सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,15 फरवरी। सरगुजा जिले के खेल गौरव, सरगुजा के द्रोणाचार्य राष्ट्रीय बास्केटबॉल कोच राजेश प्रताप सिंह का चयन आल इंडिया सिविल सर्विस बास्केटबॉल प्रतियोगिता दिल्ली के लिए किया गया है। यह प्रतियोगिता 17 से 23 फरवरी तक दिल्ली में आयोजित की जाएगी। विशेष बात यह है कि लगातार पाँच वर्षों से उनका चयन इस टीम में हो रहा है, जो उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
ज्ञात हो कि राष्ट्रीय कोच राजेश प्रताप सिंह विगत कई वर्षों से सरगुजा जिले में बास्केटबॉल खेल को सवांरते में तन - मन से सेवा देते आ रहे हैं और साथ ही सहित विभिन्न खेलों के विकास के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में जिले के अनेक खिलाडिय़ों ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। सबसे बड़े राष्ट्रीय खेल मंच ‘खेलों इंडिया’ में सरगुजा जिला के कई खिलाड़ी खेल प्रत्येक वर्ष भाग ले रहे हैं और स्वयं भी विगत पाँच वर्षों से लगातार ‘खेलो इंडिया’ में कोच /मैनेजर के रुप सम्मिलित हो रहें हैं, सबसे बड़ी बात कि खिलाडिय़ों को नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभावान और आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी भी खेल के क्षेत्र में आगे बढऩे का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
लगातार पाँच वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में चयनित होना उनकी प्रशिक्षण क्षमता, अनुभव और खिलाडिय़ों के प्रति समर्पित दृष्टिकोण का प्रमाण है। उनके मार्गदर्शन से जिले के युवा खिलाडिय़ों में आत्मविश्वास बढ़ा है और बास्केटबॉल खेल के प्रति आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। आज सरगुजा के युवा नियमित अभ्यास और अनुशासित प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं।
सरगुजा जिले में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बास्केटबॉल के साथ-साथ अन्य खेलों को भी संगठित रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।
सशिमं में मना मातृ-पितृ दिवस
महासमुंद,15 फरवरी। बागबाहरा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में कल मातृ-पितृ दिवस एवं शिशु नगरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने भगवान गणेश के पदचिह्नों पर चलते हुए अपने माता-पिता का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। मुख्य अतिथि तोमेश्वरी साहू जिला शिशु वाटिका प्रमुख ने कहा कि बाल्यकाल में मिले संस्कार ही व्यक्ति के भविष्य की दिशा तय करते हैं।
उन्होंने विद्यालय की शिक्षा पद्धति की सराहना करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण और भारतीय संस्कृति का बोध ही वास्तविक शिक्षा है। अध्यक्षता ममता जगत ने की। जबकि उमा यादव एवं जानकी चंद्राकर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।


