महासमुन्द

फोर्टिफाइड चावल की खरीदी को लेकर लागू नई व्यवस्था से जिले के राइस मिलरों में असंतोष-रमेश साहू
22-Feb-2026 7:44 PM
फोर्टिफाइड चावल की खरीदी को लेकर लागू नई व्यवस्था से जिले के राइस मिलरों में असंतोष-रमेश साहू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 22 फरवरी।
फोर्टिफाइड  राइस कर्नेल एफ आरके की खरीदी को लेकर लागू नई व्यवस्था से जिले के राइस मिलरों में असंतोष व्याप्त है। भाजपा के वरिष्ठ नेता, पिटियाझर सोसायटी अध्यक्ष एवं राइस मिलर रमेश साहू ने कहा है कि चुनिंदा फर्मों से ही एफआरके खरीदी की अनिवार्यता के कारण मिलरों की लागत बढ़ गई है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने जारी विज्ञप्ति में बताया कि शासन के निर्देशानुसार सामान्य चावल में निर्धारित अनुपात में एफआरके मिलाकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु आपूर्ति की जाती है। पूर्व में मिलर अपनी सुविधा अनुसार खुले बाजार से प्रतिस्पर्धात्मक दर पर एफआरके खरीद लेते थेए जिससे लागत संतुलित रहती थी। वर्तमान में बाजार में एफ आरके लगभग 40 रुपए प्रति किलो उपलब्ध है। जबकि अधिकृत आपूर्तिकर्ता 60 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध करा रहे हैं। इससे मिलरों को डेढ़ गुना अधिक राशि का भुगतान करना पड़ रहा है।
रमेश साहू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कुपोषण से लडऩे के उद्देश्य से फोर्टिफाइड चावल योजना शुरू की गई है। जो जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल है। एफआरके ऐसे विशेष चावल दाने होते हैं जिनमें आयरन, फोलिक एसिड एवं विटामिन बी.12 जैसे आवश्यक पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। किंतु वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता के अभाव के कारण योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि मांग के अनुरूप समय पर एफआरके उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। जिससे मिलिंग कार्य और समयबद्ध आपूर्ति में कठिनाई हो रही है। रमेश साहू ने शासन से मांग की है कि एफआरके का वास्तविक एवं तार्किक दर निर्धारण किया जाए तथा पर्याप्त मात्रा में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ताकि योजना का लाभ हितग्राहियों तक सुचारू रूप से पहुंच सके और राइस मिलरों पर अनावश्यक आर्थिक भार न पड़े।


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