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मंदिरों व घरों में तैयारियां पूर्णत: की ओर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 12 अप्रैल। चैत्र नवरात्र पर कल मंगलवार से घरों और मंदिरों में आस्था के जोत जलेंगे। वहीं मंदिरों में पुजारियों और घरों में लोगों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। हालांकि कोरोना महामारी के चलते जिलेभर में लॉकडाउन लगा हुआ है और लोगों के लिए मंदिरों व देवालयों में प्रवेश बंद कर दिया है। ऐसे में मंदिरों में पुजारियों द्वारा जोत जलाए जाएंगे।
गत् वर्ष भी चैत्र नवरात्रि पर्व पर मंदिरों और भक्तों के बीच कोरोना वायरस के चलते दूरी बनी हुई थी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते जिलेभर में आगामी 19 अप्रैल की सुबह तक लॉकडाउन लगाया गया है। यह दूसरा अवसर है जब यह पर्व घरों तक ही सीमित हो गया है। मां दुर्गा की आराधना के लिए चैत्र नवरात्रि का अलग ही धार्मिक महत्व है। कोरोना वायरस की वजह से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं। शहर के बड़े धार्मिक स्थलों को बंद करने का पहले से ही ऐलान कर दिया गया है।
भक्ति और शक्ति के लिए इस पर्व को व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। नौ दिन तक मंदिरों में ज्योति कलश की स्थापना होती है। वहीं अलग-अलग दिशा से लोग अपनी मनवांछित फल की चाह लिए मंदिरों के चौखट में पहुंचते हैं। देवी दर्शन करने हुए लोग परिवार समेत पहुंचते हैं। इस बार भी किसी भी मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रवेश देने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
समूचे जिले में भीड़ को कम करने के इरादे से राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यानी कुल मिलाकर चैत्र नवरात्रि के लिए लोग घरों में ही पूजा-अर्चना करते नजर आएंगे। परंपरागत रूप से चैत्र नवरात्रि पर्व किसी त्यौहार से कम नहीं है। शहर के पाताल भैरवी, शीतला मंदिर, सिंघोला स्थित मां भानेश्वरी मंदिर समेत अन्य प्रसिद्ध मंदिरों को बंद कर दिया गया है। जिले के अलग-अलग इलाकों के भी देवी मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से बनी भयावह स्थिति को देखते हुए मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह से बंद रहेगी।
बताया गया है कि मंदिरों में सिर्फ पुजारी धार्मिक नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करेंगे। ऐसी स्थिति में मंदिरों में बिना भक्तों की आरती होगी। किसी भी सूरत में बाहरी लोगों की आवाजाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। बताया जा रहा है कि बड़े मंदिरों में इस बार ज्योति कलश की स्थापना में भी कमी आई है। संख्या में कमी आने से समझा जा सकता है कि मंदिरों पर भी एक तरह से कोरोना वायरस के संक्रमण का छाया मंडरा रहा है।


