सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 4 मई। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर और सरगुजा जिले के सरहदी जंगलों में बीते कई वर्षों से अतिक्रमण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वन विकास निगम के लैंगा परिक्षेत्र में सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर खेत बनाए जा रहे हैं, जिससे हजारों पेड़-पौधे नष्ट हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, सडक़ किनारे से लेकर जंगल के भीतर तक जेसीबी मशीनों के जरिए जमीन समतल कर कब्जा किया जा रहा है। यहां तक कि वर्षों पुराने प्राकृतिक नालों को भी बाधित कर दिया गया है, जिससे वन्यजीवों के जल स्रोत खत्म होने की कगार पर हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। कुछ मामलों में तो अधिकारियों पर कब्जाधारियों और भू-माफियाओं से मिलीभगत के गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
लैंगा परिक्षेत्र के आसपास स्थित दुर्गापुर, सायरबहर, गडरी, धवपुर, सूजीडांड, गवहानी, पथरी, कौशलपुर, राजापुर, पोतका, नावापाराखुर्द, महंगई, खूंटियां, निम्हा, मूटकी, दमउकुड, गेतरा और खेड़हिपाटी सहित कई गांवों के जंगलों में खुलेआम अतिक्रमण जारी है। ग्रामीणों के अनुसार, जेसीबी मशीनों से बड़े-बड़े खेत तैयार कर हर साल फसल ली जा रही है। ग्रामीणों ने वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा और कलेक्टर सूरजपुर से मामले में हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि बची हुई वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सके। वहीं, वन विकास निगम के डीएम आर.आर. पैकरा ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन वे जल्द ही क्षेत्र का निरीक्षण कर अतिक्रमण और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।


