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देखें VIDEOS : बारिश में पंचायत मुख्यालय से कट जाता है कोरिया सीमा का अंतिम गांव कांसाबहरा
17-Jun-2020 7:30 PM 21
देखें VIDEOS : बारिश में पंचायत मुख्यालय से कट जाता है कोरिया सीमा का अंतिम गांव कांसाबहरा

बड़ा नाला लबालब होने से बच्चे आंगनबाड़ी-स्कूल नहीं जा पाते

चंद्रकांत पारगीर

बैकुंठपुर, 17 जून । कोरिया जिले का एक ऐसा आश्रित ग्राम जो बारिश में पूरी तरह अपने ग्राम पंचायत मुख्यालय से कट जाता है। बारिश के दिनों में बड़े नाले में पानी रहने के कारण कुछ बच्चे आंगनबाड़ी भी नहीं जा पाते है, तो कुछ स्कूल। वहीं जिले की बॉर्डर का अंतिम ग्राम होने के कारण विकास की किरण यहां अब तक नहीं पहुंच पाई है। काफी दूर होने के कारण अफसर ग्रामीणों की सुध नहीं लते है। यही कारण है कि ज्यादातर विकास कार्य कागजों में ही सिमट कर रह गए है। ‘छत्तीसगढ़’ ने मंगलवार को गांव जाकर हाल जाना व ग्रामीणों से बातचीत भी की।

ज्ञात हो कि कोरिया जिले के खडग़वां तहसील के ग्राम पंचायत मुगुम के आश्रित ग्राम कांसाबहरा जाने के लिए पंचायत मुख्यालय से दो किमी की दूरी तय कर एक जिंदा नाले को पार करना पड़ता है। बारिश के दिनों में इस नाले को पार करना बेहद कठिन काम होता है। ग्राम के कुछ लोगों के साथ कई मवेशी भी इस नाले के बहाव में कई बार बह चुके हैं। करीब 12 वर्ष पहले तत्कालीन संसदीय सचिव नाले तक पहुंचे थे और नाले पर पुल बनाने का आश्वासन दिया था। मंत्री बनने के बाद चुनाव के समय फिर वो नाले तक पहुंचे, वोट मांगा और इस बार फिर पुल बनाने का आश्वासन दे दिया, पर पुल आज तक नहीं बना और ग्रामीणों की परेशानियां भी खत्म नहीं हुई। वहीं ग्रामीणों को अपना राशन लेने ग्राम पंचायत मुगुम जाना पड़ता है, वह भी नाले को पार करके। वहीं कुछ बच्चों को आंगनबाड़ी जाना होता है तो 6वीं से आगे की पढ़ाई करने वाले बच्चों को भी मुगुम जाने के लिए इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में नाले को पार करने का खतरा हमेशा बना रहता है। ग्राम से बाहर जाने का दूसरा रास्ता है जो कोरबा जिले की तरफ खुलता है। धनपुर से जंगल के बीच होकर ग्रामीण मुख्य मार्ग तक पहुंच जाते है परन्तु उनको अपने काम के लिए ग्राम पंचायत मुगुम की जाना पड़ता है, जो बिना नाला पार किए नहीं जा सकते है।

कागजों पर बन गए कई विकास कार्य

ग्राम पंचायत मुगुम का आश्रित ग्राम कांसाबहरा में कई कार्य स्वीकृत हुए और कागजों पर बन भी गए। ग्रामीणों की मानें तो यहां हैडपंप के करीब स्नानागार बनाया जाना था, पैसा आया और कागजों पर स्नानागार बनकर पैसा निकल भी गया, परन्तु भौतिक रूप में अब तक किसी भी हैंडपंप में स्नानागार नहीं बन सका है। वहीं देवगुड़ी में चबूतरा निर्माण होना था, यहां त्यौहार में पूरा गांव जुटता है, परन्तु यह भी कागजों पर भी बना दिया गया।

इसी तरह इस गांव में एक भी सीसी रोड का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश के इस मौसम में सडक़ों पर पैदल चलना भी दूभर है। पीली और चिकनी मिट्टी होने के कारण पैदल लोग फिसल कर घायल हो रहे है। सडक़ों में कई वर्षों से मुरूमीकरण तक नहीं हुआ है। इसी तरह यहां सामुदायिक भवन भी आया था, परन्तु बना आज तक नहीं है।

किसी काम के नहीं शौचालय

कांसाबहरा में 303 वोटर है, यहां की जनसंख्या में 500 के आसपास है, ऐसे में वर्ष 2017-18 में कई ग्रामीणों के शौचालय आज तक नहीं बनाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो शौचालय बने भी है वो किसी काम के नहीं है, सिर्फ शौचालयों को खड़ा कर दिया गया, ना तो सोखता बनाया गया और ना ही शौचालय में शीट लगाई गई। वहीं शौचालय में काम करने वाले स्थानीय मजदूरों को आज तक मजदूरी नहीं दी गई है, और पूरे ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। ग्रामीणोंं ने कई बार मजदूरी की मांग की, परन्तु किसी ने सुध नहीं ली।

आंगनबाड़ी स्कूल जर्जर

कांसाबहरा ग्राम में स्थित आंगनबाड़ी भवन जर्जर हो चुका है, वहीं प्राथमिक स्कूल की हालत बेहद खराब है, ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ही भवन का प्लास्टर कई बार गिर चुका है, आंगनबाड़ी भवन की छत तो एकदम ही खराब हो चुकी है। स्कूल भवन के साथ रसोईघर की दीवार भी टूट कर गिर चुकी है। वहीं ग्रामीणों की मांग है कि उनके गांव में एक सामुदायिक भवन, एक मिनी आंगनबाड़ी के साथ जल्द से जल्द नाले पर पुलिया निर्माण करवाई जाए।

इस संबंध में बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव का कहना है कि बारिश के मौसम में वहां ये परेशानी प्राय: देखी जाती है। उक्त पुल निर्माण के लिए मेरे द्वारा प्रस्ताव बनाने को कहा गया है, मैं मुगुम गई थी तभी मुझे वहां के लोगों ने बताया था, दूसरी ओर से वहां दो हैंडपंप का खनन कार्य भी करवाया गया है, जो हैंडपंप बिगड़े है, उन्हें भी सुधार कार्य करवाने के लिए विभाग को कहा गया है।

हाथियों का रहवास

कोरिया जिले के खडग़वां में आने वाले हाथियों का कांसाबहरा रहवास माना जाता है, कुछ माह पूर्व आए हाथी का दल यहां दो माह रूका, कुछ ग्रामीणों की फसल खाई, एक दो ग्रामीणों के घरों को हल्का नुकसान पहुंचाया, ग्रामीण बताते हैं कि इस बार दो माह रूके हाथियों दल में दो शावकों का जन्म यही हुआ, उनके बच्चे जब तक चलने लायक नहीं हो जाते, तक तक उन्हें रूकना पड़ता है, ऐसे में हाथी रात के साथ साथ दिन भी गांव में घूमते रहते थे। इस दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी।

 

 

 

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