रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 4 जून। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षकों के लंबित पेंशन प्रकरणों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह स्थिति किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था के लिए शर्मनाक है।
उन्होंने बताया कि अनेक ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें व्याख्याता से प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिलने के बाद सेवानिवृत्त किया गया, किंतु आज छह-छह माह बीत जाने के बाद भी उनके अंतिम सेवा निवृत्ति आदेश, न मांग-न जांच प्रमाण पत्र तथा पेंशन प्रकरण लंबित हैं। परिणामस्वरूप न तो पीपीओ जारी हो रहा है और न ही उन्हें नियमित पेंशन मिल पा रही है।
नामदेव ने कहा कि नियमों के अनुसार पीपीओ जारी होने तक पात्र कर्मचारियों को 90 प्रतिशत अनुमानित पेंशन का भुगतान किया जा सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग इस व्यवस्था को लागू करने में भी रुचि नहीं दिखा रहा है। इतना ही नहीं, अवकाश नगदीकरण, समूह बीमा, फैमिली बेनिफिट तथा अन्य सेवानिवृत्ति देयकों का भुगतान भी अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है। इससे वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स और उनके परिवार आर्थिक तथा मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर विषय पर शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को महासंघ द्वारा विस्तृत ज्ञापन सौंपकर त्वरित निराकरण का आग्रह किया गया है। महासंघ के प्रदेश महामंत्री अनिल गोल्हानी एवं प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने संयुक्त रूप से कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद वृद्धावस्था में शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है।
शिक्षा विभाग से जुड़े महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों रामनारायण ताटी परमेश्वर स्वर्णकार, सुहास लाम्बट, ओ.डी. शर्मा, क्रांति कुमार सोनी , पी.आर. साहू , आर.डी. झाड़ी, शेख कसिमुद्दीन , रूपकुमार झाड़ी , सुरेन्द्र सिंह , एस.एन. देहारी, खोड़सराम कश्यप , रिखीराम साहू तथा लखनलाल साहू ने भी लंबित प्रकरणों के प्रति गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरे शिक्षक समाज के सम्मान पर आघात होगा।उन्हें वृद्धावस्था में कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अशोभनीय है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो सेवानिवृत्त शिक्षकों और पेंशनर्स के हित में राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।


