महासमुन्द

बजट समावेशी विकास की नई रूपरेखा है-सांसद रूपकुमारी
02-Feb-2026 4:19 PM
बजट समावेशी विकास की नई रूपरेखा है-सांसद रूपकुमारी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 2 फरवरी। छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल और ग्रामीण और कृषि प्रधान राज्यों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय का सशक्त रूपरेखा बनकर सामने आया है। यह बजट स्पष्ट करता है कि विकास का लाभ अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव, वनांचल और आदिवासी अंचलों तक पहुंचेगा। ग्रामीण विकास के लिए 2.73 लाख करोड़ का आवंटन छत्तीसगढ़ के हज़ारों गांवों के लिए बुनियादी ढांचे, आवास, जल, स्वच्छता और आजीविका के नए अवसर लेकर आएगा।

 कहा कि राज्य की बड़ी आबादी कृषि और कृषि आधारित कार्यों पर निर्भर है। ऐसे में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.62 लाख करोड़ का प्रावधा,ए विशेष रूप से धान-प्रधान क्षेत्रों, महिला किसानों और खेत.मजदूर महिलाओं के लिए राहत और अवसर दोनों है। इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता नारी शक्ति को आर्थिक विकास का केंद्र बनाना है। महिला स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी,पहल और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लघु और मध्यम उद्यम उद्योग हेतु 10 हजार करोड़ का समर्पित विकास कोष महिला.नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्योगों को मजबूती देगा।

छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। यह बजट उन्हें उत्पादन, प्रसंस्करण और बाज़ार से जोडक़र स्थायी आय सुनिश्चित करेगा। विशेष रूप से हथकरघा और पारंपरिक बुनकरी के लिए बजट का दृष्टिकोण छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोसा, सूती और पारंपरिक वस्त्रों से जुड़ी आदिवासी महिला बुनकरों को डिज़ाइन, तकनीक, मूल्य संवर्धन और डिजिटल मार्केटिंग से जोडऩे का रास्ता इस बजट ने खोला है। हथकरघा अब केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगा।


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