रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमधा, 17 मई। सूर्योदय से पहले स्नान, प्राणायाम, पूजा-पाठ से चेहरे में चमक आती है, विद्वान, बलवान और आयुवान बनाता है। सात्विक व्यक्ति का संग नहीं छोडऩा चाहिए और अवगुणी का परित्याग कर देना चाहिए।
रामजानकी नैयापारा में भागवत कथा कहते हुए थान खम्हरिया बेमेतरा के पं. सोनू प्रसाद दुबे ने उक्त बातें कहीं। आगे कहा कि माता-पिता संस्कार देते हैं वही प्रथम गुरु हैं। कोई किसी का सहारा नहीं होता सब का सहारा परमात्मा होता है। चिंता का त्याग कर चिंतन को बढ़ाना चाहिए।
जिस व्यक्ति को ज्ञान हो जाता है, उसे अभिमान नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के अनुसार चलना चाहिए। कौरव विदुर को धर्म के अनुसार नहीं अपने अनुसार चलाना चाहते थे। कौरवों के विनाश के कई कारण थे, जिनमें विदुर की बातों को नकारना ही कौरव के विनाश का एक कारण बना। बुरे आदमी का संग त्याग देना चाहिए। संतों, विद्वानों भक्तों का संग करना भवसागर से पार होना है।
इस अवसर पर भुवन यादव, गणेश यादव, बल्ला यादव, अनुराग यादव, प्रदीप ताम्रकार, वीरेंद्र यादव के साथ कभी काफी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


