विचार / लेख
-अशोक पांडे
सोनिता अलीज़ादे की पैदाइश 1996 की है. यही वो साल था जब उसके मुल्क अफगानिस्तान में कट्टरपंथी तालिबान पहली दफ़ा सत्ता में आए थे. औरतों की पढ़ाई-लिखाई और आज़ादी के सख्त विरोधी तालिबानी शासकों ने पांच साल राज किया और अपने लोगों को हज़ार बरस पुराने संसार में धकेल दिया. 2021 से वे दोबारा सत्ता में हैं. औरतों के अलावा उनके निशाने पर तमाम तरह की कलाएं और संगीत भी रहते आए हैं. संगीतकारों के साजों को कुल्हाड़ियों से काटे जाने, सड़कों पर जलाए जाने, गाने-बजाने वालों को चौराहों पर क़त्ल किए जाने जैसी जघन्य छवियों से संसार भर का मीडिया अटा हुआ है.
लेकिन यह कहानी तालिबान की नहीं सोनिता अलीज़ादे की है. दस साल की उम्र में उसके माँ-बाप ने उसकी शादी कर देने का विचार तो किया मगर ढंग का दूल्हा न मिल पाने की वजह से मामला टल गया.
अफगानिस्तान के खराब हालात देखते हुए उसका परिवार भाग कर ईरान चला गया, जहां बच्चियों को सांस लेने भर लायक आज़ादी मुहैया थी. गरीब और शरणार्थी होने की वजह से छोटी सी सोनिता को घरों में झाड़ू-पोंछे का काम करना पड़ता था. कभी भी जबरन शादी करा दिए जाने का ख़तरा उसके ऊपर हर समय मंडराया करता.
लेकिन दुनिया भर की किशोरियों की तरह उसके भीतर भी तमाम सपने पलते थे जिनमें अपनी पसंद का जीवन जी सकना भी शामिल था. उसने स्कूल में दाखिला लिया और लिखना-पढ़ना सीखा. कराटे की क्लासेज़ में भी गई. संगीत में भी उसकी गहरी रुचि थी जिसके चलते उसने एकाध लोकप्रिय रैप-गायकों का संगीत खोज लिया. विधा उसे भा गई. उसने खुद रैप लिखना और गाना शुरू कर दिया. स्कूल की सहपाठिनें उसकी पहली श्रोता और फैन्स बनीं. वह बारह-तेरह बरस की थी और सहेलियां उसे माइकेल जैक्सन कह कर पुकारा करतीं.
उसे ईरान में छोड़कर माँ वापस अफगानिस्तान चली गई थीं क्योंकि उन्हें अपने बेटे के लिए बहू खोजनी थी. उन्हीं दिनों सोनिता ने अमेरिका द्वारा प्रायोजित एक गायन प्रतियोगिता जीती. इनाम में मिले नब्बे हज़ार रुपये उसने अपनी माँ को भेज दिए जिससे वह बेइंतहा प्यार करती थी.
कुछ ही दिन बाद माँ ने सोनिता को वापस अफगानिस्तान आने को कहा. उन्हें सोनिता के भाई के लिए बहू मिल तो गई थी लेकिन उसे हासिल करने के लिए करीब आठ लाख रुपये चाहिए थे. माँ ने सबसे आसान रास्ता खोजा और सोनिता के लिए एक दूल्हा खोज निकाला जो उसके एवज में इतनी रकम चुकाने को तैयार था. इससे दोनों बच्चे ठिकाने से लग जाते.
सोनिता कुल पंद्रह बरस की थी. तब तक उसकी कहानी ईरान के कुछ प्रबुद्ध लोगों की निगाह में आ चुकी थी. एक ईरानी फिल्म निर्देशक उस पर डॉक्यूमेंट्री भी बना रहा था. इस निर्देशक ने सोनिता की माँ को फौरी तौर पर दो लाख की रकम भेजी और छः माह की मोहलत माँगी ताकि वह अपनी फिल्म पूरी कर सके.
ये छः महीने सोनिता की ज़िंदगी बदल देने वाले थे.
दो साल बाद वह लन्दन में हो रही महिलाओं के एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन में मंच से कह रही थी, ““मैं साँस नहीं ले पा रही थी, बोल नहीं पा रही थी. “मेरा दिल टूट था. किसी ऐसे व्यक्ति से शादी की कल्पना करना बहुत मुश्किल था जिसे मैं जानती ही नहीं थी."
"मेरे मुल्क में अच्छी लड़की को हमेशा चुप रहना चाहिए. अपने भविष्य के बारे में बात नहीं करनी चाहिए. और अपने परिवार की बात माननी चाहिए. वे जिससे कहें उससे शादी कर लेनी चाहिए. एक अच्छी लड़की किसी पालतू कुत्ते की तरह होती है, जिससे लोग खेल सकते हैं. लेकिन मैं एक गायिका थी और मुझे एक चमकदार भविष्य चाहिए था.”
छः महीने की उस मोहलत के दौरान उसने पहला काम यह किया कि अपने देश में होने वाली दुल्हनों की बिक्री की शर्मनाक परम्परा को निशाना बना कर एक रैप लिख कर गाया. डॉक्यूमेंट्री बना रहे निर्देशक ने ही उसका वीडियो बनाया और उसे रिलीज कर दिया. वीडियो रातों-रात दुनिया भर की सुर्ख़ियों में आ गया. खुद अफगानिस्तान की महिलाओं के बीच उसे ज़बरदस्त लोकप्रियता हासिल हुई.
रैप आम तौर पर बहुत लाउड होते हैं लेकिन सोनिता का रैप यूं शुरू होता है:
“मैं धीरे से फुसफुसाकर कह रही हूँ, ताकि कोई यह न सुन ले कि मैं लड़कियों को बेचने की बात कर रही हूँ. आपने मेरी आवाज़ नहीं सुननी चाहिए, क्योंकि यह मेरे मजहब के ख़िलाफ़ होगा. औरतों को ख़ामोश रहना चाहिए. यही हमारी परंपरा है.”
गीत के बोल और सोनिता की गायकी दोनों इतने सच्चे थे कि कितने ही लोगों ने उसकी सहायता करने का प्रस्ताव दिया. एक संस्था के प्रयासों से सोनिता को अमेरिका में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति हासिल हुई. 2015 में बीबीसी ने उसे साल की सबसे महत्वपूर्ण स्त्रियों की लिस्ट में जगह दी.
2023 में उसने हडसन, न्यूयार्क के बार्ड कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल कर ली है. उसी बरस उसे प्रतिष्ठित रोड्स फेलोशिप से भी नवाज़ा गया.
एक्टिविस्ट की तर्ज़ पर सोनिता अपने आप को रैप्टिविस्ट कहती हैं और फिलहाल अपने मुल्क में लाखों युवा स्त्रियों की नायिका हैं. बीते दस सालों से अमेरिका और कनाडा में रहकर वे लगातार बाल-विवाह और बच्चियों को बेचे जाने के खिलाफ एक मजबूत और मुखर आवाज़ बनी हुई हैं.
एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उन्हें अपनी माँ पर कभी गुस्सा तो नहीं आया, उन्होंने कहा, “मेरी माँ की शादी तेरह साल में हो गई थी. सबने उन्हें बताया था कि वे एक औरत हैं जिसकी संसार में कोई कीमत नहीं होती. उनके पास अपने परिवार की बात मानने के सिवा कोई चारा था भी नहीं. जब मैंने संगीत को चुना तो मेरा फैसला उन्हें एक डरावना सपना लगता था लेकिन आज वे मेरी सबसे बड़ी फैन हैं! कुछ बदला जाना है तो वह हमारे समाज ने तय करना होगा. उसे पढ़ाये-लिखाये जाने की सख्त ज़रूरत है.”
दर्शकों की भीड़ के सामने अंग्रेज़ी में यह इंटरव्यू देते समय वह कुल सोलह-साढ़े सोलह साल की थी. हैरान होइए कि उसने नौ साल की उम्र में लिखना-पढ़ना सीखा था. हैरान होइए कि हमारे आसपास दिखाई देने वाले इस उम्र के ज़्यादातर रील-प्रेमी बच्चे इस बात पर जान दे देने पर आमादा हैं कि पापा बाइक या आईफोन खरीदने के पैसे नहीं दे रहे.


