रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 20 जनवरी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्यक्रम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के नाम पर आम मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका बन गई है।
प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री शैलेश नितिन त्रिवेदी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी की जा रही है। मतदाताओं से ऐसे दस्तावेजों की मांग की जा रही है, जिनकी अनिवार्यता स्पष्ट नहीं है। इससे गरीब, मजदूर, ग्रामीण और शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है, क्योंकि मताधिकार संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में बीएलओ द्वारा पर्याप्त जानकारी दिए बिना नाम विलोपन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे मतदाताओं में भ्रम और भय का माहौल है। पार्टी ने मांग की है कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, सभी नियमों और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए तथा किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना ठोस कारण के न हटाया जाए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्वाचन आयोग और राज्य प्रशासन से आग्रह किया है कि एसआईआर की समय-सीमा बढ़ाई जाए, ताकि सभी मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक सुधार कराने का पूरा अवसर मिल सके। साथ ही, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को उनके अधिकारों और प्रक्रिया की सही जानकारी दी जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि एसआईआर के नाम पर मतदाता अधिकारों के साथ किसी भी तरह की मनमानी या भेदभाव किया गया, तो पार्टी इसे सडक़ों से लेकर संवैधानिक मंचों तक उठाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।
भाजपा भी समय बढ़ाने इच्छुक
इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने सोमवार को यहाँ राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर एस.आई.आर. प्रक्रिया में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6, दावा-आपत्ति एवं फॉर्म-7 प्रस्तुत करने में अवरोध एवं अनियमितता की शिकायत की है। डॉ. मिश्रा ने संविधान, लोक प्रतिनित्व अधिनियम एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर दावा-आपत्ति हेतु फार्म प्रस्तुत किए जाने की समय सीमा 31, जनवरी 2026 तक बढ़ाने का आग्रह किया है। डॉ. मिश्रा द्वारा सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि एस.आई.आर. प्रक्रिया के प्रक्रम में ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशन उपरान्त एवं आदेश दिनांक 24, जून 2025 तथा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार भाजपा द्वारा नियुक्त बी.एल.ए. एवं मतदाताओं द्वारा दावा आपत्ति हेतु फॉर्म-7 प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है, किंतु यह शिकायत प्राप्त हो रही है कि आयोग द्वारा नियुक्त ई.आर.ओ. एवं बी.एल.ओ. या तो फॉर्म-7 लेने से ही इंकार कर रहे हैं या निराधार एवं मनगढन्त कारणों से फॉर्म-7 निरस्त कर रहे हैं।


