रायपुर

ईडी का अगला लक्ष्य- सेटिंग करने वाले निजी कोचिंग सेंटर
04-Jun-2026 7:48 PM
ईडी का अगला लक्ष्य- सेटिंग करने वाले निजी कोचिंग सेंटर

ईडी की टीमें देर रात लौटीं, सोनवानी के करीबी से 8 लाख सीज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 4 जून। ईडी की टीमों ने बुधवार को सीजी पीएससी घोटाले में सघन जांच की। अलग अलग टीमों ने पीएससी के पूर्व सचिव जेके ध्रुव, पूर्व आईएएस अमृत खलखो,पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और सहायक नियंत्रक गणवीर के भिलाई, रायपुर के 9 ठिकानों घरों में दबिश दी थी। दिन भर चली पड़ताल रात 9.30 बजे सिमटी । इस छापे

को  ईडी ने काफी सफल बताया है। यह भी कहा है कि उसे ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। इस मामले में सीबीआई ने बीते महिनों में अच्छा काम कर रखा था।कल  के छापे में ईडी ने सोनवानी के करीबी उत्कर्ष चंद्राकर के ठिकानों से 8 लाख रुपए नगद जब्त किया है।

ईडी सूत्रों के अनुसार फॉरेंसिक ट्रेल से इस घोटाले की जांच बढ़ी। इसमें डिजिटल डिवाइस, फाइनेंशियल रिकॉर्ड और संदिग्ध बेनिफिशियरी लिंक जांच के दायरे में लाए गए हैं। इस छापे में मिले इनपुट पर अब ईडी  कोचिंग-सेंटर्स के गिरोहबाज (नेक्सस), इनके द्वारा नियुक्तियों में हेरफेर और उसके लिए मनीट्रेल की ओर इशारा करने वाले सबूतों को फॉलो कर रही है। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को ढेर सारे डिजिटल फुटप्रिंट्स को डिकोड करने का काम सौंपा गया है।

बुधवार को ईडी रायपुर जोनल ऑफिस के  2 दर्जन अधिकारियों की टीम ने पीएससी चयन में मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की  थी।  बुधवार देर रात तक चली इस जांच  में  टीमों ने विवादित भर्ती प्रक्रिया से निकले क्राइम के पैसे का पता लगाने की कोशिशों के तहत फाइनेंशियल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस, प्रॉपर्टी से जुड़े डॉक्यूमेंट और कम्युनिकेशन डेटा की जांच की।

इन टीमों ने भिलाई में पूर्व  सेक्रेटरी जेके ध्रुव का सेक्टर-10 वाला घर, दुर्ग जिले में रिटायर्ड ढ्ढ्रस् ऑफिसर और पूर्व गवर्नर सेक्रेटरी अमृत कुमार खल्को का तालपुरी वाला घर, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक का रायपुर वाला घर और जेल में बंद आरोपी ललित गणवीर के भाई भूपेंद्र गणवीर से जुड़े ठिकाने शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि उत्कर्ष चंद्राकर के घर से लगभग 8 लाख रुपये कैश ज़ब्त किया गया। वह पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी का निकटवर्ती व्यक्ति है। इन्वेस्टिगेटर्स कैश रिकवरी की अहमियत और जांच के तहत कथित मनी ट्रेल से इसका कोई कनेक्शन है या नहीं, इसकी जांच कर रहे हैं।   मौजूदा कार्रवाई सीबीआई द्वारा जांचे गए अपराध से हुई है, जिसने 2020 और 2022 के बीच हुई पीएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बडिय़ों के संबंध में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है और कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

ईडी सूत्रों ने बताया कि सीबीआई जांच से जुड़ी पिछली तलाशियों के दौरान मिले डिजिटल सबूतों से परीक्षा के अंदर के लोगों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों की संभावित मिलीभगत की ओर इशारा मिला था।जांचकर्ता भर्ती परीक्षाओं से जुड़े फ़ाइनेंशियल ट्रेल्स की भी जांच कर रहे हैं। एजेंसी यह छानबीन कर रही है कि क्या संदिग्ध गड़बडिय़ां सीबीआई जांच के दौरान पहले से पहचाने गए सिलेक्शन से आगे तक फैली हुई थीं।  खास बात यह है कि सीबीआई जांच में अब तक पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, ललित गणवीर, नितेश सोनवानी, शशांक गोयल, भूमिका कटियार और साहिल सोनवानी को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अधिकांश को जमानत मिल चुकी है।ब्यूरो ने 16 जनवरी, 2025 को रायपुर में स्पेशल सीबीआई कोर्ट में अपनी पहली चार्जशीट फाइल की थी। ईडी सूत्रों ने बताया कि

सीबीआई ने काफी  अच्छा ग्राउंडवर्क किया और हम उस जांच से मिले सबूतों को फॉलो कर रहे हैं। आज के ऑपरेशन के दौरान जब्त किए गए मटीरियल की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या गोपनीय जांच प्रोसेस से कोई समझौता हुआ था और क्या कई भर्ती साइकिल के दौरान संगठित और नॉन-मेरिट-बेस्ड तरीकों से भर्ती के नतीजों को प्रभावित किया गया था।

सूत्रों ने आगे बताया कि फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को हार्ड ड्राइव, मोबाइल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज मीडिया और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड से डेटा निकालने और उसका एनालिसिस करने का काम सौंपा गया है ताकि जांच के दायरे में आने वाले लोगों के बीच बातचीत, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और डिजिटल लिंकेज की टाइमलाइन का पता लगाया जा सके। सूत्रों ने आगे कहा, फोरेंसिक जांच से कथित भर्ती धोखाधड़ी के पीछे के ऑपरेशनल स्ट्रक्चर को फिर से बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है और इससे जांच का दायरा बढ़ सकता है।


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