सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 9 जुलाई। निजी स्कूलों की मनमानी के विरोध में अभिभावकों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को अभिभावक संघ निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे।
कोरोना काल में छात्रों की पढ़ाई पर व्यापक असर पड़ा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए छात्रों को स्कूल जाने पर सरकार ने रोक लगा दी है। हालांकि छात्रों की पढ़ाई प्रभवित न हो, इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा के नये सत्र की शुरुवात हो चुकी है। इधर कोरोना संक्रमण के संभावित तीसरी लहर के खतरे की वजह से छात्र घरों में रहकर ऑनलाइन के माध्यम से स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच अंबिकापुर में निजी स्कूलों की मनमानी कम नहीं हो रही है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल शिक्षा के नये सत्र के शुरुआत होते ही निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर बढ़ गई है। निजी स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस में पांच फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। ट्यूशन फीस के अलावा निजी स्कूल अन्य मदों की फीस भी वसूल कर रहे हंै, जबकि छात्र कोरोना संक्रमण की वजह से घरों पर रह कर ऑनलाइन के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हंै।
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी की वजह से बच्चों की पढ़ाई के खर्च को लेकर उनके जब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। अन्य मदों की फीस जमा करने के अलावा बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई का अतिरिक्त खर्च भी अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। वहीं अभिभावकों का आरोप है कि फीस जमा नहीं करने पर निजी स्कूल प्रबंधन छात्रों का रिजल्ट तक नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा अभिभावकों का कहना है कि हाई कोर्ट ने निर्देश जारी किया था कि कोरोना काल के दौरान कोई भी निजी स्कूल फीस नहीं बढ़ाएंगे औऱ न ही ट्यूशन फीस के अलावा अन्य मदों का अतिरिक्त फीस वसूल करेंगे। बावजूद इसके अंबिकापुर में निजी स्कूल के संचालक हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए अतिरिक्त फीस की वसूली कर रहे हंै। इसके विरोध में अभिभावक संघ सरगुजा द्वारा गांधी चौक पर एक दिवसीय धरना प्रदेश का आयोजन किया गया। अभिभावक संघ का कहना है कि प्रशासन यदि निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लगाता है और उनकी मांगें नहीं पूरी होती है तो आने वाले दिनों में वे स्कूलों के सामने धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।


