मंगलवार की सुबह नगर के बस स्टैंड में ऐसा ही एक मजदूर परिवार दिखा जिसके 6  सदस्य नागपुर से कोई 400 किलोमीटर दूर सराईपाली जाने के लिए निकले हंै। एक मजदूर ने कहा कि सरकार को अभी भी रास्ते मे फंसे मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

 


Date : 07-Mar-2020

पुरूषों के कार्य क्षेत्र में कदम रख रहीं महिलाएं
चंद्रकांत पारगी
बैकुंठपुर, 7 मार्च
। कोरिया जिले में बिना सरकारी मदद के महिलाएं पुरूषों के क्षेत्र में मजबूती से कदम रख रही हंै। वे ना सिर्फ अपना घर चला रही हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई के साथ समाज को नई दिशा देने का काम कर रही हैं। 'छत्तीसगढ़' ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसी कुछ महिलाओं के कार्यों को देखा और उनसे बातचीत की, जिसमें जीवन के तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद भी ये महिलाएं आगे बढ़कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।

राजमिस्त्री ऐसी की पुरूष देखते रह जाएं
कोरिया जिलामुख्यालय बैकुंठपुर से लगभग 35 किमी दूर ग्राम सैदा की कौशल्या राजमिस्त्री हैं, निजी मकान निर्माण में लगी कौशल्या का काम करने का अंदाज पुरूषों से एकदम जुदा है। मकान निर्माण में उसके द्वारा किया गया प्लास्तर देख निर्माण करा रहे मालिक भी हैरान हैं। ईंट जुड़ाई के काम में महारत है। फटाफट दीवार खड़ी करना और एक इंच भी उपर नीचे नहीं। एक ओर राजमिस्त्री के प्रशिक्षण में जिलाप्रशासन ने बीते 4 साल में 5 करोड़ रू विभिन्न संस्थाओं में खर्च कर दिए।वहीं कौशल्या ने इसका कहीं कोई प्रशिक्षण नहीं लिया। बस देख-देख कर पूरा काम सीख ली और फिर जब घर पर विपत्ति आई तो हाथ में करनी लिए वो काम करने निकल पड़ी। बीते 7 साल से वो राजमिस्त्री का काम कर रहीं हैं। रोजाना 35 किमी दूर सैदा से बैकुंठपुर आना और फिर शाम 6  बजे यहां से अपने घर जाना। 
इस काम के संबंध में कौशल्या बताती हैं कि 7 साल पहले उनके पति लकवाग्रस्त हो गए, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके उपर आ गई। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे, जिसके बाद बच्चों की पढ़ाई और उनके पालन पोषण को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई। खेती इनती नहीं है कि घर का गुजारा हो सकता था, जिसके बाद उन्होंने राजमिस्त्री के काम में हाथ आजमाया। पहले कई परेशानियां आई, कोई उन्हें काम पर रखना पसंद नहीं करता था। पहले तो साफ इंकार कर दिया करता था, परन्तु जब वो उनका काम देखता तो फिर उन्हीं से काम करवाता। अब वो परफेक्ट राजमिस्त्री बन चुकी हैं, प्रतिदिन उन्हें 4 सौ रूपए के हिसाब से मजदूरी मिलती है। 

बैकुंठपुर के महलपारा के एक निजी घर के निर्माण में लगी कौशल्या का काम देख काम करा रहे भूपेन्द्र सिंह हैरान हैंै। वे बताते हैं कि उनके घर के निर्माण में कौशल्या ने ही पूरा काम किया, इसे कोई काम बताना नहीं पड़ता है और काम करने में पुरूषों के तमाम नाटक से दूर है। इसका काम, ना कोई गुटखा खाने जाना और ना ही मोबाइल पर गाना सुनते काम करना, काम पर सबसे पहले समय पर आती है और पूरे समय काम करती है।

पेंटिग ने बदली जीवन की तस्वीर
बचपन से पेंटिंग का शौक ससुराल में भी उसका साथ नहीं छोड़ा। उसके इस काम को देख सास-ससुर के साथ देवर ने भी पूरा प्रोत्साहन दिया। उनके काम को देख मितानिनों ने बैकुंठपुर की 15 ग्राम पंचायत में स्वास्थ्य दीवाल लिखने का काम सौंप दिया। फिर क्या सुबह से अलग-अलग ग्राम पंचायतों में जाना और दिनभर में एक दीवार का लेखन कर शाम को घर लौट जाना। दीवार हो या कागज बैकुंठपुर तहसील के सरभोका के मुक्यिारपारा की पूनम राजवाड़े का हाथ एकदम सधा हुआ चलता है। इसके अलावा घर पर ही सिलाई का काम भी करती है, गांव भर की महिलाओं के कपड़े सिलकर अपना घर चला रही हैं। 

बिना किसी सरकारी मदद के इस महिला ने अपना एक मुकाम हासिल किया है। पुरूषों के क्षेत्र में अपनी दखल बनाने वाली पूनम राजवाड़े बताती हैं कि मुझे बचपन से पेंटिंग का शौक रहा। शादी के बाद भी घर में सास ससुर का पूरा साथ मिला। महिलाओं की बैठक में जाती तो वहां कुछ ना कुछ लिखने को मिल जाता। जिसे देख मितानिनों ने स्वास्थ्य दीवाल लिखने के लिए मुझे कहा, एक दीवाल लिखने के बाद मुझे 15 ग्राम पंचायतों की दीवाल लिखने का काम मिला। मैं इस काम से बेहद खुश हूं, मेरे काम को देखकर कई लोग पेंटिंग करवाने के लिए आते हैं। इससे मुझे कुछ मेहनताना मिलने लगा है इससे अपने घर की जरूरतों को पूरा कर रही हूं। उनकी सास का कहना है कि ये जब हमारे घर शादी के बाद आई तभी से इसके पेंटिग का शौक देखकर हम लोगों ने इसका उत्साह बढ़ाया। ये पेटिंग करने जाती है तो हम लोगों को अच्छा लगता है, इससे कुछ आमदनी भी होने लगी है। वहीं देवर श्री राजवाड़े का कहना है गांव में रहकर इतना बढिय़ा पेेंटिंग करती देखकर अच्छा लगता है, इसे देखकर अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।

पार्किंग काम महिलाओं के हाथ
यदि आप जिला अस्पताल में वाहन लेकर आते हंै तो आपकी सबसे पहले मुलाकात पार्किंग संभाल रही महिलाओं से होगी। एक महिला मुख्य गेट पर तो दूसरी पार्किंग स्थल पर, तीसरी जिला अस्पतल के पीछे की ओर और चौथी महिला बड़े वाहनों को आने जाने की देखरेख में नजर आएगी।

जिलामुख्यालय बैकुंठपुर से 15 किमी दूर फूलपुर की 4 आदिवासी महिलाओं ने जिला अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था संभाल रखी है। बीते एक साल से इस काम पर लगी चारों महिलाएं गाड़ी पार्क करने वाले लोगों को समझाती है और उनसे 12 घंटे के लिए रसीद काट कर उनकी गाड़ी की सुरक्षा भी करती हैं। जिससे पार्किंग को लेकर आए दिन होने वाले विवाद का खात्मा हो गया है। महिलाओं द्वारा पैसे मांगने को वाहन चालक विरोध नहीं कर पाते हैं।

पार्किंग के काम में लगी राधा बताती है कि जब यह कार्य शुरू किए तो घर से लेकर हर कहीं हम लोगों का विरोध हुआ, परन्तु हम लोगों ने हार नहीं मानी, लोग पार्किग में पैसा नहीं देते थे, उन्हें काफी समझाना पड़ा, पर अब सबकुछ ठीक होता जा रहा है। घर में पति के साथ कई कई दिन तक झगडा होता था, वो ऐसे काम के लिए तैयार नहीं थे, दूसरी ओर पति भी बेराजगार और हम भी। घर के खर्च को चलाने की चुनौती थी। वहीं संगीता का कहना है कि उसे इस काम में उसकी सहेली राधा लेकर आई, पार्किग का काम संभालने में पहले तो कई परेशानी हुई, लोगों को बहुत समझाना पड़ता है, कई लोग ऐसे आते हंै जिनके पास पैसा होता भी नहीं है, कई बार बड़े लोगों का दबाव भी आता है। पर अब इस काम को अच्छे ढंग से हम लोग कर रहे हैं। वहीं सोनकुंवर बताती है कि 45 सौ रूपए महिना मिलता है। जो लोग जिला अस्पताल के बाहर वाहन लगाते हैं जिससे यातायात प्रभावित होता है, उन्हें अंदर गाड़ी लगाने के लिए कहा जाता है, तब जाकर पार्किंग व्यवस्थित हो पाई है।


Date : 03-Mar-2020

खडग़वां पीएचसी में सीमित संसाधन, फिर भी नंबर वन
चंद्रकांत पारगीर
बैकुंठपुर, 3 मार्च (छत्तीसगढ़)।
कोरिया जिले के जनपद मुख्यालय खडग़वां में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीमित संसाधनों के बीच जिले में नम्बर वन बना है। यहां तक कि जिला मुख्यालय में स्थित जिले के सबसे बड़े जिला चिकित्सालय को भी व्यवस्था व स्वच्छता के मामले में पीछे छोड़ दिया है। यही कारण कि खडग़वां जनपद मुख्यालय में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को राज्य भर में पहला कायाकल्प का पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा और भी कई पुरस्कार हासिल किये है। 

खडगवां को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एक निजी अस्पताल की तरह दिखता है। सफाई के मामले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आगे है। 

खडग़वां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए शासन स्तर पर 10 बेड की स्वीकृति ही दी गई है लेकिन बीएमओ डॉ. कुजूर की पहल से यहां पर 6 0 बेड लगाये गये हैं। आंकड़ों के अनुसार यहां प्रतिवर्ष लगभग 5000 आईपीडी देखी जाती है। 
दो चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र
जनपद मुख्यालय होने के बावजूद खडग़वां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही संचालित हो रहा है। यहां दो चिकित्सक ही पदस्थ किये गये हैं। कोरिया जिले का यह एक मात्र जनपद मुख्यालय है जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहा है जबकि जिले के शेष जनपद मुख्यालयों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। जबकि जिले के पटना ग्राम पंचायत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। जनपद मुख्यालय होने के कारण खडग़वां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सभी क्षेत्रों के मरीज बेहतर उपचार हेतु आते है लेकिन सीमित व्यवस्था के बावजूद बीएमओ डॉ. कुजूर के प्रयासों से अधिक से अधिक सुविधा देने की कोशिश की गई है। 

बिना सर्जन के प्रतिदिन प्रसव
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी सर्जन नहीं है इसके बाजवूद यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन पांच से छ: की संख्या में प्रसव सुरक्षित तरीके से करा लिया जा रहा है। वर्ष 2019 में 6 58  प्रसव इस अस्पताल में हुए हैं। ज्ञात हो कि बीएमओ डॉ. कुजूर को निश्चेतना का प्रशिक्षण प्राप्त है यदि यहां एक सर्जन की नियुक्ति कर दी जाती है तो सिजेरियन की सुविधा मिल सकेगी। सर्जन नहीं होने के कारण ही कई बार ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल भेजना मजबूरी बन जाती है। 

प्रतिदिन 100 से अधिक ओपीडी और 50 से अधिक जांच
कोरिया जिले का खडग़वां स्थित एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य ऐसा है जहां प्रतिदिन 100 से 150 की संख्या में ओपीडी में मरीज पहुंचते हंै। यह अपने आप में बड़ी बात है कि एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दिन में इतने मरीज पहुंचते हैं जिनमें से 70 से 8 0 की संख्या में पैथोलॉजी जांच की जाती है। 

फूलों व सब्जियों के साथ हर्बल गार्डन भी
खडग़वां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीमित क्षेत्र में संचालित है लेकिन अस्पताल परिसर के सभी क्षेत्रों की खाली भूमि का यहां बखूबी उपयोग किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जिस ओर भी खाली भूमि पड़ी है वहां पर विभिन्न तरह के फूलों की क्यारियां लगाई गई है। यहां पर खाली भूमि पर सब्जियां भी सीमित मात्रा में लगायी गयी हैं। इसके अलावा छोटा हर्बल गार्डन भी है जो जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के साथ जिला चिकित्सालय परिसर में भी देखने को नहीं मिलेगा। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कई तरह के फूलों के अलावा एलोवेरा, तुलसी, स्टीविया, सहित अन्य तरह के औषधीय पौधे लगाये गये है। जिससे कि पूरा परिसर महक उठता है और मरीजों को बाहर का सुन्दर नजारा देखकर नहीं लगता है कि वे किसी अस्पताल में हैं।

कायाकल्प सहित आधा दर्जन से अधिक पुरस्कार
खडग़वां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी कई खूबियों के कारण ही स्वास्थ्य विभाग को प्रदान किये जाने वाले महत्वपूर्ण कायाकल्प पुरस्कार प्राप्त करने के साथ ही कई तरह के आधा दर्जन से अधिक पुरस्कार अपने नाम किये हैं जो कोरिया जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल को इतने पुरस्कार नहीं मिले हैं जितने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खडग़वां को मिले हैं यहां तक कि जिला अस्पताल भी इससे काफी पीछे है।

पार्किंग में व्यवस्थित वाहन
जिले के कई अस्पताल परिसरों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है लेकिन खडग़वां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पार्किंग स्थल बनाया गया है जहां सभी गाडिय़ां व्यवस्थित खड़ी की जाती हैं। दो पहिया वाहन एक लाईन से एक ओर तथा चार पहिया वाहनों के लिए अलग व्यवस्था है। नियम का पालन यहां कर कोई करता है यहां तक कि अस्पताल स्टाफ भी नियम अनुसार निर्धारित स्थान पर ही  वाहन पार्क करते हैं। 

बढिय़ा कचरा प्रबंधन
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खडग़वां में कचरा प्रबंधन के लिए अस्पताल के पीछे अलग-अलग कचरे के सोकपिट हैं, इसके अलावा अस्पताल से निकलने वाले प्लास्टिक को मशीन द्वारा तोड़कर उसे बेचा जाता है, इसके अलावा जगह जगह कूड़ादान बनाया गया है, बाहर से आने वाले मरीजो को इसके बारे में जागरूक किया जाता है। ताकि वो कचरा सही स्थान पर फेंके, वही अस्पताल के कई स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है, जिससे अस्पताल से निकलने वाला पानी उसे आसानी से चला जाए।

डॉ. रामेश्वर शर्मा,सीएमएचओ का कहना है कि खडग़वां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की वजह से हमें बीते वर्ष मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया गया है। खडग़वां में मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। खडगवां के आधार पर अन्य पीएससी को भी बेहतर करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। खडग़वां को सीएससी करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, हमें भी उम्मीद है कि खडग़वां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जल्द की सीएससी हो पाएगा।

डॉ. एस कुजूर,बीएमओ ने बताया कि पूरे स्टाफ के साथ जनप्रतिनिधियों व आम लोगों के सहयोग से हम इस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को राज्य में प्रथम लाने में कामयाब हो सके हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र होते हुए यहां सालाना 18  हजार ओपीडी, 700 डिलीवरी, लगभग 5 हजार आईपीडी सेवाएं दी जा रही हैं। हर सरकारी योजनाओं का लाभ मरीजों को मिले इसका पूरा ध्यान के साथ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारे अस्पताल का मुआयना करने जल्द केन्द्रीय दल भी आने वाली है। हमें उम्मीद है कि हमारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जल्द ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बन पाएगा।


Date : 25-Feb-2020

नसबंदी कांड के पांच साल बाद दवा कंपनी संचालकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

2014 में नसबंदी के बाद 16 महिलाओं की मौत, सीएमएचओ सहित दो डॉक्टर हुए थे बर्खास्त

बिलासपुर, 25 फरवरी (छत्तीसगढ़)। प्रदेश के बहुचर्चित नसबंदी कांड के पांच साल तीन माह बाद तखतपुर की अदालत में फार्मा कंपनी संचालक रमेश महावर और राकेश खरे के खिलाफ अभियोजन पत्र दाखिल किया गया है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई तीन मार्च को होगी।

मालूम हो कि बिलासपुर के समीप तखतपुर विकासखंड के ग्राम पेंडारी स्थित नेमीचंद जैन निजी चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग ने एक नसबंदी शिविर आयोजित किया था, जिसमें 137 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया था, जिनमें से कई की तबीयत बिगड़ गई। अगले दिन 13 महिलाओं की तथा बाद में तीन और महिलाओं की मौत हो गई थी। पूरी प्रदेश सरकार में इस घटना से हडक़म्प मच गया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मामले की जानकारी लेने दिल्ली से पहुंचे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस घटना पर चिंता जताई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल को इस घटना के बाद काफी आलोचना का शिकार होना पड़ा था। तब के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष रहे टीएस सिंहदेव ने दोनों से इस्तीफे की मांग की थी और कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया था।

दबाव बढऩे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आर के भांगे और ऑपरेशन करने वाले डॉ. आर के गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। डॉ. गुप्ता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा और काफी दिनों बाद जमानत मिली थी।

उस वक्त आरोप लगा था कि जिन दवाओं का नसबंदी में इस्तेमाल किया गया उन्हें गोपनीय तरीके से जला दिया गया। घटना के चार दिन बाद 11 नवंबर 2014 को तखतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से ड्रग विभाग ने सिप्रोसिन सहित आठ अन्य प्रकार की दवाओं को जब्त किया। स्वास्थ्य विभाग के अन्य स्टोर्स में रखे गये करी एक लाख 52 हजार टेबलेट भी जब्त किये गये, जिनमें से ज्यादातर सिप्रोसिन और आईबो प्रोफेन थे। तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव ने अपने स्तर पर कराई गई जांच के बाद कहा कि इन दवाओं में चूहा मारने के जहर का अंश पाया गया है। बाद में दवाओं का सैम्पल कोलकाता की केन्द्रीय औषधि प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। जांच की रिपोर्ट में पाया गया कि दवाओं का स्तर अमानक है।  इसके बाद 24 फरवरी 2020 को बिलासपुर के ड्ग इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह धु्रव ने महावीर फार्मा, खम्हारडीह (बाकी पेजï 5 पर)

रायपुर के संचालक रमेश महावर तथा तिफरा बिलासपुर स्थित कविता फॉर्मेसी के संचालक राकेश खरे के खिलाफ व्यवहार न्यायालय तखतपुर में अभियोजन पत्र प्रस्तुत कर दिया है। यह अभियोजन पत्र ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 17 बी डी एवं 18 ए1 धारा 27सी के अंतर्गत दाखिल किया गया है। इसकी सुनवाई तीन मार्च से होगी।

 

 


Date : 25-Feb-2020

रायपुर समेत कई जगहों पर बेमौसम झमाझम बारिश, भारी ओले, फसल चौपट, घंटों बिजली बंद रही, किसान चिंतित, मुआवजे की मांग

सरगुजा में डेढ़-दो फीट मोटी बर्फ की चादर

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर/रामानुजगंज/महासमुंद/रायगढ़/बेमेतरा/कुम्हारी/नवापारा-राजिम, 25 फरवरी। मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही प्रदेश में आजकल कई जगहों पर झमाझम बारिश हुई और जमकर ओले गिरे। इस दौरान घंटों बिजली बंद रही। बारिश, ओलावृष्टि से कई जगहों पर खेतों और मैदानों में डेढ़ से दो फीट मोटी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। घरों की तस्वीर जम्मू-कश्मीर की पहाडिय़ों की जैसी दिखने लगी। कई घरों की छतों पर लगे खपरैल, सीमेंट शेड, प्लास्टिक के दरवाजे, कुर्सी, बाल्टी आदि सामान टूटकर तहस-नहस हो गए। दूसरे तरफ रबी धान, गेहूं, चना, मसूर, धनिया व अन्य दलहन-तिलहन, सब्जी के साथ हजारों एकड़ में लगी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रदेश में एक-दो दिन और कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं।

प्रदेश में पिछले 2-3 दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है और कहीं-कहीं बारिश के साथ जमकर ओले गिरने लगे हैं। सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, कोरबा, मरवाही, पेंड्रा समेत कई जगहों पर कल झमाझम बारिश के साथ जमकर ओले बरसे। बीती शाम से रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर संभाग में झमाझम बारिश हुई और रायपुर आउटर क्षेत्र अमलेश्वर, रायपुरा, सेजबहार आसपास के गांवों में जमकर ओले गिरे। भारी बारिश और ओलावृष्टि से सभी तरह की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई मकान की छत क्षतिग्रस्त हुए हैं। यहां तक की अमलेश्वर के एक मकान का शेड टूटने से वहां बर्फ के साथ पानी भर गया। किसानों ने सरकार से ओलावृष्टि का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।

अंबिकापुर से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने जबरदस्त तबाही मचाई है। ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्रों में सडक़ों में डेढ़ से दो फीट मोटी बर्फ की चादर जमी हुई है। किसान अपनी फसल को लेकर काफी चिंतित हैं। ओलावृष्टि से कई घरों के पर छप्पर, सीट व दुकानों के बोर्ड भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सुबह 7 बजे के आसपास मौसम खराब हुआ और तेज हवा के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई, जिससे क्षेत्र में सभी को नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि खासकर रामानुजगंज विकासखंड में हुई है। अन्य स्थानों पर भी ओलावृष्टि की खबर है। ओलावृष्टि से रामानुजगंज की सडक़ बर्फ की चादर से पटी हुई रही। वहीं खेतों में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। रामानुजगंज क्षेत्र के आरागाही, कंचनपुर,कमलपुर,देवगई, मिठगई सहित आसपास गांवों में भी बर्फ की मोटी मोटी चादर बिछ गई। ग्रामों में तबाही का नजारा तस्वीरों को देखकर लगाया जा सकता है।

किसानों ने प्रशासन से मुआवजा की मांग की है। जानकारों का मानना है कि बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से ठंड वापस लौट कर आएगी लोगों को अभी ठंड से राहत नहीं मिलने वाली है। ओलावृष्टि के बाद प्रशासन की टीम उक्त गांव में क्षतिपूर्ति का आंकलन करने पहुंची हुई थी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में जहां एक ओर जमकर ओलावृष्टि हुई तो वहीं सरगुजा के कई क्षेत्रों में सुबह 6  बजे गरज चमक के साथ मूसलाधार बारिश हुई।

उठाव नहीं, हजारों क्विंटल धान भीगा

महासमुंद में मौसम में बदलाव की जानकारी होने के बाद भी खुले में रखा धान को भीगने से नहीं बच पाया। हजारों क्विंटल धान बारिश से भीग गया। वहीं खेतों में खड़े दलहन तिलहन और गेहूं का फसल भी इस बेमौसन बारिश से तबाह हुआ है। रविवार की रात से लेकर अब तक रह रहकर बारिश जाारी है। बीती रात तो जमकर बारिश हुई और ओले भी पड़े। समितियां प्रशासन से जल्द उठाव की मांग कर रही है लेकिन उठाव की रफ्तार धीमी है। इससे पहले हुई बारिश से कई च्ंिटल धान भीगा था। इससे समितियों को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा। समितियों के कर्मचारी बारिश में ऊपर का धान भीगने से तो बचा लेते हैं लेकिन नीचे रखे धान को भीगने से नहीं बचा पाते। अभी भी 127 केंद्रों में 34 लाख क्विंटल धान खुले में पड़ा है। इस मामले में डीएमओ संतोष पाठक का कहना है कि उठाव चल रहा है। समितियों से संग्रहण केंद्रों के लिए ट्रांसपोर्टर उठाव कर रहे हैं।

 रायगढ़ जिले के सारंगढ़ व पुसौर ब्लॉक में समिति प्रबंधकों की लापरवाही के चलते खुले मैदान में रखा हुआ सैकड़ो क्विंटल धान भीग गया। इसके बचाव के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया था। बारिश के आसार दो दिन पहले से ही दिख रहे थे। जिला कलेक्टर ने भी इस संबंध में सभी समिति प्रबंधकों को अपनी-अपनी समिति में रखे गए धान को ढंक कर रखने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन लापरवाही के चलते अलग-अलग ढेरी में रखा गया धान बारिश में भीग गया। खाद्य अधिकारी बताते हैं कि इस वर्ष 20 फरवरी तक

40 लाख 2 हजार से अधिक च्ंिटल धान खरीदा गया है और यह खरीदी पिछले वर्ष की तुलना में 2 लाख क्विंटल अधिक है। बातचीत के दौरान उन्होंने बेमौसम बारिश से धान भीगने से इंकार करते हुए कहा कि सभी समिति प्रबंधकों को पहले से ही निर्देश दिए गए थे कि पानी से बचाने के लिए कैंप कव्हर लगाकर रखें ताकि खुले मैदान में रखे गए धान को नुकसान नहीं पहुंचे, लेकिन इसके बाद भी रायगढ़ जिले के सारंगढ़ व पुसौर ब्लॉक के अधिकांश इलाकों में समिति प्रबंधन की लापरवाही से सैकड़ों च्ंिटल धान बारिश में भीगता रहा।

भारी नुकसान, किसानों की मुसीबत बढ़ी 

बेमेतरा में रबी फसलों पर मौसम का बुरा असर पड़ा है। रविवार रात से बारिश, तेज हवाओं और ओले गिरने की वजह से किसान परेशान हैं। चना, मसूर, धनिया करायत एवं गेहूं अलसी की फसल खराब होने की जानकारी सामने आ रही है। जल्दी पकने वाली फसल बोने वाले के किसानों की फसल खेतों में तैयार हो चुकी थी, मगर अचानक बदले मौसम ने मुसीबतें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 25 फरवरी तक मौसम के हालात कुछ ऐसे ही रहने वाले हैं। कलेक्टर शिव अनंत तयाल ने बताया कि सर्वे करवा कर किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर से मिलने पहुंचे। सभी ने फसल खराब होने के संबंध में उन्हें जानकारी दी। फिलहाल, कृषि विभाग की तरफ से कोई खास मदद किसानों की नहीं की जा रही। बेमेतरा जिले में वर्तमान में लगभग पौने 3 लाख एकड़ में दलहन और तिलहन की फसल बोई गई है। वर्ष बड़े पैमाने पर गेहूं का रकबा बढ़ा है, लेकिन, ओलावृष्टि के कारण खेतों में लहलहाती खड़ी फसलें पूरी तरह से मिट्टी में मिल गई है।

सरकार तुरंत राहत की घोषणा करें

बीते दो दिनों में हुई ओलावृष्टि , बारिश व तेज हवाओं से रबी फसल चना , गेहूं , धनिया व सब्जियों की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। लगभग पखवाड़े भर पहले हुई असमय बारिश से सभी रबी फसलों को बेहद क्षति हुई थी। बची कसर कल के ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। तेज हवाओं से जहां गेहूं की फसल पूरी तरह गिर गई है जिससे गेहूं के पूरी तरह पकने की संभावना समाप्त हो गई है। गेहूं के दाने में काले धब्बे पडऩे की भी आशंका है। बड़े आकार के ओले व तेज बारिश होने से चने व सब्जियों की खेती में काफी मात्रा में पानी जमा हो गया है। जिससे पौधे की मरने की पूरी संभावना है। इस अनायास बारिश व ओले ने सब्जियों की फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया है।  इससे आने वाले दिनों में सब्जियों के दाम काफी तेज होने की भी आशंका है। अक्टूबर के महीने में कटाई हो चुके कम अवधि के धान के फरवरी तक नहीं बिकने से हलकान किसानों को अब रबी फसल में आ रही अनायास प्राकृतिक विपदाओं ने तोड़ कर रख दिया है। लगातार तो तीन मर्तबे हुई बारिश के बाद अब ओलावृष्टि से हुई तबाही का तत्काल आकलन कर यदि सरकार राहत की घोषणा तत्काल नहीं करती तो हालात बद से बदतर होने की आशंका है।

सडक़ किनारे लगे पेड़ धराशायी

नवापारा-राजिम में सोमवार को पूरे दिन की तेज धूप के बाद रात लगभग साढ़े आठ बजे तेज आंधी-तूफान के साथ ओले की बारिश हुई। तेज आंधी-तूफान के कारण सडक़ के किनारे लगे हुए पेड़ धराशायी हो गए। इससे कई स्थानों पर बिजली के तार टूटे और शहर में बिजली गुल रही। कई क्षेत्रों में पेड़ों के गिरने, टीन शेड उडऩे के अलावा अन्य नुकसान की बातें सामने आई हैं। ग्राम बसनी के सरपंच आशीष मिश्रा ने बताया कि इस असामयिक बारिश ने किसानो की कमर तोड़ दी है। फड़ल कटने की स्थिति में इस प्रकार की ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान हुआ है। ग्राम मटका के किसान जितेन्द्र यदु ने कहा कि किसानों को इस ओलावृष्टि से भारी क्षति हुई है। सरकार से किसानों ने मुआवजे की मांग की है। गौरतलब है कि सोमवार को दिन में तेज धूप के बीच रह रहकर घिर आ रहे बादलों को देख बारिश होने की आशंका जाहिर की जा रही थी। रात 8 .30 बजे अचानक तेज हवा के साथ ओले की बारिश शुरू हो गई। हालांकि थोड़ी ही देर में यह समाप्त हो गया। कुछ देर के लिए हुए आंधी-तूफान ने कहर बरसाया। आंधी-तूफान के कारण जहां बिजली गुल रही वहीं जनजीवन भी काफी प्रभावित रहा।

टमाटर व अन्य सब्जी फसल चौपट 

कुम्हारी में बीती रात हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों के चेहरे पर चिंताओं की लकीरें खींच दी हैं।  सोमवार को हुए भारी ओलावृष्टि की वजह से कुम्हारी के आसपास के गांवों के खेतों में लगी फसल लगभग नष्ट हो गई है। खेतों में लगी गेंहूँ , चना और तिवरा की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। ग्राम परसदा के किसान कोमल साहू ने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान चने के पेड़ों को हुआ है। जिंसमे कीड़े लगने की संभावना सबसे ज्यादा है। ठीक उसी तरह गेंहूँ की फसल में बालियां भी टूटकर गिर गई है जो कि एक बड़ा नुकसान है।  मनीषा फार्म्स के लक्ष्मीकांत चौहान ने बताया कि इस पानी और ओलावृष्टि से  सब्जियों में टमाटर की फसल तो पूरी तरह खत्म हो गई  साथ ही धनिया , प्याज़ और पत्तागोभी को भी बहुत नुकसान हुआ है। अगर यही स्थिति रही तो खेती सहित सब्जिय़ां पूरी तरह नष्ट हो जाएंगी जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।

भारी बारिश, ओले गिरने की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक सबसे अधिक बारिश सराईपाली में 76.4 मिमी हुई। बसना में 60.0 मिमी, पिथौरा-52.0 मिमी, माना-48.8 मिमी, आरंग-46.8 मिमी, रायपुर-43.6 मिमी, बागबाहरा-42.0 मिमी, रायपुर सिटी-38.5 मिमी, धमधा-36.8 मिमी व लाभांडी में 35.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा संभाग के  और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। बस्तर संभाग में आज बदली-बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा का कहना है कि दक्षिण बिहार के ऊपर एक चक्रवाती घेरा 1.5 किलोमीटर पर स्थित है तथा यहां से एक द्रोणिका छत्तीसगढ़ होते हुए तेलंगाना तक गई है। इसके प्रभाव से पूरे छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। प्रदेश के उत्तर-पूर्व के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना आज भी बनी हुई है। बाकी जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।


Date : 22-Feb-2020

सुरक्षा बलों को उड़ाने नक्सलियों ने कार रिमोट को बनाया नया हथियार, कांकेर पंचायत चुनाव के दौरान नई तकनीक...

राजनांदगांव, 22 फरवरी (छत्तीसगढ़)। नक्सली ऑटोमोबाईल क्षेत्र में बेहद ही किफायती माने जाने वाले कार रिमोट को फोर्स पर हमला करने के लिए बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। कार रिमोट जैसी घरेलू उपयोग की इलेक्ट्रॉनिक वस्तु से नक्सलियों के बम विस्फोट करने की तकनीक ने खुफिया एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है। हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में नक्सलियों ने कांकेर जिले में दर्जनभर स्थानों में फोर्स को उड़ाने की नियत से बम गड़ाया था। कांकेर पुलिस ने करीब 10 जगह से जमीन में छुपाए बमों को निष्क्रिय किया। छानबीन के दौरान पुलिस के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 

बताया गया है कि विस्फोट के लिए कार रिमोट के उपयोग किए जाने से अफसर हैरानी में पड़ गए। बताया जाता है कि कांकेर पुलिस को कोयलीबेड़ा, पंखाजूर तथा अंतागढ़ क्षेत्र के अंदरूनी मार्गों में इस तकनीक केे जरिए फोर्स को उड़ाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। बम निष्क्रिय करने के दौरान एक स्थान पर नक्सलियों ने इस तकनीक की मदद से बलास्ट भी किया। वहीं 9 ठिकानों में पुलिस ने नक्सलियों के इरादे पर पानी फेर दिया। 

इस संबंध में कांकेर एसपी भोजराम पटेल ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि नक्सलियों द्वारा कार रिमोट का उपयोग करने की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। एसपी का कहना है कि कार रिमोट की खरीदी पर भी पुलिस की नजर है। 

बताया जाता है कि नक्सलियों की इस तकनीक का जवाब देने के लिए फोर्स आईटी एक्सपट्र्स की मदद ले रही है। नक्सलियों ने उत्तर बस्तर के इस इलाके में इस तकनीक के जरिए सुरक्षाबलों को निशाने में लिया है। बताया जाता है कि इस इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाईस को हासिल करना नक्सलियों के लिए आसान और सस्ता भी है। ऑटोमोबाईल के खुदरा बाजार में कार रिमोट सस्ते दाम पर उपलब्ध है। कांकेर पुलिस ने बरामद किए गए बमों में कार रिमोट के उपयोग करने की पुख्ता जानकारी हासिल की है। पुलिस ने कार बाजारों में अपनी पैनी निगाह रखते हुए गहन जांच शुरू कर दी है। 

सूत्रों का कहना है कि कार रिमोट से विस्फोट करने की नक्सलियों की यह नीति सुरक्षाबलों पर भारी पड़ सकती है। बता दें कि खुफिया एजेसियां इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि नक्सली हर थोड़े सालों में नई तकनीक से जवानों पर हमला करते रहे हंै। 


Date : 17-Feb-2020

कृषि मंत्री की नोटशीट से विभाग थर्राया, वर्मी-कम्पोस्ट खरीदी में अनियमितता की जांच, सप्लायरों-अफसरों पर एफआईआर करने कहा

शशांक तिवारी

रायपुर, 17 फरवरी (छत्तीसगढ़)। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे की एक नोटशीट से पूरा विभाग थर्रा गया है। चौबे ने वर्मी बेड-कम्पोस्ट की ऊंची दर पर खरीदी की शिकायत पर सख्त आदेश दिए हैं। उन्होंने न सिर्फ भुगतान पर रोक लगा दी है बल्कि सप्लायरों-अफसरों की भूमिका की जांच कर एफआईआर कराने के लिए कह दिया है। 

श्री चौबे के अधीन उद्यानिकी विभाग में करीब 8 करोड़ से अधिक वर्मी बेड-कम्पोस्ट की खरीदी हुई थी। यह खरीदी करीब 3 माह पहले हुई थी। यह शिकायत आई कि वर्मी बेड-कम्पोस्ट की ऊंची दर पर खरीदी की गई है। इसमें सप्लायरों को काफी फायदा पहुंचाया गया है। इस खरीदी में विभाग के अफसरों की भूमिका रही है। शुरूआत में तो इन शिकायतों पर ज्यादा कुछ नहीं हुआ, लेकिन जिलों से इसकी शिकायत आनी शुरू हो गई। 

यह बताया गया कि कई जगहों पर गुणवत्ताहीन वर्मी बेड-कम्पोस्ट की सप्लाई हुई है। यह शिकायत कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे तक पहुंची, तो उन्होंने विभाग के लोगों से जानकारी ली। यह बात सामने आई है कि दोगुनी-तिगुनी दर पर वर्मी बेड-कम्पोस्ट की सप्लाई की गई है। इनमें से कुछ सप्लायर रायपुर के ही हैं। इन शिकायतों को कृषि मंत्री ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती डॉ. मनिन्दर कौर द्विवेदी को कड़ा नोटशीट भेजा है। सूत्रों के मुताबिक कृषि मंत्री ने न सिर्फ भुगतान रोकने के आदेश दिए हैं बल्कि पूरी शिकायत पर जांच प्रतिवेदन तलब किया है। साथ ही यह भी लिख दिया है कि दोषी सप्लायर-अफसरों के खिलाफ तुरंत एफआईआर कराई जाए। 

कृषि मंत्री की नोटशीट से विभाग में हडक़ंप मच गया है। सप्लायरों का भुगतान रोक दिया गया है। प्रकरण की अभी जांच ही चल रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब आधा दर्जन से अधिक अफसर लपेटे में आ सकते हैं। इन अफसरों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं।  उल्लेखनीय है कि ये सभी सप्लायर पिछले सालों में उद्यानिकी विभाग में सैकड़ों-करोड़ों की सप्लाई कर चुके हैं। कई बार शिकायतें आई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। तब पिछली सरकार के प्रभावशाली लोगों का इन सप्लायरों को संरक्षण रहा है। सरकार बदलने के बाद भी यही ढर्रा चलता रहा।

पहले तो विभागीय बैठकों में कृषि मंत्री ने साफ शब्दों में सप्लाई आदि में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के लिए हिदायत दी थी। बावजूद इसके गड़बड़ी जारी रही। इसके बाद पहली बार सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अभियान चल रहा है। ऐसे में वर्मी बेड-कम्पोस्ट से न सिर्फ जैविक फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है, बल्कि यह रासायनिक खाद की तुलना में काफी सस्ता होता है। यही वजह है कि पिछले वर्षों में काफी खरीदी हुई है। 


Date : 16-Feb-2020

बस्तर में माओवादियों का लगातार सिकुड़ता कैडर, 14 करोड़ से ज्यादा के वृद्ध इनामी दशकों से भूमिगत

रायपुर, 16 फरवरी । देश में 38 अत्यधिक वांछित 14 करोड़ से भी अधिक के इनामी माओवादी नेता जिन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ-साथ अन्य राज्यों की सरकारों को तलाश है अब उम्रदराज हो चले हैं और पिछले दो-तीन दशकों से कुछ तो 40 से भी ऊपर भूमिगत जीवन व्यतीत कर रहें है।

राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और दिप्रिंट के पास मौजूद कागज और साक्ष्यों से यह पता चलता है कि ये 38 ऐसे दुर्दांत माओवादी नेता हैं जो छत्तीसगढ़ और अन्य राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, बिहार और ओडिशा के साथ अन्य दक्षिणी राज्यों में नक्सलवाद का नेतृत्व करते हैं और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के संगठन में अपना पूर्ण वर्चस्व रखते हैं। सीपीआई (एम) के संगठनात्मक निर्णयों के अलावा यही नेता पार्टी के अन्य फ्रंटल संगठनों में भी पूरा दखल रखते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी माओवादियों की मोस्ट वांटेड सूची में करीब 21 ऐसे नेताओं का नाम शामिल है जो अन्य राज्यों के पुलिस और सुरक्षा एजेंसी के द्वारा भी वांछित हैं। इनमें सात ऐसे खतरनाक और उम्रदराज माओवादी हैं जिन पर छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षाबलों द्वारा एक करोड़ का इनाम घोषित है वहीं अन्य 14 माओवादी कमांडरों पर 40 लाख का नगद इनाम घोषित है। ये सभी 21 नेता सीपीआई(एम) में या तो पोलितब्यूरो या केंद्रीय समिति यानी सेंट्रल कमेटी के सदस्य या फिर देश में माओवाद को संचालित करने वाली पार्टी के अन्य फ्रंटल संगठनों के सदस्य अध्यक्ष हैं।

दो-तीन दशकों से भूमिगत हैं माओवादी
इनके अलावा 17 ऐसे खतरनाक वांछित माओवादी हैं जो सिर्फ छत्तीसगढ़ में नक्सल तंत्र का नेतृत्व संभाल रहे हैं। ये सभी माओवादी नेता दंडकारण्य जोनल स्पेशल कमेटी (डीकेजेडएससी) के सदस्य, पदाधिकारी या फिर राज्य में कमेटी के फ्रंटल संगठनों के संचालक का काम देखते हैं। इन माओवादियों पर करीब 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है। मोस्ट वांटेड माओवादियों में करीब आधे ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 से 85 के बीच है। ये माओवादी कमांडर जिसमें 3 महिला भी शामिल है करीब दो-तीन दशकों से भी ज्यादा भूमिगत जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में माओवादी विरोधी अभियान में लगे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि माओवादी नेताओं की बढ़ती उम्र के बावजूद भी उन्हें नक्सलवाद का नेतृत्व करना पड़ रहा है क्योंकि विगत 5 से 7 वर्षों में स्थानीय युवाओं और जनता का समर्थन उन्हें बहुत कम मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जनता का समर्थन नहीं मिलने की वजह से छत्तीसगढ़ में माओवादी मिलिशिया का कैडर बल अब आधा ही रह गया है जिससे उनकी गतिविधियां विशेषकर हमलों में काफी गिरावट आई है।

ज्ञात हो की करीब 3 महीने पहले प्रदेश सरकार ने भी सार्वजनिक रूप से यह बताया था कि पिछले 3 वर्षों के दौरान माओवादी हिंसक गतिविधियों में करीब 45त्न की गिरावट आई है।
दिप्रिंट से बात करते हुए बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी कहते हैं, ‘छत्तीसगढ़ और देश के अन्य राज्यों में माओवादी नेतृत्व अब वृद्ध हो चुका है जिसके वजह से नक्सली विचारधारा को बड़ा झटका लगा है। अब इस विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय युवा आगे नहीं आ रहे हैं। इस का मुख्य कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षबलों की भारी मात्रा में तैनाती और सरकार द्वारा चलाये जा रहे विकास के कार्य हैं।’ बस्तर पुलिस महानिरिक्षक का कहना है कि ‘पिछले पांच वर्षों में माओवादी लडाकों की संख्या करीब आधी हो चुकी है और आने वाले दिनों में और भी कमजोर पड़ेंगे।’

एक करोड़ के इनामी माओवादी
खतरनाक 21 वांछित माओवादियों में 7 ऐसे नक्सलवादी नेता हैं जिन पर छत्तीसगढ़ के साथ-साथ नक्सल प्रभावित अन्य राज्य महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना और बिहार की सरकारों ने एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया है। एक करोड़ के इनामी नक्सलवादियों की सूची में शामिल है 

72 वर्षीय मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ रमन्ना उर्फ गुडसा दादा (निवास करीमनगर तेलंगाना), 82 वर्षीय मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर (निवास गिरिडीह झारखंड), सीपीआईएम प्रवक्ता कोटक कम सुदर्शन उर्फ आनंद मोहन (निवास आदिलाबाद तेलंगाना), 60 वर्षीय मल्लोजुल्ला वेणु गोपाल उर्फ लक्ष्मण उर्फ सोनू (निवास करीमनगर तेलंगाना), नंबर वन केशव राव उर्फ गगन्ना (निवास जिला श्री गोकुलम तेलंगाना), 65 वर्षीय प्रशांत बोस उर्फ किशन दा (निवास जादवपुर कोलकाता) और विवेक चांदनी उर्फ प्रयाग (निवास धनबाद झारखंड) है।
मुपल्ला लक्ष्मण राव विगत 42 वर्षों से भूमिगत जीवन जी रहा है, मिसिर बेसरा करीब 30 वर्ष, सुदर्शन करीब 37 वर्ष, नम्बवाल केशव करीब 25 वर्ष और अन्य तीन करीब दो दशकों से भूमिगत जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

40 लाख के ईनामी माओवादी
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घोषित 40 लाख के इनामी माओवादियों में जो नाम शामिल है उनमें मल्लाराजी रेडी उर्फ सतन्ना उर्फ मसन्ना, 60 वर्षीय कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा और गौतम उर्फ साधु, 62 वर्षीय थिप्परी तिरुपति उर्फ कुम्मा उर्फ देवन्ना और 56 वर्षीय पुल्लरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना उर्फ शंकरन्ना चारों तेलंगाना के करीम नगर के रहने वाले हैं।
सीपीआई (एम) के ये सेंट्रल कमेटी सदस्य विगत तीन दशकों से भूमिगत हैं। इनके अलावा सीपीआई (एम) की 55 वर्षीय एकमात्र महिला पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी सदस्य झारखंड की शोभा उर्फ शीला मरांडी, उत्तर बिहार का 65 वर्षीय प्रमोद मिश्रा उर्फ बन बिहारी उर्फ नेताजी, यवतमाल महाराष्ट्र का रहनेवाला 60 वर्षीय दीपक तलतुम्बे, रमेश उइके उर्फ चमरू दादा, नालगोंडा तेलंगाना से हनुमंथलु, हावड़ा का रहवासी रंजीत बोस और 55 वर्षीय वारंगल तेलंगाना निवासी नादेन बालकृष्ण एवं गजराला रवी भी 40 लाख के इनामी माओवादी हैं जो 2-3 दशकों से भूमगत हैं।

25 लाख के ईनामी माओवादी
ऐसे करीब 17 कट्टर नक्सली नेता हैं जिनपर छत्तीसगढ़ सरकार ने कई वर्षों से 25 लाख रुपए का इनाम घोषित किया हुआ है। ये ईनामी माओवादी ही प्रदेश में नक्सल कैडर की गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं और सभी नेता डीकेजेडएससी के सदस्य और कमेटी के फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी भी हैं। इन नामों में प्रशासन और पुलिस के बीच प्रख्यात 55 वर्षीय स्थानीय दुर्दांत नक्सली हिडमा मांडवी उर्फ हिडमन्ना प्रमुख है। हिडमा को सीपीआई (एम) ने फिलहाल डीकेजेडएससी के पूर्व प्रभारी सचिव रमन्ना की नवंबर 2019 में एक लंबी बीमारी से हुई मौत के बाद मिलिशिया का कमान सौंपा है।

25 लाख के अन्य ईनामी नक्सली लडाकों में जिला महबूबनगर तेलंगाना की रहने वाली सुजाता नाम की 58 वर्षीय दो महिला नक्सली नेता भी शामिल हैं। एक सुजाता जिसे नक्सली अल्लुरी कृष्णा कुमारी के नाम से भी जानते हैं। वो डीकेजेडएससी की प्रवक्ता भी है।

बस्तर रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की माने तो अल्लूरी कृष्णा कुमारी डीकेजेडएससी के छत्तीसगढ़ प्रभारी के खाली पड़े पद के लिए एक प्रमुख दावेदार भी हैं। ये दोनों महिला नक्सली नेता विगत 33 वर्षों से भूमिगत हैं।
इनके अलावा 20 वर्षों से भूमिगत 60 वर्षीय लेंगा उर्फ संजीव निवासी जिला रंगारेड्डी तेलंगाना, 53 वर्षीय रवी उर्फ लोकेटी निवासी जिला निजामाबाद 25 सालों से भूमिगत, 59 वर्षीय ग्रिड्डी पवनन्दन उर्फ श्याम दादा निवासी जिला वारंगल तेलंगाना (35 सालों से भूमिगत), 55 वर्षीय विनय रेड्डी निवासी नालगोंडा तेलंगाना, 69 वर्षीय रघु उर्फ सुयालु उर्फ शिवन्ना निवासी वारंगल तेलंगाना (करीब चार दशकों से भूमिगत) और गोलापल्ली जिला सुकमा छत्तीसगढ़ निवासी 51 वर्षीय सुरेन्द्र सोढ़ी उर्फ सोमा सोढ़ी नामक नक्सली हैं।


Date : 15-Feb-2020

वेलेंटाइन-डे पर हथियार छोड़ दलम से भागा नक्सल प्रेमीजोड़ा, मोहला दलम के हार्डकोर नक्सली गैंदसिंग और प्रेमिका आसमां की तलाश में पुलिस

राजनांदगांव, 15 फरवरी (छत्तीसगढ़)। वैलेंटाइन-डे पर राजनांदगांव जिले के मोहला दलम के एक प्रेमी नक्सल जोड़ा अपनी नई जिंदगी की शुरूआत करने के लिए हथियार छोडऩे की खबर है।

वैलेंटाइन-डे से दो दिन पहले मिली सूचना से पुलिस को इस प्रेमी जोड़े को मुख्यधारा में लाने के लिए अच्छा मौका हाथ लग गया है। बताया गया है कि जंगल में साथ रहे जोड़े ने दबाव और डर की दुनिया को छोडक़र नैसर्गिक जीवन जीने का इरादा लेकर हिंसक रास्ता को अलविदा कह दिया। पुलिस के पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि मोहला दलम कमांडर गैंदसिंग कोवाची अपनी नक्सल प्रेमिका आसमां धुरवा के साथ हथियार छोडक़र दलम से निकल गया है।

इस संबंध में एसपी बीएस ध्रुव ने  ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि पुलिस के पास ऐसी जानकारी है कि दोनों ने दलम छोड़ दिया है। दोनों की तलाश की जा रही है।

बताया गया है कि गैंदसिंग कोवाची पर करीब 8 लाख रुपए का ईनाम भी है। वह कांकेर जिले के कोडेखुरसे थाना के भुरके गांव का रहने वाला है। 2005-06 में नक्सली बना गैंदसिंग लंबे समय से राजनांदगांव के मोहला-मानपुर और औंधी इलाके में सक्रिय रहा है। उसकी प्रेमिका आसमां धुरवा भी कांकेर जिले के ओटेकसा की रहने वाली है। दोनों का प्यार  धीरे-धीरे परवान चढ़ता गया और मौके की तलाश में बैठा यह जोड़ा वैलेंटाइन-डे से दो दिन पहले ही दलम को चकमा देकर बाहर निकल गया।

 बताया जा रहा है कि इस खबर के बाद कांकेर, राजनांदगांव और गढ़चिरौली की पुलिस भी दोनों की तलाश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि कांकेर पुलिस ने सूचना मिलने के बाद कवाची के पैतृक गांव में रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों से संपर्क बढ़ाया है।

सूत्र बता रहे हैं कि दोनों का लंबे समय से नक्सल दलम से मोह भंग होने लगा था। यह भी खबर है कि गैंदसिंग और उसकी प्रेमिका आसमां को नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व को दोनों के 

रिश्ते को लेकर आपत्ति थी। दलम छोडऩे का मन बना चुके इस जोड़े ने आखिरकार वैलेंटाइन-डे के खास मौके को चुना। दो दिन पहले इस जोड़े ने दलम से बाहर निकलने की हिम्मत दिखाई।

सूत्रों का कहना है कि गैंदसिंग एसएलआर से लैस था। यह भी खबर है कि दलम से निकलने के दौरान भी उसके पास उक्त हथियार मौजूद था। हालांकि अब खबर आ रही है कि उसने हथियार कहीं छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों को घेरने के लिए पुलिस सर्चिंग में जुट गई है।

इधर हार्डकोर नक्सली गैंदसिंग की गैरमौजूदगी से नक्सलियों को जोरदार झटका लगा है। राजनांदगांव जिले का दक्षिण इलाका मोहला-मानपुर कभी नक्सलियों के लिए पनाहगाह था।

बताया जाता है कि गैंदसिंग कोवाची के दलम छोडऩे से नक्सलियों को स्वभाविक तौर पर झटका लगना तय है। बहरहाल इस नक्सल जोड़े की खोजबीन में पुलिस के अलावा नक्सली जमीन-आसमान एक कर रहे हैं।

 

 


Date : 07-Feb-2020

दिव्यांग सरपंच का हुक्का-पानी बंद, फिर भी जीता, अब सबने मिल-जुलकर विकास की बात कही

राज शार्दूल

विश्रामपुरी (कोंडागांव), 7 फरवरी (छत्तीसगढ़)। बड़ेराजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत चिचाड़ी में ग्राम प्रमुखों व ग्रामीणों द्वारा हुक्का पानी बंद करने के बाद दिव्यांग सरपंच दोबारा चुनाव जीत गया। नवनिर्वाचित सरपंच ने बताया कि उसके घर में किसी भी ग्रामीण का आना जाना बंद था, किंतु उसने हार नहीं मानी और दो प्रस्तावक एवं समर्थक का जुगाड़ किया तथा पुन: सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा और विजय हासिल किया।

ज्ञात हो कि गांव में कुल 56 4 मतदाता हैं। चुनावी मैदान में 5 प्रत्याशी थे। देवीराम कोराम को 200 मत पड़ा था और वह 117 मतों से जीत हासिल किया है। अब मुखिया व ग्रामीणों ने सरपंच के साथ मिलजुल कर काम करने की बात कही है। चुनाव जीतने के बाद नवनिर्वाचित सरपंच द्वारा रविवार को सामूहिक भोज का आयोजन किया गया है।

मामला बड़ेराजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत चिचाड़ी का है। जहां पंचायत चुनाव के पहले कुछ ग्राम प्रमुखों ने बैठक बुलाया तथा गांव के सरपंच देवी राम कोराम को समाज एवं गांव से बहिष्कृत कर दिया। गत चुनाव में ग्राम पंचायत चिचाड़ी में देवी राम कोराम जो कि पैर से दिव्यांग है को सरपंच चुना गया था। वह अपने कार्यकाल में किसी प्रकार के विवादों में नहीं रहा।

गांव में शौचालय के भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने बैठक की। जहां गांव के सभी लोग शामिल हुए थे। ग्राम प्रमुखों ने स्वयं को मुखिया बताकर सरपंच को बैठक में बुलाया। सरपंच देवीराम वहां किसी कारणवश नहीं पहुंच पाये जिससे आक्रोशित होकर सरपंच को ही गांव से बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया गया तथा गांव में मुनादी कराते हुए उनका हुक्का-पानी भी बंद कर दिया। गांव के किसी भी दुकान से उनको सामान नहीं देने की हिदायत दे दी गई तथा किसी भी हैंडपंप या कुएं से वह पानी का उपयोग भी ना करें ऐसा उसे चेतावनी दिया गया। उसके पीछे निगरानी करते रहे किंतु दिव्यांग सरपंच ने हार नहीं मानी।

सरपंच चुने जाने के बाद देवी राम कोराम ने बताया कि उसे आज बेहद खुशी हुई है कि दिव्यांग होने तथा गांव वालों के द्वारा बहिष्कार करके हुक्का पानी बंद कर दिए जाने के बाद भी उसे मतदाताओं का आशीर्वाद मिला। वह अब पूरे 5 वर्ष तक गांव वालों की सेवा करेगा। उसने बताया कि पूर्व में भी भ्रष्टाचार से दूर रहकर ग्रामीणों की सेवा किया था किंतु कुछ लोगों ने दुर्भावना वश उसे सरपंच पद पर दोबारा ना लड़ पाए इस नीयत से उसके खिलाफ बहिष्कार की साजिश रची गई। बहिष्कार का उल्लंघन करने वाले को 7051 रूपये का जुर्माना

गांव के बुजुर्ग मुखिया लच्छू राम कश्यप ने बताया कि सरपंच देवीराम कोर्राम के द्वारा शौचालय निर्माण की राशि देने में देर किया जिससे यह शर्त रखा गया था कि तीन दिन के अंदर ग्रामीणों को शौचालय की राशि  का भुगतान नहीं करने पर उनको गांव से बहिष्कार किया जाएगा। देवीराम तीन दिन तक पैसा नहीं दे पाया जिससे बहिष्कार कर दिया गया। बहिष्कार के तहत जो भी गांव का व्यक्ति सरपंच देवी राम कोराम से किसी भी प्रकार का लेनदेन करेगा या कोई मजदूर उसके घर में काम करने जाएगा या कोई दुकानदार उसे सामान देगा या कोई हैंडपंप से पानी निकालते हुए देवी राम को नहीं रोकेगा तो उसे 7 हजार 51 रूपये का जुर्माना रखा गया था। इसके कड़ाई से पालन के लिए दो बार मुनादी किया गया था।

चुनाव जीतने के बाद लच्छू राम ने कहा कि सरपंच के साथ मिलजुल कर काम करेंगे। अब कोई शिकायत नहीं है।

गांव के दुकानदार शिवलाल ने बताया कि गांव के ग्रामीणों के द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद वह देवी राम को सामान नहीं दे रहे थे। वह भी सामान के लिए दुकान में नहीं आता था। वह अन्य गांव के दुकानों से सामान लाता था। देवी राम को गांव वालों ने इस तरह प्रताडि़त किया था कि उसे पानी के लिए भी गांव से 3 किलोमीटर दूर लिहागांव पंचायत से पानी लाना पड़ता था।