विचार / लेख

चवन्नी-अठन्नी के पुरस्कार-उत्सव, और साहित्यकार की रचनात्मकता
20-Apr-2026 10:18 PM
चवन्नी-अठन्नी के पुरस्कार-उत्सव, और साहित्यकार  की रचनात्मकता

-अशोक पाांडे

हमारे समय की जीनियस लेखिका हेलेन ड्यूइट ने तीन दिन पहले करीब पौने दो करोड़ रुपए का प्रतिष्ठित इनाम विंडहैम-कैम्पबेल प्राइज़ महज़ इसलिए ठुकरा दिया कि उसके एवज में उन्हें कुछ लिट्-फेस्ट्स में हिस्सा लेना था, कुछ इंटरव्यू देने थे और कुछ वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डालने थे।

लेखक को इन्फ़्लूएन्सर में तब्दील कर बेचने की जुगत में लगे रहने वाले इनाम-सम्मान के इस बाजारी मकडज़ाल से हेलेन का सामना पहले भी हो चुका था। साल 2000 में छपे उनके बेहतरीन उपन्यास की एक लाख से ऊपर प्रतियाँ बिकीं लेकिन उसके बाद सोलह बरसों तक किताब आउट ऑफ़ प्रिंट रही। इसका परोक्ष कारण उनका प्रकाशक था जिसने किताब छापने में लापरवाही दिखाई थी और टाइपिंग की बहुत सारी गलतियाँ की थीं। पैसे के लेनदेन को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था – जब हेलेन को यकीन था कि प्रकाशक ने उन्हें 75,000 डॉलर देने हैं, प्रकाशक ने उलटे उन पर 80,000 डॉलर की देनदारी निकाल दी।

बहरहाल उपन्यास 2016 में दोबारा छपा और उसे हाथों हाथ लिया गया। मशहूर आलोचक क्रिस्चियन लोरेन्ज़ेन ने अपने एक लेख में इसे शताब्दी का महानतम उपन्यास बताया। हेलेन के कुल चार उपन्यास छपे हैं और वे भीड़भाड़ से दूर रहना पसंद करती हैं।

इनाम ठुकराने के बाद उन्होंने मीडिया को बताया, ‘मेरी एक दोस्त ने मुझसे कहा की अगर तुम किसी तरह पांच मिनट के लिए एक टीवी चैनल के मॉर्निंग शो में मौक़ा हासिल कर पाओ तो हर कोई तुम्हारी किताब खरीद लेगा। तब मैंने अपनी कल्पना में खुद को देखा कि मैं, जिसे कैमरे से इस कदर झेंप लगती है, स्टूडियो में तेज रोशनी के सामने गाढ़ा मेकप पोते, सोफे पर बैठी हुई किसी अपढ़ एंकर को यह बताने की कोशिश कर रही हूँ कि किस तरह मैंने एक महान फ्रांसीसी आलोचक की प्रेरणा से अपना पहला उपन्यास लिखा था। मुझे यह बहुत हास्यास्पद और भोंडा लगा।’

 

जिस इनाम को हेलेन ने ठुकराया है, दुनिया का हर लेखक उसका सपना देखता है।

हेलेन ड्यूइट मानती हैं कि जब तक आपने उन गिनी-चुनी किताबों में से कोई नहीं लिखी है जिन्हें खऱीदते ही बेस्टसेलर मान लिया जाता है और जिनके साथ उसी अनुपात में बड़ा मार्केटिंग बजट भी आता है, तब तक लिखने वाले के लिए हालात काफ़ी मुश्किल हैं। ऐसे में कुछ खास मौके आपके करियर को बना सकते हैं मसलन आपको कोई पुरस्कार मिल जाए, आप टीवी पर दिखाई देने लगें, या धूप सेंकते हुए कोई फिल्म अभिनेता आपके आपके उपन्यास को पढऩे का नाटक करता हुआ इन्स्टाग्राम पर दिखाई दे या कोई बड़ा इन्फ़्लूएन्सर आपकी किताब को अपनी पसंदीदा किताबों की लिस्ट में जगह दे दे। इन वजहों से साहित्यिक फिक्शन आजकल फैशन में तो है लेकिन असलियत में आपकी किताब कितना बिकेगी और एक लेखक के बतौर आपका करियर कहाँ जाएगा, यह सब बेहद अनिश्चित है।’

हेलेन ने अपनी एक हालिया ब्लॉग पोस्ट में लिखा- ‘हम कितने सारे बड़े लेखकों के बारे में सोच सकते हैं, जिन्हें हमने जीवन भर सराहा है। मिसाल के तौर पर एमिली डिकिन्सन, मार्सेल प्रूस्त, फ्रान्ज़ काफ्क़ा, सैमुएल बैकेट, फर्नान्दो पेसोआ, हार्पर ली, एलीना फेरान्ते वगैरह। इन सब ने भी वही करना था जो मैंने किया। ये लोग लिट् फेस्ट्स में जाकर लेखक नहीं बने थे। ये लोग अपनी आत्मा से लेखक थे। और बड़े मनुष्य भी।’

कल सुबह की ताज़ा खबर यह बताई जा रही है कि एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने हेलेन ड्यूइट को पौने दो करोड़ रुपए की ग्रान्ट देने की पेशकश की है, जिसके साथ किसी तरह की कोई शर्त नहीं जुड़ी होगी।

इसे मेरी बैलबुद्धि समझा जा सकता है कि हर उपलब्ध मौके पर चवन्नी-अठन्नी के पुरस्कारों-उत्सवों और पर अपनी रचनात्मकता की धार को पैना करने वाले मेरी अपनी भाषा के अधिकतर लेखक मुझे पसंद नहीं आते हैं। न उनका लिखा।

नए लिखने वाले अगर असल लेखक बनना चाहते हों तो हेलेन ड्यूइट उनके लिए मिसाल हैं। रील-व्लॉगिंग के इस अभागे युग में भी अपने समय के सर्वश्रेष्ठ लेखकों को पढऩा पहले जितना ही सुखकर है। उनके बारे में जानना तो और भी ज्यादा। यकीन मानिए।


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