सरगुजा
आंतरिक शिकायत समिति का गठन नहीं होने पर 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 1 फरवरी। महिलाओं को सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडऩ (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 पोश एक्ट (POSH Act) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गुरुवार को अंबिकापुर में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला पंचायत के सभा कक्ष में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय एवं आंतरिक शिकायत समितियों के पदाधिकारी तथा संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य स्तरीय संसाधन केंद्र, महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के संचालक एस. के. चौबे ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि पोश अधिनियम के तहत सभी संस्थानों में प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य है। उन्होंने शी-बॉक्स पोर्टल पर सभी संस्थानों की ऑनबोर्डिंग एवं आंतरिक शिकायत समिति की प्रविष्टि सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दिया, जिससे महिलाओं की शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष और सुरक्षित निस्तारण हो सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी सरगुजा जे. आर. प्रधान ने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा का मजबूत आधार है। पोश अधिनियम न केवल शिकायत निवारण का मंच प्रदान करता है, बल्कि संस्थानों में संवेदनशीलता और जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी विभागों से अधिनियम के प्रावधानों का नियमित पालन एवं कर्मचारियों को जागरूक करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर सर्वत नकवी ने अधिनियम की प्रमुख धाराओं की व्यावहारिक जानकारी देते हुए बताया कि पोश अधिनियम की धारा-4 के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक शासकीय एवं अशासकीय संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं होने की स्थिति में कार्यालय प्रमुख पर 50,000 रुपए तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। उन्होंने समिति की संरचना, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय-सीमा, गोपनीयता एवं पीडि़ता के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र में राज्य स्तरीय संसाधन केंद्र रायपुर के सहायक संचालक अतुल दांडेकर ने शी-बॉक्स पोर्टल के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए लाइव डेमो के माध्यम से पंजीकरण, शिकायत अपलोड, प्रगति ट्रैकिंग एवं रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई।
उन्होंने बताया कि यह पोर्टल शिकायत निस्तारण को समयबद्ध, पारदर्शी और मॉनिटर योग्य बनाता है।
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ श्रम विभाग, आदिवासी विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला पंचायत, शिक्षा विभाग, नगर पालिका निगम एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा संभाग के सभी जिलों की आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समितियों के अध्यक्ष व सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए।


