रायपुर

पुलिस का सिटीजन पोर्टल हुआ सीमित; शिकायत दर्ज करने में आ रही समस्या
22-Feb-2026 7:55 PM
पुलिस का सिटीजन पोर्टल हुआ सीमित; शिकायत दर्ज करने में आ रही समस्या

डिजिटल पुलिसिंग?

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 22 फरवरी। प्रदेश में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद राजधानी की पुलिसिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रशासनिक ढांचे से लेकर कार्यप्रणाली तक कई स्तरों पर परिवर्तन किए गए हैं। इसी क्रम में पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और सिटीजन पोर्टल में भी संशोधन किया गया है, जिससे नागरिकों को मिलने वाली कुछ ऑनलाइन सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में संचालित सिटीजन पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन शिकायत, ई-एफआईआर और काउंटर रिपोर्ट के लिए दूसरे पक्ष की एफआईआर देखने जैसी सुविधाओं को सीमित या बंद कर दिया गया है। इससे आम लोगों को डिजिटल माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में गोपनीयता और संवेदनशील मामलों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक आदेश या सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई है।

पिछले एक सप्ताह से पोर्टल पर लॉगिन और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में भी तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। कई नागरिकों का कहना है कि वे न तो अपने खाते में लॉगिन कर पा रहे हैं और न ही नई शिकायत दर्ज कर पा रहे हैं। इससे डिजिटल पुलिसिंग के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कमिश्नरी व्यवस्था के तहत अधिकारियों के प्रभार और जिम्मेदारियों में भी फेरबदल किया गया है। अब एसीपी स्तर पर ‘एसीपी कोर्ट’ की शुरुआत की जा रही है, जहां छोटे मामलों की सुनवाई कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का दावा है कि इससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।

हालांकि, एसीपी कोर्ट को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ जानकारों का मानना है कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और विधिसम्मत रही तो इससे छोटे मामलों का त्वरित समाधान संभव होगा। वहीं कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

एक ओर जहां पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण को लेकर सकारात्मक दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिटीजन पोर्टल की सीमित सुविधाएं और तकनीकी दिक्कतें आम नागरिकों की चिंता बढ़ा रही हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई व्यवस्था नागरिक सुविधाओं और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन किस तरह स्थापित करती है।


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