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आलोक प्रकाश पुतुल
रायपुर, 12 अप्रैल। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों के कारण अंतिम संस्कार के लिए अकेले रायपुर में 46 नए श्मशान घाट बनाये गये हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि अकेले रविवार को यहां सौ से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। ग्रामीण इलाकों में शवों को खेतों में जलाए जाने की भी खबर मिल रही हैं। राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया ने कहा है कि मौत के बाद शव जलाने में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को आ रही कठिनाइयों को देखते हुए रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, भिलाई और रिसाली नगर निगम में विद्युत शवदाहगृह स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच पिछले 24 घंटों में रायपुर में 2833 नए कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है। राज्य में कल शाम तक सक्रिय मरीजों की संख्या 91,311 थी और मौत के 123 मामले सामने आये थे। केंद्र सरकार के जारी आंकड़ों के अनुसार जिन पांच राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले सबसे अधिक आ रहा हैं उनमें महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ का नंबर है।
कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बाद प्रदेश सरकार ने रायपुर के इनडोर स्टेडियम को अस्पताल में बदल दिया है और सोमवार से यहां 320 ऑक्सीजन युक्त बेड की सुविधा के साथ इलाज शुरू करने की तैयारी की गई है। राज्य के 28 में से 20 जिलों में पूरी तरह से लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत अधिकांश शहर के अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों के लिए जगह नहीं बची है।
अस्पताल के गलियारों में, सीढिय़ों में मरीज ऑक्सीजन सिलेंडर ले कर बैठे हुए हैं। पांच-पांच घंटे लाइन में खड़े होने के बाद भी संक्रमितों के परिजनों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इधर रविवार को एक बैठक के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिवीर की कमी से निपटने के लिए मुंबई और हैदराबाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अफसरों को तैनात किया है, जो कंपनी से सीधे आपूर्ति को लेकर समन्वय का काम देखेंगे।
छत्तीसगढ़ में औसतन 300 टन ऑक्सीजन का उत्पादन होता है और इसमें से लगभग 56 टन की खपत राज्य में होती है। इसमें से अस्पतालों में 30 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। इसके बाद भी ऑक्सीजन की कमी की आशंका के मद्देनजऱ राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने महामारी अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी करते हुए निर्देश दिये हैं कि राज्य में उत्पादन होने वाले ऑक्सीजन का 80 प्रतिशत अस्पतालों को दिया जाए। यहां तक कि जरुरी होने पर उद्योगों को आपूर्ति की जाने वाली 20 प्रतिशत ऑक्सीजन भी अस्पतालों को दी जाए।


