रायपुर

महिला पुलिसकर्मियों से थानों और ऑफिस में यौन उत्पीडऩ
17-May-2023 5:17 PM
महिला पुलिसकर्मियों से थानों और ऑफिस में यौन उत्पीडऩ

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 17 मई। पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय (पीटीएस), माना, में च्च्महिला पुलिस कर्मियों के मुद्दों  और समस्याओं पर अध्ययन रिपोर्ट लॉन्च की गई।  इस दौरान राज्य स्तरीय कार्यशाला भी  आयोजित की गई थी। इसमेम श्री गिरिधारी नायक कार्यवाहक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग, डॉ. किरणमयी नायक अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग, डॉ इरफान-उल रहीम खान (आईपीएस) एसपी, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल सुश्री चंचल तिवारी (एएसपी) सहित अन्य पुलिस अधिकारी व प्रशिक्षु ।

4 राज्यों (छत्तीसगढ़, झारखण्ड, ओडिशा, मध्यप्रदेश,) के महिला पुलिस कर्मियों पर किए गए समेकित डेटा पर जारी की गई ।इससे पता चलता है, जिसमें महिला पुलिस उत्तरदाताओं की सबसे बड़ी संख्या ने अपने संबंधित राज्यों के पुलिस विभाग में 1 से 10 साल की सेवा में योगदान दिया है (328 में से 209 यानी 63.72त्न), 88 उत्तरदाताओं (26.83त्न) ने 11 से 11 साल तक पुलिस विभाग में काम किया है। 20 साल। 23 उत्तरदाताओं (7.01त्न) ने पुलिस विभाग में 21 से 30 वर्षों तक सेवा प्रदान की है और 8 (2.44त्न) ने पुलिस विभाग में 30 से अधिक वर्षो तक सेवा प्रदान की है।यह देखा गया है कि छत्तीसगढ़ में 67.05त्न उत्तरदाताओं ने कहा कि पुलिस स्टेशन / चौकी / यातायात पोस्ट के पास स्वच्छ शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। 6.47त्न ने उत्तर दिया विश्राम कक्ष उपलब्ध नहीं है, 78.82त्न उत्तरदाताओं को विषम कार्य घंटों के दौरान परिवहन सुविधाओं तक पहुंच नहीं है, 48.23त्न को क्वार्टर अलॉट नहीं किए गए हैं। कुल उत्तरदाताओं में से 26.22त्न मानते हैं कि पुरुष सहकर्मी कभी-कभी पितृसत्तात्मक रवैया रखते हैं. कुल उत्तरदाताओं में से 56.098त्न सोचते हैं कि पुलिस विभाग काम करने के लिए एक अच्छी जगह है जबकि 22.87त्न अन्यथा सोचते हैं, 31.76त्न उत्तरदाताओं ने कहा कि वे 8-10 घंटे से काम करते हैं, 50 त्न काम 10-15 घंटे, 4.70त्न 15 घंटे से ज्यादा काम करते हैं। केवल 3.52त्न ने कहा कि यह काम के प्रकार पर निर्भर करता है- कुल उत्तरदाताओं में से 10.59त्न ने अपने कार्य जीवन के विभिन्न पड़ावों पर यौन उत्पीडऩ का सामना किया, 73त्न उत्तरदाताओं को यौन उत्पीडऩ के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है, उनमें से अधिकांश आंतरिक परिवाद समिति (आईसीसी) के बारे में जागरूक नहीं है, जहां वे यौन उत्पीडऩ का सामना करने के मामले में शिकायत कर सकते हैं।

ङ्खक्कस् की भेदी चिंताएं (1) परिवार के साथ-साथ स्वयं के लिए भी समय नहीं, (2) सप्ताहांत की छुट्टीनहीं, (3) सक्षम नहीं होना अपने बच्चों की देखभाल करने के लिए (4) स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आदि, लगभग 68.59त्न जनता से सकारात्मक आचरण का अनुभव करते हैं। नगण्य 3.04त्न को लगता है कि जनता आज्ञा का पालन नहीं करती है,छत्तीसगढ़ के कुल उत्तरदाताओं में से 40त्न का मानना है कि एक सैनिटरी डिस्पेंसर बहुत आवश्यक हैं।

पुलिस की रिपोर्ट में ही खुलासा

एसपी आफिस के अफसरों से तंग महिला आरक्षक ने दी आत्मदाह की चेतावनी

एसपी आफिस के अधिकारियों की प्रताडऩा से तंग आकर महिला सेल की कर्मी ने  19 मई को दोपहर 12 बजे कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्म दाह करने की चेतावनी दी है। महिला ने कलेक्टर को पत्र लिखा है ।  महिला आरक्षक  1028  अधीक्षक कार्यालय में महिला प्रकोष्ठ / सेल में कार्यरत है।  पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं उनके गलत आदेशों में हां में हां मिलाने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों की प्रताडऩा से बहुत ज्यादा तंग हो चुकी हूँ मैंने अपने सेवाकाल में मुझे दिये गये समस्त दायित्वों का पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक निर्वाहन किया है। मैं एक अविवाहित महिला आरक्षक हूँ तथा पुलिस विभाग के बहुत से अधिकारी मुझसे जो गलत नियत से अपेक्षा रखते हैं । उनके गलत ईरादो को पूरा नहीं किया जाता है तब मुझे तरह-तरह से मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताडि़त करने का प्रयास करते हैं वर्ष 2020 में भी मुझे इसी प्रकार से प्रताडि़त किया गया था जिससे  बड़ी मुश्किल से उभरने का प्रयास कर रही थी।


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