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बस निर्माता स्कैनिया ने सात राज्यों में ठेके के लिए दी रिश्वत, रिपोर्ट में 'एक मंत्री' का भी जिक्र
10-Mar-2021 7:02 PM
बस निर्माता स्कैनिया ने सात राज्यों में ठेके के लिए दी रिश्वत, रिपोर्ट में 'एक मंत्री' का भी जिक्र

-Shatakshi Asthana 

बस निर्माता कंपनी स्कैनिया ने भारत में सात राज्यों में ठेके के लिए रिश्वत दी थी। तीन मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट में एक मंत्री को रिश्वत देने की बात भी कही है लेकिन नाम का जिक्र नहीं किया गया है।

स्टॉकहोम
स्वीडन की ट्रक और बस निर्माता कंपनी स्कैनिया ने भारत में सात राज्यों में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए साल 2013 से 2016 के बीच रिश्वत दी थी। स्वीडन के न्यूज चैनल SVT ने दो और मीडिया आउटलेट्स के साथ की गई जांच के आधार पर यह दावा किया है। SVT, जर्मन ब्रॉडकास्टर ZDF और भारत के कॉन्फ्लुएंस मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक भारतीय मंत्री को भी रिश्वत दी गई थी जिसका नाम जाहिर नहीं किया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक भारत सरकार के प्रतिनिधि ने बिजनस आवर्स के बाहर जवाब देने से इनकार कर दिया।

बंद हो चुकी फैक्ट्री
कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक इसकी जांच 2017 में शुरू की थी जिसमें सीनियर प्रबंधन समेत कई कर्मचारियों की गलती पाई गई थी।स्कैनिया फॉक्सवैगन एजी की कमर्शन वीइकल आर्म Traton SE की यूनिट है जिसने भारत में 2007 में ऑपरेशन्स शुरू किए थे और उत्पादन 2011 में शुरू किया था। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, 'इसमें रिश्वत देने, बिजनस पार्टनर के जरिए रिश्वत और गलत प्रतिनिधित्व के आरोप शामिल थे।' उन्होंने बताया कि उसके बाद से स्कैनिया ने भारतीय बाजार में बसें बेचना बंद कर दिया और फैक्ट्री को भी बंद कर दिया गया।

रद्द हुए कॉन्ट्रैक्ट
CEO हेनरिक हेनरिकसन ने SVT को बताया, 'हम नासमझ हो सकते हैं लेकिन हमने ऐसा किया। हम भारत में बड़ी सफलता हासिल करना चाहते थे लेकिन हमने जोखिम का सही आकलन नहीं किया।' हेनरिकसन ने बताया कि भारत में गलती कुछ लोगों ने की थी जिन्होंने कंपनी छोड़ दी है और जितने बिजनस पार्टनर इससे जुड़े थे, उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं।

लाइसेंस प्लेट बदलकर बेचने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक स्कैनिया ने ट्रक के मॉडल्स में भी फर्जीवाड़ा किया और लाइसेंस की प्लेटें बदलकर भारतीय खनन कंपनी को बेचने की कोशिश की। यह डील 1.18 करोड़ डॉलर में की जा रही थी। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'स्कैनिका के बिजनस कोड के उल्लंघन के पर्याप्त सबूत हैं जिससे कंपनी कड़ी कार्रवाई कर सकती है लेकिन इतने मजबूत नहीं हैं कि अभियोजन चलाया जाए। (navbharattimes.indiatimes.com)


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