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हाऊसिंग बोर्ड पर साढ़े 8 सौ करोड़ का कर्जा खाली प्रापर्टी के दाम कम कर बेचने की तैयारी
12-Mar-2021 1:02 PM
हाऊसिंग बोर्ड पर साढ़े 8 सौ करोड़ का कर्जा खाली प्रापर्टी के दाम कम कर बेचने की तैयारी

  नई योजनाएं अटकी  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 मार्च।
छत्तीसगढ़ हाऊसिंग बोर्ड पर करीब साढ़े 8 सौ करोड़ से अधिक का कर्ज है। बताया गया कि बोर्ड ने कर्ज से उबरने के लिए एक बार फिर खाली पड़े प्रापर्टी को कीमत कम कर बेचने की योजना बनाई है। इस पर जल्द फैसले की उम्मीद है। 

हाऊसिंग बोर्ड भारी भरकम कर्ज के बोझ के तले दबा है। मौजूदा हाल यह है कि हाऊसिंग बोर्ड पर 869 करोड़ 62 लाख से अधिक बैंकों का कर्जा है। यह कर्जा केनरा और इलाहाबाद बैंक से लिया गया था। बोर्ड फिलहाल सिर्फ ब्याज का ही भुगतान कर पा रहा है। भारी भरकम कर्ज की वजह से नई योजनाओं पर काम नहीं हो पा रहा है। साथ ही कर्मचारियों की छंटनी की नौबत आ गई है। 

बताया गया कि अब बोर्ड ने खाली पड़े प्रापर्टी को बेचकर कर्ज मुक्त होने की योजना बनाई है। हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप जुनेजा ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि बोर्ड की बिक्री योग्य करीब 12 सौ करोड़ की प्रापर्टी है, जिसके दाम कम कर बेचने की योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रापर्टी बिक गई तो बोर्ड कर्ज मुक्त हो जाएगा, और बोर्ड फायदे में आ जाएगा। कीमत कम करने पर जल्द फैसला होगा। 

बताया गया कि सरकार की मंजूरी के बाद कीमत कम कर रायपुर, राजनांदगांव, जशपुर और बालोद में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की बिक्री की गई। इससे 62 करोड़ की आय हुई थी। फिर से बाकी प्रापर्टी को बेचकर राशि जुटाने की कोशिश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद जोगी सरकार ने हाऊसिंग बोर्ड को भंग कर दिया था। रमन सरकार ने दोबारा बोर्ड का पुनर्गठन किया। काफी समय तक बोर्ड फायदे में रहा।
 
बोर्ड आवासीय और व्यावसायिक कॉम्पलेक्स के लिए पहले उपभोक्ताओं से धन राशि जुटाता था, इसके बाद ही निर्माण करता था। कुछ साल पहले नीति बदलकर कर्ज लेकर बड़े पैमाने पर निर्माण कर दिया, और ये बिक नहीं पाए। इसका खामियाजा भुगतना पड़ा, और बोर्ड कर्ज के मकडज़ाल में फंस गया। अब कर्ज मुक्ति के लिए कोशिश हो रही है।


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