विचार / लेख

मालदीव और भारत के दिन ब दिन ठंडे होते रिश्ते
01-May-2024 3:44 PM
मालदीव और भारत के दिन ब दिन ठंडे होते रिश्ते

 डॉ. आर.के. पालीवाल

जैसे-जैसे हमारे देश में सरकार का धार्मिक स्वरूप सामने आ रहा है वैसे वैसे कुछ इस्लाम बहुल देशों में भारत सरकार के प्रति मित्रता के भाव कम होते जा रहे हैं। ताजा मामला छोटे से देश मालदीव का है जहां पिछले एक साल से भारत विरोधी माहौल मुखर होता जा रहा है जिसकी परिणति मालदीव द्वारा अपनी जमीन से भारतीय सैनिकों की वापसी की चेतावनी के रुप में भी सामने आ चुकी है। कुछ समय पहले तक मालदीव से भारत के संबंध सामान्य थे। पर्यटन के क्षेत्र मे अच्छी कमाई करने वाले मालदीव की अर्थ व्यवस्था में भारतीय पर्यटकों का भी अच्छा खासा योगदान रहता है। दोनों देशों के रिश्तों में तनातनी के मद्देनजर भारतीय पर्यटकों का मालदीव घूमना भी अब पहले जैसा सहज नहीं रहेगा क्योंकि भारत विरोधी माहौल मे अधिसंख्य भारतीय पर्यटक सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे।

मालदीव में जिस तरह से वहां की सरकार भारत विरोधी वातावरण निर्मित कर रही है उसके जवाब में हमारे लिए भी यह जरूरी हो जाता है कि हम भारतीय भी पर्यटन के सहारे चल रही मालदीव की अर्थ व्यवस्था को झटका देने के लिए स्थिति सामान्य होने तक मालदीव में भ्रमण बंद कर दें। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार अपनी तरफ से द्विपक्षीय रिश्तों की बेहतरी के लिए काम करती है लेकिन नागरिकों का भी यह राष्ट्रीय कर्तव्य है कि वे भी ऐसा हर संभव कदम उठाएं जो राष्ट्र हित में है। मालदीव इतना छोटा देश है कि वह अपने बूते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में खड़ा नहीं हो सकता।इसी वजह से भारत से दूर होकर वह चीन से नजदीकियां बढ़ा रहा है। विगत में पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल में भी इसी तरह के भारत विरोधी और चीन समर्थक झुकाव सामने आए हैं। इस लिहाज से चीनी सामान की खरीदारी बंद करना उससे भी जरूरी है। महात्मा गांधी ने खादी से ही ब्रिटिश के कपड़ा उद्योग की लूट को बंद कर उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ी थी। हमे यह भी ध्यान रखना है कि ऐसा करते समय हमे सामने वाले के लिए दुर्भावना या दुश्मनी का भाव नहीं रखना है केवल अपने हित साधन हेतु इस तरह के निर्णय करने हैं ताकि परिस्थितियां अनुकूल होने पर फिर से पहले जैसा सहज वातावरण और आत्मीय संबंध स्थापित करने के लिए कोई दिक्कत न हो।

मालदीव आबादी के हिसाब से भले ही बहुत छोटा देश है लेकिन अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण उसका सामरिक महत्व काफी है। यही कारण है कि भारत को दबाव में लाने के लिए चीन की बाज नजऱ मालदीव पर उसी तरह है जैसे वह पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए विगत काफी समय से रखता रहा है। पिछले साल भारत का विरोध और चीन का समर्थन करने वाले पीपल्स नेशनल कांग्रेस के नेता मुहम्मद मुइज्जू ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर भारत के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा कर दी थी। गनीमत यह थी कि मालदीव की संसद में उनकी विरोधी पार्टी का बहुमत होने से राष्ट्रपति की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी। हाल ही में मालदीव में हुए संसदीय चुनावों में भी मुहम्मद मुइज्जु की पार्टी को अच्छा खासा बहुमत मिल गया है। निकट भविष्य में मालदीव की सरकार के चीन की तरफ झुकाव और भारत से और ज्यादा दूरी पर जाने की प्रबल संभावना है। हमारे देश के लिए इस संकट के समाधान के लिए वेट एंड वाच का ही विकल्प बचा है। ज्यादा दारोमदार मालदीव के अगले कदम से ही तय होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि मालदीव की सरकार कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी जिससे भारत के साथ सर्द हुए मालदीव के रिश्ते और ठंडे होकर बर्फ की तरह न जम जाएं जिन्हें सामान्य करने में उच्च तापमान की जरूरत महसूस हो।


अन्य पोस्ट