राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : ब्लैक में सिलेंडर, पार्षद और विधायक
28-Mar-2026 6:18 PM
राजपथ-जनपथ : ब्लैक में सिलेंडर, पार्षद और विधायक

ब्लैक में सिलेंडर, पार्षद और विधायक

खाड़ी में चल रहे युद्ध के बीच पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की संभावित किल्लत को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार की रात राज्यों के सीएम के साथ वर्चुअल बैठक में जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बैठक में सीएम विष्णु देव साय यहां मंत्रालय से जुड़े थे। इसके बाद राज्य में समीक्षा शुरू हो गई है।

हालांकि, विशेषकर रसोई गैस की किल्लत के कारण कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल हो रहा है। इस बीच राजधानी रायपुर में खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन चल रहा है, जिसमें देशभर से करीब 4 हजार खिलाड़ी पहुंचे हैं।

खिलाडिय़ों के खाने-पीने की व्यवस्था शहर के कई होटलों में की गई है। मैन्यू भी आयोजन समिति के अधिकारी तय कर रहे हैं, जिसमें एक समय चिकन परोसना अनिवार्य रखा गया है। लेकिन होटल समूह गैस की समस्या से जूझ रहे हैं। कई जगह चूल्हे और तंदूर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वहीं, लकड़ी और कोयले के दाम भी दोगुने से अधिक हो गए हैं। चिकन पकाने में ज्यादा समय लग रहा है जिससे होटल संचालकों की लागत बढ़ गई है। इस बड़े आयोजन से अच्छे मुनाफे की उम्मीद लगाए बैठे होटल व्यवसायियों को अब निराशा हाथ लग रही है। इससे परे रायपुर के एक पार्षद, जो होटल व्यवसाय से जुड़े हैं , वो गैस की समस्या को लेकर विधायक के पास पहुंचे। पार्षद ने उन्हें बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता नहीं है, वो खुद ब्लैक में सिलेंडर लेने के लिए मजबूर हैं। विधायक ने तुरंत कालाबाजारी करने वालों कार्रवाई के लिए कहा, तो पार्षद ने टोक दिया। उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई हुई, तो ब्लैक में भी सिलेंडर मिलना बंद हो जाएगा। किसी तरह कार्रवाई के बजाय आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में प्रयास किया जाए, इससे ब्लैक मार्केटिंग रुक जाएगी। मगर कार्रवाई करना आसान है, लेकिन गैस उपलब्ध कराना कठिन हो गया है।

सुपरफूड की बंपर पैदावार फिर भी किसान लाचार

छत्तीसगढ़ के ज्यादातर शहर इन दिनों मुनगा या सहजन की हरियाली से सराबोर है। मंडियों में रोज छोटे बड़े मालवाहकों में हरे-भरे मुनगा पहुंच रहे हैं। 

मगर, बिलासपुर-जिसे सबसे अधिक मुनगा पैदा करने वाला जिला माना जाता है, की तिफरा थोक सब्जी मंडी में रोजाना 20 से 25 टन मुनगा आ रहा है, जबकि स्थानीय खपत मुश्किल से 10 से 15 टन तक ही सीमित है। नतीजा यह कि थोक भाव गिरकर 8 से 10 रुपये किलो रह गया है। शहर की दुकानों में 15 से 20 रुपये किलो में ही बिक पा रहा है। मजबूरी में उन्हें अपनी उपज बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में भेजनी पड़ रही है। रोजाना 20-30 टन मुनगा बाहर जा रहा है, लेकिन वहां भी असली फायदा बिचौलियों की जेब में ही जा रहा है।

मुनगा साधारण फसल नहीं, बल्कि विशुद्ध छत्तीसगढ़ की आहार संस्कृति में शामिल सब्जी है और पोषण का खजाना है। इसे सुपरफूड यूं ही नहीं कहा जाता है। इसके पत्ते, फल, फूल और बीज सब उपयोगी हैं। इसमें दूध से कई गुना ज्यादा कैल्शियम, पालक से ज्यादा आयरन और संतरे से ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। यह इम्यूनिटी बढ़ाने, जोड़ों के दर्द में राहत और ब्लड शुगर नियंत्रित करने में भी मददगार है। इतनी उपयोगी चीज को उगाने वाले किसानों को उनकी मेहनत की कीमत नहीं रही है।

शहरों में मुनगा का उपयोग सीमित है। अगर इसे सरकारी पोषण योजनाओं, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील में शामिल किया जाए, तो स्थानीय स्तर पर ही खपत बढ़ सकती है। अपने यहां कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स की भी भारी कमी है। अगर मुनगा से पाउडर, तेल, सूप या कैप्सूल बनाने के उद्योग स्थानीय स्तर पर लगें, तो यही फसल किसानों के लिए सोना बन सकती है।

एक और बड़ी समस्या विपणन व्यवस्था की है। स्थानीय किसानों के सामने परिवहन लागत उठाना मुश्किल हो जाता है और बाजार तक पहुंच घट जाती है। व्यापारी, ट्रक बुक कर दूसरे राज्यों में माल भेजते हैं, जिसकी लागत का हवाला देकर किसानों को पूरी कीमत नहीं दी जाती। थोक और चिल्हर कीमतों के बीच का बड़ा अंतर भी रहता है। इस चैनल पर किसान और उपभोक्ता दोनों ठगे जाते हैं।

छत्तीसगढ़ में धान के अलावा अनेक तिलहन-दहलन उत्पादों को एमएसपी में शामिल किया जा चुका है। क्या सब्जियों और फलों के लिए भी कोई सुरक्षा तंत्र नहीं होना चाहिए? केंद्र सरकार ने कई साल पहले ई-नाम जैसा प्लेटफॉर्म बनाया था ताकि देश की किसी भी मंडी में सही कीमत पर उत्पाद बेच सकें, पर छत्तीसगढ़ के आम किसान इस सेवा का लाभ कैसे उठाना है, यही नहीं जानता। रेलवे भी किसान एक्सप्रेस ट्रेन चलाती है, पर यह कई महीने में एकाध बार ही चलती है।

बंपर उत्पादन से यह तो तय हो जाता है कि छत्तीसगढ़ की जलवायु मुनगा उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। मगर, सरकार की नीतियां और बाजार की कमियां मुनगा किसानों की जेब नहीं भर रही है।

सलमान-कटरीना की पसंदीदा दुकान

छत्तीसगढ़ के एक सबसे वरिष्ठ न्यूज़ फोटोग्राफर गोकुल सोनी ने फेसबुक पर एक दिलचस्प फोटो पोस्ट करते हुए लिखा है- ऑनलाइन शॉपिंग का ऐसा देसी वजऱ्न आपने कहीं नहीं देखा होगा। यहां DKR Collection में ON LINE Booking भी है।  बस फर्क इतना है कि नेट नहीं, नेटवर्क वाला पड़ोसी चाहिए। Amazon, Flipkart वाले भी सोच में पड़ जाएं। भाई, ये ‘स्टार्टअप’ किस लेवल का जुगाड़ है। कुकरी तालाब गुढिय़ारी के इस शाप में सलमान और कटरीना भी कपड़े खरीदने की सोच रहे हैं।


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