सुकमा
सुकमा में मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में कांग्रेस का धरना-अनशन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सुकमा, 11 जनवरी। रविवार को जिला मुख्यालय सुकमा के बस स्टैंड प्रांगण में कांग्रेस पार्टी द्वारा मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में एकदिवसीय धरना-अनशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
धरना-अनशन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम महात्मा गांधी के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न किया गया।
कार्यक्रम के बाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों से गरीबों के काम करने के अधिकार पर असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य था, जबकि प्रस्तावित बदलावों के बाद यह व्यवस्था कमजोर होगी। आगे कहा-मोदी सरकार देश में गरीबों के काम करने के अधिकार छीन रही है।
हरीश कवासी लखमा ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत पहले तय न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान था और उसमें नियमित बढ़ोतरी होती थी, लेकिन नए बदलावों के बाद मजदूरी निर्धारण को लेकर अनिश्चितता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे मजदूरों की सौदेबाजी की क्षमता प्रभावित होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों से ग्राम पंचायतों की भूमिका सीमित होगी और निर्णय प्रक्रिया केंद्रित हो जाएगी। उनके अनुसार, इससे पंचायतों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था, लेकिन अब राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जा रहा है, जिससे राज्यों के लिए रोजगार उपलब्ध कराना कठिन हो सकता है।
हरीश कवासी लखमा ने यह भी कहा कि मनरेगा पिछले लगभग दो दशकों से ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार का एक माध्यम रहा है और इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है। उन्होंने कैग ऑडिट और विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए मनरेगा को प्रभावी योजना बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी व्यवस्थाओं, जैसे एनएमएमएस ऐप और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली, के कारण कई मजदूरों को समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों से बेरोजगारी बढऩे की आशंका है और पार्टी इसके विरोध में आंदोलन जारी रखेगी।


