रायपुर
अभनपुर, 23 फरवरी। ग्राम निमोरा में देवी भागवत पुराण कथा के सप्तम दिवस कथावाचक पं. युवराज पांडे ने शिव-सती विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ताडक़ासुर नामक दैत्य के अत्याचारों से देवता चिंतित थे और उसके वध के लिए शिव-सती विवाह आवश्यक माना गया।
कथावाचक के अनुसार, देवताओं के अनुरोध पर ब्रह्मा ने अपने पुत्र दक्ष को तप करने और भगवती को पुत्री रूप में प्राप्त करने का वरदान मांगने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि दक्ष को सती पुत्री रूप में प्राप्त हुईं और उनका विवाह शिव से हुआ। कथा के दौरान पंडित पांडे ने बताया कि एक प्रसंग में भगवान शंकर सती के साथ कुंभज ऋषि के आश्रम में रामकथा सुनने गए। लौटते समय उन्होंने दंडकारण्य में श्रीराम को देखा और उन्हें प्रणाम किया।
कथावाचक के अनुसार, सती को इस पर संशय हुआ और उन्होंने सीता का रूप धारण कर परीक्षा ली। इसके परिणामस्वरूप शिव ने सती का त्याग किया।
उन्होंने आगे कहा कि दक्ष के यज्ञ में बिना निमंत्रण की सती पहुंच जाती हैं, वहां शिव का अपमान होते देख हवन कुंड में कूदकर सती भस्म हो जाती है। क्रोध में आकर कर भगवान शिव वीरभद्र को प्रकट कर दक्ष का घमंड नष्ट कर देते हैं, देवताओं के विनय पर पुन: यज्ञ को संपन्न करते हैं। कथा में आगे बताया गया कि सती ने पुनर्जन्म लेकर पार्वती के रूप में जन्म लिया और तपस्या के बाद उनका विवाह शिव से हुआ।
विवाह के पश्चात शिव और पार्वती कैलाश में निवास करने लगे। सप्तम दिवस की कथा के साथ कार्यक्रम का विराम हुआ। कथा श्रवण के लिए नपाध्यक्ष उत्रसेन गहिरवारे, टिकेंद्र ठाकुर, ईश्वर पटेल, नारायण सोनी, भरत देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।


