महासमुन्द

सोसायटी प्रबंधक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
07-Jan-2026 3:55 PM
सोसायटी प्रबंधक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

मध्य रात्रि में 130 बोरा धान सोसायटी में खाली करने का मामला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 7 जनवरी। महासमुंद जिले के बसना धान खरीदी में कथित अनियमितता के एक गंभीर मामले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिरदा के प्रबंधक रोहित पटेल को न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सरायपाली पंकज आलोक तिर्की ने जमानत याचिका क्रमांक 02-2026 रोहित पटेल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य पर सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त कर दिया।

यह मामला थाना बसना के अपराध क्रमांक 533.2025 से संबंधित है जिसमें अभियुक्त पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318-4, 3-5 के अंतर्गत आरोप दर्ज हैं। प्रकरण के अनुसार 30 दिसंबर 2025 की रात्रि धान खरीदी केंद्र पिरदा में आकस्मिक जांच की गई। जांच दल में नायब तहसीलदार पिथौरा ललित सिंह, मंडी उपनिरीक्षक तथा ग्राम कोटवार शामिल थे। जांच के दौरान धान खरीदी केंद्र परिसर में मेटाडोर वाहन क्रमांक सीजी 06 जी आर 8702 से उतारकर 130 बोरी पुराना एवं गुणवत्ताहीन धान स्टेक कर रखा पाया गया। इसी आधार पर रोहित पटेल एवं एक राइस मिल संचालक के विरुद्ध थाना बसना में अपराध पंजीबद्ध किया गया।

अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से यह तर्क रखा गया कि कथित सामग्री धान नहीं बल्कि डेनेज भंूसा बदरा था तथा जांच विधि विरुद्ध तरीके से की गई। वहीं राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया। न्यायालय ने केस डायरी के अवलोकन में यह पाया कि बरामद 130 बोरी सामग्री को जांच में डेनेज नहीं बल्कि पुराना व अमानक धान बताया गया है। प्राथमिक कृषि सारख पिरदा के धान उपार्जन केंद्र में इस मामले में अपराध दर्ज किया गया है।  इस मामले में आरोपी रोहित पटेल का कहना है कि ललित सिंह के द्वारा ग्राम कोटवार के माध्यम से उनसे धान खरीदी कार्य के एवज में आर्थिक मांग की जा रही थी और मांग पूरी न होने पर दुर्भावनावश कार्रवाई की गई।

आवेदक के अनुसार नायब तहसीलदार ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिना सक्षम मजिस्ट्रेटीय अधिकार के धान खरीदी केंद्र का ताला तोडक़र जांच की तथा बिना पूछताछ और बिना सुनवाई का अवसर दिए जांच प्रतिवेदन तैयार किया।

जबकि न्यायालय ने माना है कि जमानत दिए जाने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित करने, फ रार होने अथवा पुन: संज्ञेय अपराध घटित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने रोहित पटेल की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी है।


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