राजनांदगांव
राज्य सरकार की नई गाईड-लाइन पर होगी वसूली
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 6 अप्रैल। राज्य सरकार के नई गाईड लाइन में शहरी बाशिंदो को अब अचल संपत्ति की कीमतों में बढ़ोत्तरी पर टैक्स के लिए भी अपनी जेब खाली करना पड़ेगा। सरकार ने तय किया है कि मकान और अन्य अचल संपत्ति की लागत बढऩे पर टैक्स में भी इजाफा किया जाएगा। सरकार के निर्देश के बाद नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में संपत्तिकर वसूली संपत्ति के मूल्यांकन के आधार पर शुरू होगा। इस संबंध में ‘छत्तीसगढ़’ से नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने कहा कि संपत्ति की कीमत के आधार पर अब टैक्स की वसूली होगी। सरकार की नई गाईड लाइन को लेकर मिले निर्देश का पालन किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में निगम क्षेत्रों के मकान समेत अन्य अचल संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए सर्वे कराने के बाद नए सिरे से टैक्स वसूलने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि राजनांदगांव शहर के 40 हजार संपत्तियों को सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके बाद संपत्ति का पुनर्निधारण किया जाएगा।
सरकार के नए आदेश के बाद करदाताओं को नए दरों पर टैक्स देना होगा। दरों में बदलाव से सीधा असर शहरी क्षेत्र पर पडऩा तय है। ऐसे में इस मामले को लेकर विरोध होना भी स्वाभाविक है। एक जानकारी के अनुसार टैक्स दो से तीन गुना तक बढ़ेगा। संपत्ति कर बढऩे से वसूली भी आसान नहीं होगी।
बताया जा रहा है कि करीब 10 साल से नगरीय निकायों में कर का पुनर्निधारण नहीं किया गया था। निकायों में टैक्स में बढ़ोत्तरी होना जनता की जेब में बोझ बढ़ाने जैसा कदम माना जाता है। बताया जाता है कि पहले भी नगरीय निकाय विभाग ने महापौरों से टैक्स बढ़ाने पर राय मांगी थी। महापौरों ने टैक्स बढ़ाने के निर्णय को लेकर अपनी चुप्पी साधने में अपनी भलाई समझी। वैसे में भी निकायों में टैक्सों को लेकर अलग-अलग दर है। यही कारण है कि राजस्व विभाग को वसूली के दौरान टैक्स पर लोगों के तुलनात्मक प्रश्रों के जवाब देने के लिए सोचना पड़ता है। इन सबसे निपटने के लिए सीधे नगरीय निकाय विभाग ने बाजार मूल्य पर कर वसूली करने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि राजनांदगांव नगर निगम में कुल 51 वार्ड के 40 हजार संपत्तियों से कर वसूली होती है। राजस्व विभाग को मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 5 करोड़ दो लाख रुपए टैक्स वसूली का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि टैक्स वसूली में निगम का रिकार्ड शुरूआत से कमजोर रहा है। निगम की माली हालत के चलते टैक्स वसूलने कई बार अफसरों को जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालने के लिए आगे आना पड़ता है। राजनांदगांव नगर निगम की स्थापना व्यय काफी बढ़ गई है। इस वजह से निगम पर आर्थिक भार हर साल बढ़ता जा रहा है।


