रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 15 मई। छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने 15 जून तक तबादले की कार्रवाई पूरी करने की मांग की है। इस सिलसिले में उन्होंने मुख्य सचिव अमिताभ जैन को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में कहा गया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विगत वर्षों में स्थानांतरण से प्रतिबंध शिथिल करने तथा स्थानांतरण नीति जारी करने की कार्यवाही प्राय: माह जुलाई और अगस्त में की जा रही है। माह जुलाई तथा अगस्त में स्थानांतरण करने से न केवल शासकीय सेवकों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि आम जनता के हित भी प्रभावित होते हैं।
शासकीय सेवकों के शालाओं में पढऩे वाले बच्चे नवीन शिक्षा सत्र जो कि 15 जून के आस पास प्रारंभ हो जाता है उसका एक ही स्कूल में निरंतर लाभ नहीं ले पाते एवं स्थानांतरण के कारण उन्हें एक स्कूल से दूसरे स्कूल में मध्य सत्र में पढ़ाई में शामिल होना पड़ता है, जिससे बच्चों को मानसिक तौर पर अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षको व व्याख्याताओं-प्राध्यापकों आदि के तबादले मध्य शिक्षा सत्र में होने के कारण छात्रों को एक शिक्षक के द्वारा पढ़ाये गये पाठ्यक्रम से दूसरे शिक्षक पर मानसिक तौर पर स्थानांतरित होना पड़ता है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
शासकीय सेवकों को अपना सामान ले जाने में बारिश के समय बेहद कठिनाई होती है। फेडरेशन इस ज्ञापन के माध्यम से मांग प्रस्तुत करता है कि वर्ष 2023 में स्थानांतरण नीति 22 मई 2023 तक जारी कर दी जाये एवं 5 जून तक समस्त तबादले पूर्ण कर भारमुक्त करने तथा कार्यभार ग्रहण करने की तिथि 15 जून तक तय कर दी जाये। उक्त तिथि के उपरांत कोई तबादले न किये जाए, जिससे निर्बाध रूप से शासकीय सेवक बिना किसी मानसिक तनाव के अपना दायित्व निभा सके।
तबादला नीति में पूर्व में मुख्यालय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर किये गये स्थानांतरणों को समन्वय का प्रकरण नहीं माना जाता था, क्योंकि इसमें शासन को न तो आवास और न ही सामग्री परिवहन का भत्ता देने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अत: वर्ष 2023 की तबादला नीति में ऐसे स्थानांतरण जिसमें मुख्यालय परिवर्तन न होता हो उन्हें स्थानांतरण की श्रेणी में न रखा जाकर कार्य आबंटन या कार्य विभाजन की श्रेणी में माना जाए।
यह कहा गया कि ऐसा किये जाने पर शासकीय सेवकों के बच्चों को भी शाला परिवर्तन की कठिनाई से जूझना नहीं पड़ता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो ऐसे प्रकरण तबादले की श्रेणी में आ जाते हैं और शासकीय सेवकों को अनेकानेक प्रकार के अनावश्यक दबावों का सामना करना पड़ता है।


