राजनांदगांव

तथ्य ही इतिहास के सत्य को जागृत करते हैं - मिश्र
27-Mar-2026 4:21 PM
तथ्य ही इतिहास के सत्य को जागृत करते हैं - मिश्र

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 27 मार्च।
शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि तथ्य ही इतिहास के सत्य को जागृत करते हैं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभारी प्राचार्य डॉ. अनिता महेश्वरी तथा डॉ. शैलेन्द्र सिंह द्वारा डॉ. मिश्र का स्वागत किया गया। डॉ. मिश्र का परिचय प्रस्तुत करते डॉ.  शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ के इतिहास लेखन में डॉ.  मिश्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के इतिहास को क्रमबद्ध एवं तथ्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया है। डॉ. मिश्र द्वारा सन् 1998 में लिखित उनकी पुस्तक छत्तीसगढ़ का इतिहास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कृति है। उनके मार्गदर्शन में साठ से अधिक शोधार्थी पीएचडी पूर्ण कर चुके हैं।

डॉ.  सिंह ने यह भी बताया कि डॉ. मिश्र ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा एवं इतिहास पर भी व्यापक लेखन किया है।  जिससे प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव और गौरव को समझना सरल हो जाता है। डॉ. मिश्र ने बताया कि वर्तमान छत्तीसगढ़ क्षेत्र प्राचीनकाल में दक्षिण कौशल, महाकौशल एवं महाकांतार जैसे नामों से जाना जाता था। सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर नारायण सिंह ने महत्वपूर्ण नेतृत्व किया। 20वीं सदी में पंडित सुंदरलाल शर्मा तथा ठाकुर प्यारेलाल सिंह जैसे नेताओं ने राष्ट्रीय आंदोलन को सशक्त बनाया।

उन्होंने कहा कि सन् 1920 में महात्मा गांधी का कंडेल नहर सत्याग्रह के संदर्भ में आगमन इस क्षेत्र की जन-जागरूकता का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ की जनता ने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, व्यक्तिगत सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम का संचालन करते प्रो. हिरेन्द्र बहादुर ठाकुर ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति भारत की जनता के दीर्घकालीन संघर्ष का परिणाम है। जिसमें छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में कुल 14 रियासतें थी और इन रियासतों में भी स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया। इस अवसर पर डॉ. हरनाम सिंह अलरेजा, प्रो. विकास कांडे, डॉ.  अजय शर्मा, प्रो. हेमलता साहू सहित एमए इतिहास एवं एमएससी रसायन के विद्यार्थी उपस्थित थे।


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