विचार / लेख

इस सबका मतलब क्या हुआ?
22-May-2024 4:20 PM
इस सबका मतलब क्या हुआ?

संजय श्रमण

संत कबीर के बारे में एक कहानी है ‘काशी के ब्राह्मणों ने पंगत सजाई लेकिन शूद्र कबीर को वे अपने साथ नहीं बैठने देना चाहते थे, उन्होंने तरकीब निकाली कि जो भी व्यक्ति वेद ऋचाओं का पाठ कर सकता है वो आये और साथ बैठकर भोजन करे।

धीरे धीरे सभी ब्राह्मण एक या दो ऋचाएं पढक़र पंगत में बैठ गये, कबीर की बारी आई ब्राह्मणों को पता था कि ये शूद्र कबीर वेद नहीं पढ़ सकेगा और बाहर हो जाएगा।

तभी कबीर पास में खड़ी भैंस से कहते हैं कि वेद पढो, और वह भैंस वेद ऋचाएं दोहराने लगती है। इस ‘चमत्कार’ को देखकर सभी ब्राह्मण कबीर से माफ़ी मांगते हैं।’

अब इसका क्या मतलब हुआ? ब्राह्मणों ने माफी मांग ली लेकिन उसके बाद ब्राह्मण क्या करते रहे हैं? इससे भी बड़ा सवाल ये कि कबीर के अपने लोग क्या कर रहे हैं?

कबीर चाहते तो अपने मुंह से वैदिक ऋचाएं दोहरा सकते थे लेकिन उन्होंने सबक सिखाने के लिए वैदिक ऋचाएं भैंस से कहलवाई (जैसा कहानी कहती है)।

लेकिन इस कहानी के सदियों बाद भी कबीर को मानने वाले कहाँ अटके हैं? ब्राह्मणवादियों ने भी एक बार माफी मांगकर फिर से गोरखधंधा शुरू कर दिया। वे फिर फिर ऐसा करते हैं। क्यों करते हैं? क्योंकि दलित शूद्र फिर फिर वेदों और मंदिरों के भगवानों के पास जाकर गिडगिडाते हैं।

इस सबका मतलब क्या हुआ?

पोंगा पंडित कभी आपको आजाद नहीं होने देंगे, आप ही रुके हुए हैं। जब तक भारत के शूद्र और दलित इस धर्म में रुके हुए हैं उनका शोषण और अपमान होगा ही, ब्राह्मण क्षत्रिय उनसे माफी भी मांगते रहेंगे और उन्हें लूटते सताते भी रहेंगे। कबीर जैसे लोग भी इन्हें नहीं सुधार सके। अब एक ही उपाय है, जैसा कि अंबेडकर कहते हैं कि ‘जो धर्म तुम्हें लात मारता है उसे तुम लात मार दो और आगे बढ़ जाओ, बुद्ध तुम्हारे लिये उपलब्ध हैं’


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