रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 22 अप्रैल। छत्तीसगढ़ में सेवारत शासकीय सेवकों के आचरण नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जीएडी ने कल एक आदेश जारी कर किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने पर रोक लगाई है। ऐसा करने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
दूसरी ओर अनेक कर्मचारी समानांतर रूप से कांग्रेस , भाजपा, और अन्य राजनीतिक दलों से भी जुड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां सेवानिवृत्त कर्मचारी एक ओर कर्मचारी संगठनों में प्रभाव बनाए हुए हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, जिससे कर्मचारी संगठनों की निष्पक्षता और वैधानिकता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में यह भी देखा गया है कि कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ के लेटरपैड का उपयोग कर पेंशनर फोरम संचालित कर रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है। महासंघ का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी सेवानिवृत्त व्यक्ति या राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्ति कर्मचारी संगठनों में पद धारण न करे। जो संगठन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएं, उनकी मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो कर्मचारी संगठनों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर लगातार प्रश्नचिन्ह बने रहेंगे और सरकारी आदेश महज खाना पूर्ति बनकर रह जाएगा।
दायरे में संघ स्वयंसेवक हैं या नहीं स्पष्ट करें-कांग्रेस
कांग्रेस ने आदेश पर सवालिया निशाना उठाया है। संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार से पूछा कि इस परिपत्र के दायरे में आरएसएस के स्वंय सेवक आएंगे या नहीं, सरकार स्पष्ट करें।


