ताजा खबर
महिला ने पीपीई किट पहनकर बुजुर्ग दंपत्ति को अस्पताल पहुंचाया, संक्रमितों की मदद के लिए आगे आए कई युवा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 9 अप्रैल। कोरोना के चलते सरकारी व्यवस्थाएं दम तोड़ती दिख रही हैं, ऐसे खौफ के माहौल में कुछ सेवाभावी नौजवान पीपीई किट पहनकर संक्रमितों को अपने संसाधन से अस्पताल पहुंचाने और, दिवंगतों के शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। ऐसा करने वालों में महिला भी है, जो कि पीपीई किट पहनकर कोरोना संक्रमितों को अस्पताल तक पहुंचा रही हैं।
संपन्न परिवार की धृति वैभव शर्मा, जिनके पति इंजीनियर हैं, और वह दो बच्चों की मां हंै। धृति सामाजिक संस्था युवा पहल से जुड़ी हुई हैं। तीन दिन पहले देवेन्द्र नगर रहवासी बुजुर्ग अजीत दास और उनकी पत्नी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकली, तो उन्हें एम्स तक ले जाने वाला कोई नहीं था। दास दंपत्ति के बेटे इंग्लैंड और पुना में थे। ऐसे कठिन समय में कुछ परिचितों ने युवा पहल के लोगों से संपर्क किया, और फिर धृति ने खुद पीपीई किट पहनकर अपनी कार से एम्स में भर्ती कराया।
युवा पहल के प्रमुख राहुल शर्मा बताते हैं कि संस्था निशुल्क एम्बुलेंस, और शव वाहन उपलब्ध करा रही है। कोरोना के चलते संस्था के सदस्य खुद पीपीई किट पहनकर पीडि़तों को अस्पताल ले जा रहे हैं, और कोरोना से दिवंगत हो चुके लोगों के शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। बोरिया खुर्द के रहवासी मानिकलाल साहू और माना के डे साहब की कोरोना से मृत्यु हुई, तो युवा पहल के सदस्य पीपीई किट पहनकर शुभम घोष ने घंटों मशक्कत कर शव लेकर एम्बुलेंस से नया रायपुर के श्मशान घाट पहुंचाया, और अंतिम संस्कार करने में परिजनों की मदद की। संस्था से जुड़े राजेश साहू भी रोज इस तरह का काम कर रहे हैं।
ऐसे ही कुछ दिन पहले मूलत: बिहार के रहवासी चंगोराभाठा में रहने वाले सुमित कुमार, जो कि मदर डेयरी फूड में एरिया सेल्स हेड के रूप में काम करते हैं, कोरोना संक्रमित हो गए। वे घर पर अकेले थे। उनके बड़े भाई की मृत्यु होने के कारण पूरा परिवार बिहार गया हुआ था। ऐसे कठिन समय में युवा पहल से संपर्क साधा, और इलाज की पूरी व्यवस्था युवा पहल के सदस्य नवीन ने की। अब सुमित की हालत बेहतर बताई जा रही है।
इसी तरह भनपुरी के 65 वर्षीय सुभाष शर्मा की कोरोना से मृत्यु हुई, तो घर पर पत्नी और बेटी थी। परिवार का कोई पुरूष सदस्य नहीं था, ऐसे कठिन समय में युवा पहल से जुड़े लोगों ने पीपीई किट पहनकर शव का अंतिम संस्कार किया। संस्था का महादेवघाट श्मशान घाट के पास दफ्तर है, और वहां से अंतिम संस्कार के लिए आए लोगों के लिए पानी और सेनिटाइजर की मुफ्त व्यवस्था की जा रही है। यह सभी कार्य संस्था के लोग आपसी सहयोग से कर रहे हैं, अलबत्ता एम्बुलेंस और शव वाहन के लिए जरूर कई दानदाताओं ने सहयोग किया।
राहुल बताते हैं कि रोजाना अस्पताल में बेड लाने से लेकर इलाज की सुविधा मुहैया कराने तक के लिए सैकड़ों फोन आ रहे हैं। कई बार बेबसी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि अस्पतालों में जगह नहीं रह गई है, और हालत बद से बदतर हो रहे हैं। संस्था कई मौकों पर चाह कर भी पीडि़तों की मदद नहीं कर पा रही हंै। कुछ भी हो, संस्था से जुड़े लोगों के सेवाभावी कार्यों की चर्चा लोगों की जुबान पर है।




