राजनांदगांव

संपत्ति कर वृद्धि पर जनता के दबाव के आगे झुका सत्तापक्ष-संतोष
23-Apr-2026 7:15 PM
संपत्ति कर वृद्धि पर जनता के दबाव  के आगे झुका सत्तापक्ष-संतोष

कांग्रेस के समर्थन और जनआक्रोश के बाद महापौर ने लिया फैसला वापस, 10 से 20 प्रतिशत वृद्धि को बताया जनता की जीत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव, 23 अप्रैल। नगर निगम में संपत्ति कर वृद्धि को लेकर जारी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता के भारी विरोध, कांग्रेस के संघर्ष और व्यापारी वर्ग समेत सभी समाज के दबाव के चलते महापौर को अपनी गलती सुधारनी पड़ी। उन्होंने संपत्ति कर में अधिक वृद्धि को जनविरोधी निर्णय बताते कहा कि अब इसे घटाकर 10 से 20 प्रतिशत तक सीमित करना जनता की बड़ी जीत है।

श्री पिल्ले ने संपत्ति कर मामले में एक बार फिर बड़ा बयान देते कहा कि सत्ता पक्ष को आखिरकार जनता की ताकत के सामने झुकना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा संपत्ति कर में अधिक वृद्धि किए जाने से आम जनता, व्यापारी वर्ग और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जनता के साथ खड़े होकर लगातार विरोध दर्ज कराया और लगभग सभी वार्डों में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिसके बाद महापौर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्हें फैसला बदलने पर मजबूर होना पड़ा।

 

श्री पिल्ले ने कहा कि अब संपत्ति कर वृद्धि को 10 से 20 प्रतिशत तक सीमित करना जनता की एकजुटता और संघर्ष की जीत है। श्री पिल्ले ने कहा कि कांग्रेस आने वाले दिनों में भी जनता की मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे पर सत्तापक्ष पर जोरदार दबाव बनाए रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक सत्तापक्ष शहरवासियों को सडक़, पानी, सफाई, रोशनी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोताही बरत रहा है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम को जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ डालने के बजाय शहर के विकास और सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस जनहित के हर मुद्दे पर संघर्ष करती रहेगी और जनता की आवाज को मजबूती से उठाएगी। अंत में संतोष पिल्ले ने महापौर, चेम्बर ऑफ कामर्स, व्यापारी प्रकोष्ठ, सराफा व्यापारी संघ, पार्षद दल, पूर्व पार्षद दल, संस्कारधानी राजनांदगांव की जनता, कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा सभी समाज के महिला-पुरुषों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता की एकता ने यह साबित कर दिया है कि जनविरोधी फैसलों को वापस लेने पर मजबूर होना पड़ता है।


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