रायपुर

जीव पर दया, प्रभु पर भक्ति ही भागवत है- वागीश महाराज
20-Jan-2026 6:31 PM
जीव पर दया, प्रभु पर भक्ति ही भागवत है- वागीश महाराज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 20 जनवरी। रायपुर राजधानी स्थित श्री महामाया माता मंदिर में गुप्त नवरात्रि के अवसर पर श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह महोत्सव शुरू हो गया है।  प्रथम दिन सोमवार को  वैष्णवाचार्य मारुति नंदन वागीश  महाराज ने  श्रोताओं को बताया कि जीवन में जीव पर दया करना और प्रभु पर भक्ति करना ही भागवत है।

उन्होंने माया का स्वरूप महाकाली महालक्ष्मी महा सरस्वती स्वरूपा महामाया का प्रागट्य देवताओं के रक्षार्थ हुआ था। जब महिषासुर के आतंक से देवी देवता परेशान थे, तब ब्रह्मा विष्णु महेश के तीन तेज से दिव्य नारी प्रकट हुई, वही महामाया है। इसलिए यह त्रिगुणात्मक है।

उन्होंने कथा शब्द को विस्तार से समझाते हुए 'क' अर्थात ब्रह्म 'था' अर्थात अवस्थित वही कथा है। श्रीभागवत कथा आती है, तो दूर होती है जीवन में व्यथा। कथा अमृत का काम करती है। स्वर्ग के अमृत खत्म हो सकते हैं, देवता इसके लिए अमृत पान करने से डरते थे। क्योंकि अमृत समाप्त न हो जाए। लेकिन कथा रूपी अमृत कभी समाप्त नहीं होती है। गंगोत्री से गंगा निकलती है,रास्ते में पडऩे वाले नर नारी नगर को तार देती है?। लेकिन कथा रूपी गंगा जीवन को तार देती है। कथा में भाव होना चाहिए। दुनिया में कोई भी वस्तु भाव के बिना नहीं है। भाव बनेगा तो अभाव बदलेगा। अभाव बदलने से सुख की प्राप्ति होती है। श्रीमद् भागवत का वर्णन स्कंद पुराण एवं पद्म पुराण में भी है। महाराज श्री ने विस्तार से बताया। हनुमान चालीसा का वर्णन करते हुए हनुमान जी का स्मरण किया और बताया कि हनुमान जी कभी अपने आप को स्वामी या मालिक नहीं कहा। बल्कि हमेशा अपने आप को कौशलेस का दास सेवक ही कहा। द्वापर त्रेता में हनुमान जी तो है ही, किंतु कलयुग में हमेशा हनुमान जी हर गली, मोहल्ले, हर घर में विराजमान है। उन्होंने जय, जय, जय हनुमान गोसाई, कृपा करहू गुरुदेव की नाई, का सस्वर पाठ कराया। उपभोग अपने व अपनों के लिए होता है। किंतु उपयोग परमार्थ के लिए होता है। महाराज श्री ने कहा कि देवलोक में सब सुख सुविधा है, किंतु श्री कृष्ण कथा कहने वाला नहीं है भागवत कथा देवताओं को दुर्लभ है। किंतु जीव को सुलभ है। अमृत के बदले ईश्वर कथामृत लेने आए थे,किंतु सुखदेव जी ने उन्हें अधिकारी न होने से मना कर दिया।व्यास पीठ से न्यास समिति के पूर्व अध्यक्ष ब्रह्मलीन  आनंद शर्मा का स्मरण किया।

 कथा प्रारंभ होने के पूर्व पीठ पूजन व भागवत पुराण आचार्य श्री का पूजन संपन्न हुआ। जिसे मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष व्यास नारायण तिवारी, वरिष्ठ सदस्य शेखर दुबे, दुर्गा प्रसाद पाठक, पं विजय कुमार झा, कृपाराम यदु, उपेंद्र शुक्ला, सूरज फुटान, शिबू शुक्ला, नितिन तिवारी, बलदाऊ मिश्रा, क्रांति अग्रवाल, आदि ने आरती कर किया। महाराज श्री के साथ उनके सहयोगी स्वरूप युवराज  श्रीधर ,  आचार्य ,  विष्णु,  संतोष ,  सुरेंद्र तथा संगीत टीम के  राकेश महामाया मंदिर को वृंदावन बनाने में महती भूमिका अदा की मंगलवार को श्रीकुन्ती स्तुति, भीष्म स्तुति, श्रीसुकदेव पागट्य की कथा का सविस्तार वर्णन किया गया।


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