ताजा खबर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 9 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज को लेकर जितना बड़ा बिल बनाया जा रहा है उसके खिलाफ आज राज्य के बहुत से मीडिया-संपादकों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की। यह बातचीत मुख्यमंत्री की तरफ से आमंत्रित वीडियो-बैठक में हो रही थी, और बहुत से लोगों ने निजी अस्पतालों द्वारा आपदा को अवसर में बदलने के खिलाफ कुछ करने का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पर कहा कि निजी अस्पतालों को भी मानवीय दृष्टिकोण दिखाना चाहिए, वे इस पर डंडा तो चलाना नहीं चाहते, लेकिन सरकार इस बारे में अस्पतालों से बात जरूर करेगी।
कई संपादकों ने सरकार से कहा कि राज्य सरकार को अस्पतालों की फीस तय करनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री का कहना था कि कोरोना के इलाज की फीस तो तय की जा सकती है, लेकिन जब मरीज को दूसरी गंभीर किस्म की बीमारियां भी होती हैं, तो उसके इलाज की फीस तय करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि वे अधिकारियों से कहेंगे कि वे अस्पतालों से बात करें।
सीएम के सामने यह सुझाव भी आया कि अस्पतालों में मरीजों के लिए बिस्तर नहीं बचे हैं और ऑक्सीजन की सुविधा वाले बिस्तरों की भी कमी है जिसे बढ़ाना चाहिए। इस पर भूपेश बघेल का कहना था कि बहुत से लोग मंत्री या मुख्यमंत्री से फोन करवाकर अस्पतालों में ऐसी सुविधा वाले बिस्तरों पर जा रहे हैं जिस सुविधा की उन्हें जरूरत नहीं है। जिनका ऑक्सीजन लेवल अच्छा है वे भी ऑक्सीजन वाले बेड पर जाना चाहते हैं। नतीजा यह होता है कि जिन मरीजों को सचमुच ही ऑक्सीजन की जरूरत है उनके लिए वैसी सुविधा वाली जगह बचती नहीं है।


