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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 6 अप्रैल। आर्थिक अनियमिततता की जांच के बाद दायर किये जाने वाले चालान के खिलाफ दायर पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वदी की याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।
पिछले साल 10 मई को ईओडब्ल्यू-एसीबी ने अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। चतुर्वेदी पर टेंडर प्रक्रियाओं में जालसाजी कर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का आरोप है। उन पर आरोप है कि जो टेंडर दाखिल किये गये थे उनमें निविदाकारों के हस्ताक्षर भी नहीं थे। फर्जी बिजली बिल बनाकर लाखों रुपये का आहरण करने के आरोप की भी जांच चल रही है। चतुर्वेदी को पाठ्य पुस्तक निगम में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया था, प्रतिनियुक्ति नवंबर 2019 में समाप्त कर दी गई। इसके बाद आर्थिक अनियमितता का मामला पकड़ा गया, जिसकी शिकायत पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से ईओडब्ल्यू-एसीबी से की गई थी। जांच एजेंसियां राशि आहरण में गड़बड़ी और आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने की जांच कर है।
चतुर्वेदी ने इसके बाद अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर कहा कि वे एक जिम्मेदार अधिकारी है, इसलिये कोर्ट की अनुमति के बिना उनके खिलाफ चालान प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट में जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।


