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जयपुर की युवती सहित कोरोना संक्रमित तीन के शव बदल गए, परिजन दोबारा लौटे
12-Apr-2021 12:27 PM
जयपुर की युवती सहित कोरोना संक्रमित तीन के शव बदल गए, परिजन दोबारा लौटे

  बैकुंठपुर के शव को सक्ती वाले ले गये, सक्ती के मृतक की तोरवा में हुई अंत्येष्टि  

निजी अस्पताल में हुई लापरवाही, तीनों शवों में गलत पर्ची लगा दी   

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 12 अप्रैल।
कोरोना संक्रमित मरीज तीन मरीजों का शव गलत पर्ची लगाने के कारण बदल गया। जयपुर की एक युवती की मौत के बाद परिजन उसे ले गये तो अंतिम संस्कार के समय पता चला कि यह युवती का नहीं किसी पुरुष का है। उन्होंने तुरंत बिलासपुर में संपर्क किया और युवती के शव को सुरक्षित कराया। पुरुष का शव लौटाकर वे युवती का शव जयपुर ले गये।

उसलापुर स्थित ओंकार चिकित्सालय में जयपुर की एक 22 वर्षीय युवती की बीते 8 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। इसी दिन इसी अस्पताल में सक्ती तथा बैकुंठपुर के दो और व्यक्तियों की मौत हो गई। तीनों शवों को सिम्स की मरच्युरी में लाकर रखा गया। संक्रमण से मौत होने पर शवों को पूरी तरह लपेटकर रखा जाता है और उसमें नाम की पर्ची चिपका दी जाती है। जयपुर की युवती अपने रिश्तेदारी में यहां आई थी। संक्रमित होने के बाद उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में ओंकार चिकित्सालय में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने गलत शव पर युवती का नाम चिपका दिया। परिजन शव को लेकर जयपुर पहुंचे तो पाया कि यह तो किसी पुरुष का शव है। उन्होंने वहीं से सिम्स में खबर की कि उन्हें गलत शव दे दिया गया है। वे शव लेकर सिम्स पहुंचे और अस्पताल के कर्मचारियों को लापरवाही के लिये खरी-खोटी सुनाते हुए अपना शव लेकर चले गये। यह शव जब यहां आ गया तो सक्ती के मृतक का शव पर्ची के आधार पर उनके परिजनों को दे दिया गया। वहां के मुक्तिधाम में मृतक के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। तीसरा मृतक बैकुंठपुर से था। बैकुंठपुर से उनके परिजनों ने आकर शव को देखा तो पाया कि यह उनके घर के मृतक का शव नहीं है। उन्होंने हंगामा मचाते हुए शव को अपना नहीं बताते हुए लेने से इंकार कर दिया। पता चला कि जिस शव को सक्ती के लोगों को दे दिया गया है वह दरअसल बैंकुंठपुर के मृतक का है। यह साफ हो गया कि तीनों ही शवों में गलत पर्ची चिपका दी गई थी। बैकुंठपुर के परिजनों ने सक्ती जाकर पाया कि मृतक का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। वे वहां से अस्थि संचय करके ले आये। इधर सक्ती के शव को जो गलत पर्ची की वजह से जयपुर चला गया था, उसे तोरवा मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां कर्मचारियों ने उसका दाह संस्कार किया।

कोरोना गाइडलाइन में शवों को पॉलिथिन से लपेटकर रखना है साथ ही चेहरे को पारदर्शी पॉलिथिन से पैक करना है। इसके बावजूद तीनों शव पूरी तरह पैक कर दिये गये थे और पर्चियां भी गलत लगा दी गई थी।  


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