रायगढ़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 29 मई। खरसिया पुलिस ने ग्राम गुरदा में मिले किशोर बालक के शव मामले में कार्रवाई करते हुए अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझा ली है। पुलिस ने हत्या के मामले में चन्द्रशेखर उर्फ चंदा डनसेना, रघुसिंह उर्फ रघुनाथ राठिया तथा एक विधि से संघर्षरत बालक को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि घटना दिनांक को चारों युवक ग्राम गुरदा के डोगरमुड़ा खार खेत गए थे, जहां शराब सेवन के दौरान हुए विवाद में मारपीट कर किशोर की हत्या कर दी गई और शव को छिपाने का प्रयास किया गया।
घटना के संबंध में 25 मई को खरसिया पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम गुरदा के डोगरमुड़ा खार स्थित बरगद पेड़ के नीचे एक किशोर बालक का शव पड़ा हुआ है। मृतक की पहचान ग्राम बरभौना थाना छाल निवासी 16 वर्षीय किशोर के रूप में हुई। मृतक के बड़े भाई ने पुलिस को बताया कि 24 मई की सुबह गांव का ऋषि डनसेना उसके भाई को अपनी पल्सर मोटरसाइकिल में बैठाकर काम कराने ले गया था। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों द्वारा खोजबीन की गई, जहां अगले दिन सुबह ग्राम गुरदा के डोगरमुड़ा खार स्थित बरगद पेड़ के नीचे किशोर का शव मिला। मृतक के शरीर पर सीने, आंख एवं अन्य हिस्सों में चोट और खरोंच के गंभीर निशान पाए गए, जिससे किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मारपीट कर हत्या किए जाने की आशंका जताई गई।
खरसिया पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया गया। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में मृत्यु की प्रकृति हत्यात्मक (होमोसाइडल) पाए जाने पर थाना खरसिया में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध धारा 103(1) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने ऋषि डनसेना को तलब कर पूछताछ की। उसने बताया कि घटना वाले दिन मृतक को वह अपने साथियों चन्द्रशेखर उर्फ चंदा, रघुनाथ उर्फ रघु सिंह तथा एक नाबालिग बालक के पास छोडक़र काम पर चला गया था। ऋषि डनसेना ने यह भी बताया कि बाद में जब उसने चन्द्रशेखर को फोन किया तो फोन पर झगड़ा, मारपीट और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। उसने फोन पर ही झगड़ा बंद करने को कहा था।
पुलिस ने संदेहियों चन्द्रशेखर उर्फ चंदा डनसेना, रघुसिंह उर्फ रघुनाथ राठिया तथा विधि से संघर्षरत बालक को हिरासत में लेकर पृथक-पृथक पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि घटना दिनांक को सभी ने साथ बैठकर शराब पी थी। इसी दौरान चखना के लिए आम तोडक़र लाने की बात को लेकर मृतक और चन्द्रशेखर के बीच विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। आरोपियों ने मिलकर किशोर के साथ हाथ-मुक्कों से बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह खेत की मेड़ से फिसलकर तालाब की ओर गिर पड़ा और गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। घटना के बाद तीनों आरोपियों ने साक्ष्य छिपाने की नीयत से शव को उठाकर बरगद पेड़ के नीचे चित अवस्था में लिटा दिया और मामले को दुर्घटना जैसा दिखाने का प्रयास किया। बाद में जब ऋषि डनसेना ने मृतक के बारे में पूछा तो आरोपियों ने झूठ बोलते हुए बताया कि वह खाना-पीना कर अपने घर चला गया है।
खरसिया पुलिस ने आरोपियों को घटनास्थल ले जाकर घटना का रिकंस्ट्रक्शन कराया तथा उनके मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना के समय पहने गए कपड़े जब्त किए। मामले में आरोपियों द्वारा सामूहिक रूप से हत्या कर साक्ष्य छिपाने का प्रयास पाए जाने पर प्रकरण में धारा 238 एवं 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई। गिरफ्तार आरोपियों एवं विधि से संघर्षरत बालक को सक्षम न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।


