विचार / लेख
नितिन सिंघवी
हर निर्णय लेते वक्त हम ध्यान रखते हैं, जैव विविधता ज्यादा से ज्यादा बर्बाद हो।
प्रतिवर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, जैव विविधता के मुद्दों के बारे में समझ और जागरूक का बढ़ाने के लिए आयोजित किया जाता है। खेद! यह सिर्फ आयोजन तक सीमित रहता है। 20 वर्ष पहले ही हम समझ गए थे कि जैव विविधता खतरे में पड़ गई है। तब पहली बार जैव विविधता पर कन्वेंशन हुआ, जिसे कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टी (कॉप) कहा गया, 15 ऐसे सम्मलेन हो चुके हैं।
कॉप-15, कुनमिंग (चीन)-मोंटेरियल(कनाडा) में 2022 में आयोजित हुआ। उसमें लिया गया निर्णय, राष्ट्रों को 2030 तक प्रकृति के नुकसान को रोकने और उलटने के लिए प्रतिबद्ध करता है। कुनमिंग में निर्णय लिया गया था - इकोलॉजिकल सिविलाइजेशन: बिल्डिंग ए शेयरड फ्यूचर फॉर ऑल लाइफ ऑन अर्थ। वहां चर्चा हुई कि हर निर्णय लेते वक्त हम जैव विविधता का ध्यान रखेंगे। परंतु उसके बाद हर विकास कार्य में निर्णय लेते वक्त या खदान खोलते वक्त हम यह भूल जाते हैं कि इस अंतरराष्ट्रीय संधि पर हमने दस्तखत किया है। सच्चाई यह है कि हर निर्णय में जैव विविधता को बर्बाद करने का निर्णय हम औद्योगिक युग चालू होने से ही ले रहे हैं।
क्या है जैव विविधता
पृथ्वी की सतह से 500 मीटर नीचे तथा 11 किलोमीटर ऊपर मौजूद अरबों प्रकार के जीवन की विविधता को बताने के लिए जैव विविधता शब्द का उपयोग 1968 से किया जा रहा है। पृथ्वी पर जैव विविधता से अधिक पेचीदा और कुछ नहीं है। अमूमन सभी चीजें, मानव और दूसरे जीवों को जैव विविधता निशुल्क ही प्रदाय करती है। जैसे पेड़, ये भी जीव है, इनसे दूसरे सभी जीव ऑक्सीजन पाते हैं, ये मिट्टी का स्तर बनाए रखते है, मृदा अपरदन (साइल इरोजन) रोकते है, जलवायु और जल नियंत्रित करते है, इससे गिरने वाली पत्तियों, फलों, बीजों को खाने से शाकाहारी स्तनपाई और कई जीव-जंतु, मांसाहारी जानवरों के खाने की खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) को चलाते हैं। पेड़ों के मरने के बाद कई प्रकार के कीट-पतंगे, फंगी उस पर जिंदा रहते हैं, फंगी का नेटवर्क पूरे जंगल में पेड़ों की रक्षा करता है। पेड़ों और वनों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड को सोख कर जलवायु नियंत्रित करते हैं। जैव विविधता (पेड़ों) के इन फायदों को छोटे से लेख में लिपिबद्ध नहीं किया जा सकता।
फायदे का एक और उदाहरण
घास-स्थली और वन-स्थली में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स), इन्हें ‘ओल्ड फ्रेंड’ के नाम से जाना जाता है। ये मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करते हैं, अन्यथा प्रतिरक्षा प्रणाली का कुछ हिस्सा स्वयं हम पर हमला कर सकता है। ये रोगजनकों से हमारी रक्षा करते हैं और उसका रिकॉर्ड रखते हैं। परंतु शहरी क्षेत्रों में, विशेष रूप से बरसात में, जब उगी घास में जैव विविधता की भरमार रहती है और खरबों सूक्ष्मजीव, कई कीट-पतंगे अपना जीवन काल घास-स्थली में पूरा करते पाए जाते हैं, तब सफाई के नाम से हम घास को कटवा देते है। शहरी क्षेत्रों में जैव विविधता की कमी हमें बीमार रखेगी, इसे पुन: स्थापित करने के लिए शहरों में हमें कई अर्बन फारेस्ट चाहिए।
कैसे करते है बर्बाद : एक छोटा उदाहरण
जैवविविधता को बर्बाद करने का बिलकुल छोटा उदाहरण लें तो अभी हमारे देश में तालाबों के सौंदरीकरण का काम गांव-गांव तक चालू हो गया है, जिसके तहत सबसे पहले तालाब के मेड़ पर, पानी की तरफ, कांक्रीट की टो वाल बनाई जाती है, फिर मेड़ के ऊपर कांक्रीट या पेवर का पाथ वे। पानी का संपर्क मिट्टी से खत्म होने से क्लीन वाटर सिस्टम खत्म हो जाता है, तलाब की हत्या हो जाती है; तालाब डेड वाटर बॉडी बन जाता है, नतीजा वहां की जैव विविधता समाप्त हो जाती है। आप विचार कर के सोच लीजिए इस प्रकार, विकास से सम्बंधित हर निर्णय में हम जैव विविधता बर्बाद करने का निर्णय लेते हैं।
क्या करें
विश्व जैव विविधता संकट और जलवायु संकट से जूझ रहा है। दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। किसी एक संकट से निकलने पर भी मानव और अन्य जीव जंतुओं का विनाश निश्चित है अत: हमें दोनों संकटों से बाहर निकलना होगा, जो कि सिर्फ 22 मई को बात करने से नहीं होगा। अज्ञान जैव विविधता का एक नंबर का दुश्मन है, इसलिए वर्ष भर इसे समझिये और बचाइए। एक बात और जैव विविधता मानव के बिना रह सकती है परन्तु मानव उसके बिना जिन्दा नहीं रह सकता।


