महासमुन्द

टोकन नहीं कटने से नाराज किसानों का चक्काजाम
03-Feb-2026 4:10 PM
टोकन नहीं कटने से नाराज किसानों का चक्काजाम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददात

महासमुंद, 3 फरवरी। टोकन नहीं कटने की समस्या को लेकर किसानों का आक्रोश कल तेंदुकोना से निकलकर पिथौरा पहुंचे और  50 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धान भरकर तहसील कार्यालय का घेराव किया।

जानकारी अनुसार किसानों ने पिथौरा-बागबाहरा मुख्य मार्ग पर सुबह 10 बजे चक्काजाम कर दिया। जिससे सडक़ के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। इसके चलते आवागमन बाधित रहा। किसानों का कहना है कि उनके धान का शासन स्तर पर विधिवत सत्यापन हो चुका है, इसके बावजूद जानबूझकर टोकन नहीं काटा गया। जिससे वे अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं।

इन किसानों के समर्थन में किसान संघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई। आंदोलनकारियों ने बताया कि क्षेत्र के 9 सोसायटी के करीब 300 किसानों का 36 हजार क्विंटल धान का पूर्ण सत्यापन हो चुका था, लेकिन टोकन नहीं कटा। इससे दर्जनों किसान परिवार गंभीर आर्थिक संकट में फं स गए हैं। किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष बृजलाल साहू, धनंजय साहू ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सभी पात्र किसानों का टोकन काटकर धान खरीदी शुरू नहीं की जाती, तब तक आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी। किसानों की मांग है कि खरीदी की तिथि बढ़ाई जाए। बचे हुए धान को खपाने के लिए लिमिट में बढ़ोतरी की जाए।

किसानों का आरोप है कि पिथौरा तहसीलदार द्वारा उन्हें बार-बार परेशान किया गया। उनका धान जबरन जब्त किया गया और कई किसानों के घर जाकर बार-बार पूछताछ की गई। किसानों ने बताया कि उन्हें बार-बार यह साबित करना पड़ा कि वे किसान हैं कोई चोर नहीं। इस रवैये से किसानों में भारी आक्रोश है। अजय कुमार दीक्षित, अशोक कुमार अग्रवाल का कहना है कि सत्यापन के बाद भी हजारों क्विंटल धान नहीं खरीदा जा रहा, जिससे सरकार का वादा खोखला सोबित हो रहा है।

आंदोलन के दौरान एसडीएम नमिता मारकोले और बागबाहरा तहसीलदार नितिन द्वारा किसानों को समझाने का प्रयास किया गया लेकिन किसान नहीं माने। किसानों ने बताया कि 30 तारीख को टोकन कटने का आश्वासन दिया गया था जो पूरा नहीं हुआ। इसलिए समझाइश असफल रही। शाम 4 बजे चक्का जाम के बाद किसानों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और भूख हड़ताल पर बैठ गए।

इस आंदोलन में कौहाकुड़ा, गोड़बाहाल, जम्हर, राजाडेरा, छिबर्रा, कोचर्रा, दुरुगपाली, चांदापारा, गोपालपुर समेत 20 से अधिक गांवों के किसान शामिल हुए। जम्हर के किसान रामानंद ने बताया कि उनके पास 9 एकड़ कृषि भूमि है, लेकिन एक भी टोकन नहीं काटा गया। खेती के लिए 80 हजार रुपए कर्ज लिया है। यदि धान की खरीदी नहीं हुई तो परिवार का भरण पोषण व कर्ज चुकाना दोनों ही असंभव हो जाएगा। जम्हर के ही किसान राम सिंह ठाकुर ने मीडिया को बताया कि घर में बेटे की शादी करनी है। टोकन नहीं कटने से मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं। किसानों का कहना है कि शादी ब्याह, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च के लिए कर्ज लिया था, लेकिन धान न बिकने से हालात दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हैं।

इस आंदोलन की सबसे बड़ी आंच भाजपा पर पड़ी है। धान न बिकने से नाराज और सरकार की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट भाजपा के 20 बूथ लेवल सदस्यों और महिला मंडल अध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष को अपना सामूहिक त्यागपत्र सौंप दिया है।

प्रशासन द्वारा सत्यापित कराए धान की खरीदी नहीं किए जाने से आक्रोशित तेन्दूकोना सोसायटी के किसानों के साथ क्षेत्र के कांग्रेसजन भी शामिल थे। दिन भर आंदोलन के ाबद भी निष्कर्ष नहीं निकला तो किसान कल शाम चार बजे से चक्का जाम समाप्त कर प्रदर्शन स्थल पर अनशन शुरू कर दिया। किसानों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि उन्होंने धान जला देने के लिये कुछेक बोरे धान सडक़ डाल में दिए। आत्महत्या जैसी चेतावनी भी देते रहे। जिससे पुलिस प्रशासन हलाकान रहा। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देख फायर बिग्रेड भी बुला ली। लेकिन समझाइश के बाद उन्होंने अनशन का निर्णय लिया।


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