विचार / लेख

अनगिनत हिन्द रजबों की कहानियां
01-Apr-2026 10:04 PM
अनगिनत हिन्द रजबों की कहानियां

-सनियारा खान

द वॉयस ऑफ हिन्द रजब फि़ल्म को हमारे देश में दिखाना मना है। कम से कम अभी तक तो मना ही है। अगर इस खबर से आपको हैरानी हुई है तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि हमारे देश में ना जाने कितने बच्चे बच्चियों को पाशविक तरीके से रेप करने की खबरें करीब करीब प्रति दिन  आती रहती हैं। क्या किसी को कोई खास फर्क पड़ता है? नहीं न? तो फिर एक दूसरे मुल्क ईरान की, और वह भी एक  मुस्लिम  बच्ची की मौत से हम क्यों दुखी हो! चाहे उसकी मौत कितनी ही दिल दहला देनेवाली ही क्यों न हो!

यह फि़ल्म गाजा के बच्चों और नागरिकों की दुर्दशा को लेकर विश्व भर के लोगों के ध्यान आकर्षण करने में कामयाब हुई है। यह कौथर बेन हानिया द्वारा निर्देशित एवं ऑस्कर के लिए नामांकित एक डॉक्यूमेंटरी फि़ल्म है। ट्यूनीशिया और फ्ऱांस दोनों देश इस फि़ल्म के निर्माण में सहयोगी हैं। ये फि़ल्म सन 2024 में गाजा में इसराइली हमले के दौरान मारी गई एक छ साल की फिलिस्तीनी बच्ची हिन्द रजब के बारे में है। मौत से पहले अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में वह किस तरह मदद के लिए गुहार लगाती रही उसी को इस फि़ल्म में दिखाया गया है। इस फि़ल्म को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में स्टैंडिंग ओवेशन के साथ ही ग्रैंड ज्यूरी पुरस्कार भी मिला और 98वें अकादमी पुरस्कारों (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फि़ल्म के लिए नामांकित हुई है। इस फि़ल्म से जुड़े हुए लोगों को यह फिल्म  बनाने से ट्रंप या न्येतनहू भी रोक नहीं पाए। ये फिल्म ट्यूनीशिया,ब्रिटेन , फ्रांस, इटली जैसे कई देशों में रिलीज हो चुकी है। और तो और, इजरायल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सभी लड़ाइयों में शामिल होने वाले देश अमेरिका में भी लोग बिना रोक टोक के ये फिल्म देख रहे हैं। इन देशों में शायद ट्रंप या न्येतनहू दोनों का डर नहीं  है। शायद वहां अभी भी लोकतंत्र जि़ंदा है। खैर, अब हम हिन्द रजब के बारे में थोड़ा और जानने की कोशिश करते हैं। गाजा के पास तेल अल हया नामक एक जगह पर इजरायली हमले के बाद एक काले रंग की गाड़ी में कई लाशों के बीच फंसी हुई छोटी सी बच्ची जिसका नाम हिन्द रजब था ,लगातार पेलेस्टाइन रेड क्रसेंट सोसायटी (पी आर सी एस) नामक एक पेरा मेडिकल सेवा से  अपनी जान बचाने के लिए विनती कर रही थी। करीब करीब तीन घंटे तक संघर्ष करने के बाद आखिर में वह अपने आप को नही बचा पाई।

 

अपने चाचा चाची और उनके तीन बच्चों के साथ हिन्द रजब जान बचाने के सफऱ में उत्तरी गाजा की तरफ निकल पड़ी थी। रास्ते में उसके चाचा ने जर्मनी में रह रहे किसी रिश्तेदार से बात भी की। उसके बाद ही इजरायली हमले में वे लोग मारे गए। हिन्द रजब के साथ उसकी पंद्रह साल की चचेरी बहन लयान कुछ देर तक जिंदा थी। वह  अपने पिता के फोन से रेड क्रसेंट पैरा मेडिक्स को कॉल कर रही थी  । लेकिन उसकी भी जान चली गई। इसके बाद उसी फोन से हिन्द रजब  लगातार  फोन  करती रही । हम समझ सकते हैं कि युद्ध के दौरान लाशों के बीच फंसी हुई एक छोटी सी बच्ची अपनी आखिरी पलों को किस तरह और कितनी दहशत में गुजार रही होगी! वह बार बार कह रही थी कि कोई आ कर उसे  जल्दी बचा ले। वह फोन में लगातार बता रही थी कि कैसे बाकी सब लोग कार के अंदर "सो" रहे है, कैसे वह खून देख कर परेशान हो रही थी और कैसे एक ख़तरनाक टैंक उनकी कार की तरफ तेजी से आ रहा है। चंद मिनट की दूरी पर होते हुए भी पैरा मेडिक्स वाले उसे बचा नहीं पाए। क्योंकि इजरायली सेना से वहां पहुंचने की अनुमति लेने की जटिल प्रक्रिया  और उनकी तरफ से  लगातार की जा रही गोली बारी और फोन का ऑडियो बंद हो जाने से मेडीकल सेवा के कर्मचारी उसे बचा नहीं पाए। कॉल सेंटर की राना सकीह को अंत तक वह कह रही थी कि उसे बहुत डर लग रहा है। इस फिल्म में निर्देशक ने असली ऑडियो और फोन क्लिप्स को दिखाया है ,जिस से ये भी पता चलता है कि जैसे तैसे अंत में एक एम्बुलेंस उस बच्ची तक पहुंचने ही वाली थी, लेकिन उसी वक़्त इसराइली सैनिक फिर से गोलियां दागने लगे।   इस हादसे के कई दिनों के बाद  इजरायली सैनिकों के उस जगह से चले जाने के बाद हिन्द रजब का पूरा परिवार और साथ ही एंबुलेंस सेवा केंद्र के दो कर्मियों की  लाशों को  निकाला गया। कार के ऊपर इतनी गोलियां दागी गई थी जिनको गिनना मुश्किल था। कहा जाता है कि उस समय इजरायली सेना द्वारा और भी बहुत सारी एम्बुलेंस पर भी गोलियों बरसाई गई थी।

 ये एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है और इस में कोई बड़े या कमर्शियल आर्टिस्ट नहीं है। इसके बावजूद भी इस फिल्म को देख कर विश्व भर के लोग हिन्द रजब को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और युद्ध के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।बस लोकतांत्रिक देश भारत में हिन्द रजब के बारे में जानने पर प्रतिबंध है। क्योंकि हिन्द रजब हमारे देश और इजरायल की गहरी दोस्ती में दरार डाल सकती है। छ साल की उस बच्ची में इतनी  ताकत है कि हम लोग डर गए! अब सवाल उठता है कि इजरायल को हिंद रजब का हत्यारा माना जाए या नहीं! अगर माना जाए तो भी सवाल उठेगा और नहीं माना जाए तब तो और भी ज़्यादा  सवाल उठेंगे। अंत में बस इतना ही कहना है कि विश्व भर में, हर देश में, अलग अलग तरीके से अलग अलग हिंद रजबों की कहानियां एपस्टीन फाइल की तरह ही इधर उधर दफऩ हो कर रह जाती हैं... अनगिनत कहानियां! गाजा में मुस्लिम की, बांग्लादेश में हिंदुओं की, नाइजीरिया में क्रिश्चियन की, सूडान, म्यांमार,रशिया और यूक्रेन की.... जाने कितने बार युद्ध के नाम पर सिफऱ् इंसानियत को ही मारा जाता है। बार बार लगातार!कब तक सच पर पर्दा डालने और प्रतिबंध लगाने की कोशिश चलती रहेगी? शायद बहुतों के लिए इसलिए युद्ध करना ज़रूरी हो जाता है कि युद्ध हजारों फाइलों को और उन फ़ाइलों में भरे हजारों गुनाहों को भुलाने में मदद करता है! शायद!


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