सुकमा
सुकमा, 2 जनवरी। सुकमा जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश लखमा ने बस्तर से लौह अयस्क को आंध्रप्रदेश के अनकापल्ली तक ले जाने वाली स्लरी पाइपलाइन परियोजना को लेकर राज्य सरकार और संबंधित कंपनी पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस परियोजना को बस्तर के हितों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हरीश लखमा ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि प्रस्तावित परियोजना के तहत बस्तर क्षेत्र की शबरी नदी से प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में पानी उपयोग किए जाने की योजना है। उनके अनुसार इससे नदी, कृषि और पर्यावरण पर असर पडऩे की आशंका है। उन्होंने दावा किया कि शबरी नदी क्षेत्र की एकमात्र बारहमासी नदी है और इसका उपयोग औद्योगिक परियोजना में किए जाने से स्थानीय आजीविका प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के मत्स्य पालन विभाग द्वारा शबरी नदी में पाई जाने वाली कुछ मछली और झींगा प्रजातियों का उल्लेख करते हुए रेत उत्खनन तक पर रोक की अनुशंसा की गई है। ऐसे में नदी से बड़े पैमाने पर पानी लेने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार आवश्यक है।
रोजग़ार के मुद्दे पर हरीश लखमा ने आरोप लगाया कि परियोजना के माध्यम से आंध्रप्रदेश में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन का दावा किया जा रहा है, जबकि बस्तर क्षेत्र में सीमित रोजगार की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा।
जनसुनवाई को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि परियोजना से प्रभावित सुकमा जिले के स्थान पर जनसुनवाई किरंदुल में आयोजित की गई, जिससे प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासियों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के विपरीत बताया।
हरीश लखमा ने यह भी कहा कि इस परियोजना से भारतीय रेलवे को आर्थिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि लौह अयस्क परिवहन से होने वाली संभावित आय प्रभावित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय में सार्वजनिक हित की बजाय औद्योगिक हितों को प्राथमिकता दी गई है।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने मांग की कि परियोजना से संबंधित जनसुनवाई सुकमा जिले में पुन: आयोजित की जाए और प्रभावित ग्रामसभाओं को विधिवत सूचना देकर उनकी सहमति ली जाए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस पार्टी इस परियोजना का विरोध लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से करेगी।


