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कोरोना महामारी की समस्या से जूझ रहे किसानों की एक और परेशानी बढ़ गई है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक सहकारी क्षेत्र के इंडियन फारमर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव (इफ़्को) ने डीएपी खाद की कीमतों में 58.33 फ़ीसदी की वृद्धि कर दी है. नई कीमतों में डीएपी खाद का 50 किलो का बैग अब 1,200 रुपये की जगह 1,900 रुपये में मिलेगा जबकि नाइट्रोजन फॉस्फोरस पोटैशियम (एनपीके) के 50 किलो के बैग की कीमत 1,350 रुपये से बढ़कर 1,800 रुपये कर दी गई है.
निजी क्षेत्र की कंपनियों ने बीते महीने ही 50 किलो के बैग की कीमत 300 रुपये बढ़ाई थी. ख़बर में इफ़्को के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में डीएपी में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फेट की कीमते बढ़ने की वजह से यह इज़ाफ़ा किया गया है. उनका यह भी कहना है कि भारत में इनकी उपलब्धता कम है और इन दोनों उत्पादों का आयात करना पड़ता है. (bbc.com)
बढ़ी हुई कीमतें पहली अप्रैल से प्रभावी कर दी गई हैं.
काँग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने खाद की कीमतों के बढ़ने पर ट्वीट किया, "73 साल में सबसे महंगी और ज़ालिम सरकार, हर रोज़ किसान पर करती नया वार. जो कभी नहीं हुआ, वो जुल्म कर दिखाया, मोदी सरकार ने 700 रुपये डीएपी खाद बढ़ाया. 1,200 रुपये (50 किलो) का डीएपी 1,900 रुपये के पार. मोदी जी पहले ही खेती की लागत 15 हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ा चुके हैं. सब याद रखा जाएगा."


